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Monday, June 15, 2009

अम्मा जरा देख तो ऊपर

कक्षा एक में ये कविता पढ़ी थी. कोर्स की किताब में थी. बहुत प्यारी कविता है. मुझे तो तब से याद है. आपको भी याद होगी. अगर याद नहीं हो, तो याद ताजा कर लें.


अम्मा जरा देख तो ऊपर
चले आ रहे हैं बादल
गरज रहे हैं, बरस रहे हैं
दीख रहा है जल ही जल

हवा चल रही क्या पुरवाई
भीग रही है डाली-डाली
ऊपर काली घटा घिरी है
नीचे फैली हरियाली

भीग रहे हैं खेत, बाग़, वन
भीग रहे हैं घर, आँगन
बाहर निकलूँ मैं भी भीगूँ
चाह रहा है मेरा मन

बचपन में किसी पत्रिका में पढ़ी एक और कविता याद आ गई. आप भी पढें.

छुक-छुक करती, छुक-छुक करती
रेल चली जब दिल्ली से
टीटी चूहा झट आ पहुंचा
टिकट मांगने बिल्ली से
लेकिन बिल्ली बिना टिकट की
चूहे ने तब ली खिल्ली
झट जुर्माना करके बोला
गंदी होती है बिल्ली
....................................................................

फिल्म कलाकार जोगिन्दर नहीं रहे. उन्हें मेरी श्रद्धांजलि.

....................................................................

औत अंत में:

कल हुए ट्वेंटी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप के मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को हरा दिया. इस हार की वजह से भारतीय टीम अब वर्ल्ड कप प्रतियोगिता से बाहर हो गई है. भारतीय टीम के प्रशंसक दुखी हैं. वैसे मेरा मानना है कि टीम ने खेल भावना के साथ अपना काम किया. जीत-हार तो खेल का हिस्सा है.

33 comments:

Udan Tashtari said...

जोगिन्दर जी को मेरी श्रद्धांजलि.

ऐसी पोस्ट ही ठीक रहेगी-सेफ एण्ड साऊंड!! :)

कल कक्षा २ वाली सुनाना-माँ, मुझको एक लाठी दे दे... :)

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

वाह! उस जमाने में रिकार्ड प्लेयर पर फुल वाल्यूम में नगेसरा सुनता था - दरद मोरे होय बिच्छी के मारे!

दरद अब तक होत बा! :)

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

बीबीसी हिन्दी की महत्वपूर्ण खबर पोस्ट में क्यों न आई:
हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन उर्फ़ चाँद मोहम्मद की दूसरी पत्नी अनुराधा बाली उर्फ़ फ़िज़ा के चंडीगढ़ के पास मोहाली में स्थित घर पर रविवार देर रात चली पुलिस की गोली से एक युवक घायल हो गया.

पुलिस ने चार लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस पर हमला करने का मामला दर्ज किया है. घायल युवक को मोहाली के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

पुलिस का कहना है कि फ़िज़ा ने कंट्रोल रूम को फ़ोन कर पुलिस बुलाई थी.

आरोप-प्रत्यारोप

पुलिस के मुताबिक़ रविवार देर रात फ़िज़ा के घर पर 10-12 गाड़ियों में सवार होकर 50-60 लोग आए और वहाँ हंगामा करने लगे. पुलिस ने उन्हें वहाँ से हटाने का प्रयास किया. इस बीच एक एएसआई की बंदूक से चली गोली से हिसार के आदमपुर निवासी अशोक कुमार घायल हो गए.

अंशुमाली रस्तोगी said...

अरे शिवजी इस कविता को मेरी बेटी रोज मुझे सुनाती है। बेहद सुरीले अंदाज में। धन्यवाद इसके लिए।

संजय बेंगाणी said...

जोगिन्दर जी को श्रद्धांजलि.
और सेफ-एण्ड-साउंड के चक्कर में पड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है.

काफी टाइम said...

लाठी लेकर भालू आया
छम छम छम छम छम छम
ढोल बजाता मैंढक आया
ढम, ढम, ढम ढम, ढम, ढम

मैंढक ने ली मीठी तान
और गधे ने गाया गान

भैय्या, इसमें भालू के हाथ में लाठी दे दी है, क्या कोई अस्त्र शस्त्र अधिनियम तो नहीं लगता?

गधे से गाना गवा दिया है, कोई गायक अपने ऊपर तो नहीं समझेगा?

काफी टाइम said...

उठो लाल अब आखें खोलो
पानी लाई हुं मुंह धोलो
बीती रात कमल दल फूले
उनके ऊपर भोंरे झूले
नभ में प्यारी लाली छाई
हवा चल रही क्या पुरवाई
एसा सुन्दर समय न खोओ
मेरे प्यारे अब मत सोओ


स्पष्टीकरण: जगाने से अर्थ सिर्फ सोते हुये को जगाने से है, जन जागरण के लिये अन्यथा न लिया जाय

neeraj1950 said...

बंधू आपकी पोस्ट से बचपन याद आ गया तब ये कविता सच्ची लगती थी....तब बारिश समय पर हुआ करती थी..आज अगर ये कविता लिखी जाती तो यूँ होती:
अम्मा जरा देख तो ऊपर
गए कहाँ सब बादल
ना गरजें ना बरसें हैं ये
कहीं ना दिखता अब जल

भारत हार गया लेकिन हमारी रात ख़राब हो गयी...दो बजे तक जागे और हाथ कुछ आया नहीं...ये कैसी खेल भावना है? इस से अच्छा तो हम चले जाते खेलने..आप तो हमारा खेल देखें ही हैं...युवराज की जगह आप चलते और गंभीर की जगह संजय भाई...कप जीतना फिर कौन मुश्किल काम था...
नीरज

रचना said...

माँ से पहले नानी का स्थान हैं
सो याद करे
"नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए
बाकी जो बच्चा था काले चोर ले गए "

वैसे एक गाना भी याद आ रहा हैं
" भाभी करे अपील और फिर देवर बने वकील
मुकदमा जीतेगा "

हिमांशु । Himanshu said...

वाह प्रविष्टि की कविता के साथ टिप्पणी की कवितायें भी बचपन का सारा सुर-राग याद करा दे रही हैं । आभार ।

डा० अमर कुमार said...


मछली जल की रानी है
शिव जी बहुत ज्ञानी हैं
पोस्ट पढ़वाओगे हम तर जायेंगे
यह पढ़वाओगे सब मर जायेंगे
( कानूनी मशवरे के बाद दी है टिप्पणी,
कृपया इसे माडरेट न करें )

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

सिर्फ कवितायेँ नही चलेंगी कहानियां भी सुनाई जाएँ
वो वाली सुनाइए जिसमे भेड़िया भेडों को यह कहता है - "तुम्हे जिन्दा खाऊं या भुनकर यह तय करने का जनतांत्रिक अधिकार हम तुम्हे देते हैं, सोंच समझ कर बोलना वरना ..."

कवितायेँ अच्छी थी

neeraj badhwar said...

बचपन में ठीक से पढ़े होते तो कविता भी ज़रूर सुनी होती। खैर, अब पढ़वाने का शुक्रिया।

क्रिकेट टीम के वर्ल्ड कप से बाहर होने का मुझे भी बहुत अफसोस है मगर इससे भी ज़्यादा इस बात का कि कुछ लोग उन्हें देश से बाहर करने की मांग कर रहे हैं!

परमजीत बाली said...

पोस्ट के साथ टिप्पणीयां भी पढ कर आनंद आ गया।बचपन याद आ गया।

रंजन said...

पुरे घटनाक्रम में आपके विरोध का तरिका बहुत नायाब है....

पंगेबाज said...

शिव भाई आपकी मेल मिली ,मैने आपकी पोस्ट और टिप्पणियो को वकील साहब को दिखाया उनका कहना है वैसे इस पोस्ट और टिप्पणियो मे कोई दिक्कत नही है . लेकिन अगर कोई सिरफ़िरा पीछे पड ही जाये तो उनका कहना है कि निम्न बातो परआपको और टिप्पणी कारो को परेशान किया जा सकता है
१.अगर वो आपकी इन दोनो कविताओ को उसके मूळ लेखक या उसके पबलीशर को पढवा कर उकसा दे तो आप को कापी राईट अधिनियम के तहत परेशानी मे पड जायेगे अत: तुरंत प्रभाव से इन्हे हटा दे .
२.ये दूसरी कविता मे आपके चूहे से बिल्ली की हसी उडवाई है और उसे गंदा बताया है इसे कोई भी बिल्ली समाज स्वीकार नही करेगा. इस पर कोई भी बिल्ली को उकसा कर आप पर बिल्ली के ंउल भूत अधिकारो के उलंघंन का केस डलवा कर आप को परेशान कर सकता है, तुरंत हटादे
३.जोगिंदर जी को हमारी भी श्रद्धांजली. लेकिन देख ले जोगिदर जी ने हमेशा विलेन का रोल किया है कल कोई आप पर कल कही कसाब के साथियो को भी श्रद्धांजली ना देने के कारण करते हुये आतंकवादियो के मानवाधिकार हनन का आरोप लगाकर सम्मन ना भिजवा दे तुरंत इसे हटा ही दे . हमारी हालत देख कर शिक्षा ले पंगा रहने ही दे .
४.ये खबर आपने काहे छापी ? आप अखबार चलाते है क्या ? ब्लोग पर इस तरह की खबरो का क्या मतलब? तुरंत हटाईये इसे कोई भी सिरफ़िरा यहा पर आप भारतीय दर्शको की भवानाओ का मजाक उडा रहे है के संदर्भ मे लेकर आपको सालो चक्कर कटवा देगा .
५.ये उडन तशतरी जी भले ही कनाडा मे बैठे हो पर नतीजा इन्हे भी भुगतना पड सकता है . बस जरा ये देखना होगा कि कनाडा से भारत सरकार की कोई ट्रीटी है या नही. अगर है तो ये गये काम से . सीधे सीधे ये उपर बताये क्राईम के साथ छॊटे छॊटे बच्चो को लाठी देकर भारत की अंखंडता के विरुद्ध खडा करना चाहते है इनके खिलाफ़ तो मकोका कम से कम लगेगा. और आपके खिलाफ़ भी तुरंत हटाईये इस टिप्पणी को
६.ये ज्ञान जी पर कोई भी सिरफ़िरा नागेश्वर को उकसाकर नगेसरा कहने ( यानी उस्के नाम की) हसी उडाने के चक्कर मे लपेटवा देगा . तुरंत हटादे.
७.भाई आप ज्ञान जी को सम्झाओ . इतने उम्र दराज ब्लोगर होकर ऐसी टिप्पणिया ?कोई भी सिरफ़िरा मिनिट से पहले फ़िजा को उकसा कर उसके घर के बारे मे अफ़वह फ़ैलाने के जुर्म मे अंदर करा देगा. ये खबर इन्हे अखबार से पता चली बताने मे कई साल निकल जायेगे तब तक ये अपनी गाढी कमाई फ़िजा के साथ खडे उस सिरफ़िरे को दे चुके होंगे . तुरंत हटादो
८.बिटिया कविता सुनाती है ये ठीक है. पर इस कविता के पब्लिक को सुनाने के राईट अशुंमान जी की बिटिया के पास है या नही देख ले . वरना इस पर भी ...... मुझे लगता नही उन्होने लिये होंगे .हटा ही दे पंगा नाले जी
९.संजय जी उपर बताये मामले मे अभियुक्त बनते दिखाई दे रहे है . हटा दे
१०. काफ़ी टाईम . इन पर बेनामी होकर दूसरे की कविता अपने नाम से लिखने का और आप पर छापने का मामला बनता है . कापी राईट का तो उलंघन है ही साथ ही लाल को आंखे खोलने के लिये दबाव देने का भी मामला दिख रहा है . आप सहाभियुक बनते दिख रहे है तुरंत हटाये.
११. नीरज जी पर कविता की ंऊल भावना से छेडछाड साफ़ दिखाई दे रही है इसके साथ मूल कवि से प्राप्त इजाजत की मूल प्रति भी छापे . वरना हटादे . कापी राईट उलंघन एंव कविता की आत्मा से छेड्छाड साफ़ दिखरही है . लंबे नही फ़सना तो तुरंत हटाये
१२. रचना जी द्वारा लिखा ये गाना भी कापी राईट का उलघंन है तुरंत हटाये.
१३.हिमाशुं जी इन उपरोक्त मे सह्यभागी और उन्हे उकसा कर अपराध कराने मे संलग्न दिखाई दे रहे है .एक दम हटादे .
१४.ये डा. अमर कुमार जी पर सीधे सीधे मगर मच्छॊ के मान हनान का केस बनता है . कोई भी दो मिनिट मे मगर मच्छॊ को उकसा कर पूरे ब्लोग की ऐसी तैसी करा सकता है . तुरंत हटादे
१५.लवली जी यहा सबको उकसा रही है कि उनके साथ जनतंत्र की खिल्ली उडाई जाये तुरंत हटाये जमानत बी नही मिलेगी . अगर किसी सिरफ़िरे
का दिमाग फ़िर गया तो
१६.नीरज जी परमजीत जी एंव रंजन जी की टिप्पणियो मे वकील साहब बहुत ज्यादा उलंघन नजर आ रहे है . मै अभी अपने वकील साहब के साथ उनके सीनीयर के पास जा रहा हू तब तक आप इन्हे भी हटा कर माडरेशन मे रखे . थोडी देर मे बताता हू कि इन पर क्या क्या हो सकता है.बस जो बताया उन्हे तुरंत प्रभाव से हटादे
उपरोक्त मामलो को हटाकर बाकी सब ठीक है धडल्ले से छापे रहे कोई मामला नही बनता

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

@ पंगेबाज - नागेश्वर मेरा खुद का राशि का नाम है। लिहाजा किसी अन्य पर कटाक्ष नहीं है। और बीबीसी की खबर उनके संवाददाता असित जौली की है।

बाकी लोगों की बात बाकी लोग जाने।

काफी टाइम said...

ऊपर के कमेन्ट में मेरे नाम से लिखी कवितायें मेरी न मानीं जायें
हो सकता है के मेरे नाम से किसी और ने इन्हें लिख दिया हो

आगे से मैं तो सिर्फ एसी पोस्ट लिखा करूंगा, ये एकदम निरापद लेखन है

Udan Tashtari said...

एन्टीसिपेटरी बेल ले ली है. फिर भी सोचता हूँ कि हर पोस्ट और टिप्पणी के साथ खुद ही एक राऊन्ड आत्म समर्पण करके जज के सामने उपस्थित हो जाया करुँ.

अबसे रुटीन बदलना पड़ेगा.

वैसे पंगेबाज पर अब साहित्यजगत को अपरोक्ष हानि (न लिखने से) पहुँचाने का केस बनता है.

poemsnpuja said...

kya post hai...aur kya tippaniyan...maza aa gaya hamein to. issko kahte hain carry over effect, kahan kahte hain ye yaad nahin aa raha, copyright ka ullanghan to nahi hoga?
waise ye kavita hamne nahin padhi thi, padh kar bachpan jaroor yaad aa gaya, aur jo kavita yaad aayi wo nahin likhenge, lekhak ka naam yaad nahin hai. yahan bangalore me koi bel nahin milne wala :D yahan doosre tarah ke fal milte hain.

परमजीत बाली said...

पंगेबाज जी हमनें टिप्पणी करने से पहले अपने वकील की सलाह ले ली थी। सो कोई चिन्ता नही है जी;))

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

सोच रही हूँ ,
वकील बन ही जाऊं ...
या फिर राजनेता ? :)
कविता पसंद आयीं शिव भाई



- लावण्या

ताऊ रामपुरिया said...

भाई हमारा क्या होगा? हमने ना तो कविता पढी और ना सुनी. आजकल फ़ोकट मे पढने सुनने पर भी कापी राईट होता होगा?

हम तो बचपन मे कच्ची पहली मे एक कविता पढी थी अब से वही छाप कर ब्लागिंग करेंगे. कोई पूछेगा तो कह देंगे कि अम्मा को याद कर रहे थे.

मां आ
आ मा


बस इत्ती सी ही कविता है?

रामराम.

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

अरुण जी की सलाह मान कर अग्रिम जमानत ले ली है जी ..अब डर काहे का. सोंचती हूँ सैयां कंप्युटर व्याख्याता काहे हुए कोतवाल काहे न हुए.

सुमन्त मिश्र ‘कात्यायन’ said...

घासीराम कोतवाल की, शांततः कोर्ट चालू आहे में, सखाराम बाइण्डर जैसा कुछ, कब तक चलेगा.................?

अनूप शुक्ल said...

जोगिन्दर जी को श्रद्धांजलि!
चौचक रागिया पोस्ट । सब नोट किया जा रहा है!

डा० अमर कुमार said...


योर ब्लागरशिप, पाँइट इज़ टू बी नोटेड,
अनूप शुक्ल कचहरी में तैनात नहीं हैं,
अतः इनके द्वारा कुछ भी नोट किये जाने का मैं विरोध करता हूँ,
और इसे इस कार्यवाही अनाधिकृत दख़ल मानता हूँ ।
अब अभियोजन अगली टिप्पणी पेश करे !

Shiv Kumar Mishra said...

आप सबकी टिप्पणियों के लिए आप सब को धन्यवाद.

बचपन में सुनी गई कवितायें कितनी प्यारी होती हैं. किसी राम दरश मिश्र, किसी अज्ञेय जी, किसी ओसोलन मोशावा, किसी सियामा आली, किसी अझेल पास्त्रो या किसी नाजिक अल-मलाइका की कविताओं से बिलकुल अलग.

यही कारण था कि मैंने इन कविताओं को पेश किया. आप सब को अच्छी लगीं, इसके लिए आप सब का आभार. यह तो आपका बड़प्पन है कि आपको कवितायें अच्छी लगीं. या फिर बुरी भी लगी होंगी तो आपने बताया नहीं. यह तो उच्चकोटि का बड़प्पन है. दोनों ही स्थितियों में आपसब ने बड़प्पन का साथ न छोड़ते हुए उसे नए आयाम दिए.

सोचा था इसी कड़ी में कुछ और कवितायें प्रस्तुत करूंगा जिससे आपसब को मौका मिले कि आपसब अपने बड़प्पन को और ऊपर ले जा सकें. ऊपर से आपसब से साधुवाद, बधाई वगैरह की प्राप्ति होती सो अलग. कविता प्रस्तुत करने वाले को और क्या चाहिए?

लेकिन कुछ टिप्पणियां पढ़कर लगा कि ऐसी बालसुलभ कवितायें भी निरापद हों, कोई ज़रूरी नहीं है. एक पाठक मित्र ने टिप्पणी नहीं की लेकिन फोन पर बताया कि ऐसी कवितायें भी निरापद नहीं हैं. कह रहे थे कि; "कविता की पहली लाइन; 'अम्मा जरा देख तो ऊपर' में कुछ मामला बनता है."

मैंने कारण पूछा तो बोले; "कोई भी इस लाइन को पढ़कर जिज्ञासु हो सकता है. यह सोचते हुए कि बच्चा अपनी माँ से ऊपर देखने के लिए क्यों कह रहा है? क्या उसने टाफी के डिब्बे में राखी टाफी चुरा ली है? शायद इसलिए अम्मा को ऊपर देखने के लिए उकसा रहा है. शायद उसने प्लान बना रखा है कि जैसे ही अम्मा ऊपर देखेगी, वह टाफी को मुंह में रख लेगा? या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि वह अम्मा को ऊपर देखने के लिए इसलिए उकसा रहा है कि अम्मा ऊपर देखेंगी और काले-घने बादलों को देखकर डर जायेंगी? अगर ऐसा हो गया तो बच्चा दरी हुई अम्मा को देखकर हँस लेगा?"

आगे बोले; "दोनों ही स्थितियों में बाल-अपराध बनता है. ऐसे में इस तरह की कवितायें ब्लॉग पर पब्लिश करने से पहले सतर्क हो जाओ."

अब समझ में नहीं आ रहा कि १००% शुद्ध निरापद लेखन कैसे करूं? खैर एक आईडिया आया है. अभी नहीं बताऊँगा नहीं तो न जाने कितने ब्लॉगर उसे अपना लेंगे. शाम तक एक १००% शुद्ध निरापद लेखन वाली पोस्ट ठेलता हूँ.

तबतक के लिए राम राम.

(राम राम कहने के लिए ताऊ जी से इजाजत ले ली है. इसलिए ब्लॉगर बन्धुवों से अनुरोध है कि ताऊ जी का नाम लेकर मुझे न डरायें. यह आपसब के सूचनार्थ...)

हाँ, पूजा से एक बात कहनी है. बेंगलुरू को बैंगलोर कहना ठीक नहीं है. यहाँ मामला बनता है. सुना है कि आपके शहर में बेल नहीं मिलता. बाकी के फल मिलते हैं...:-)

रंजना said...

हा हा हा हा......हा हा हा हा....

(शायद यह सेफ हो.......)

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

रंजना जी, आप किसी पर ठहाके लगा रही हैं और सोचती हैं कि शायद यह सेफ हो। भगवान न करे यदि इस ठहाके का असली लक्ष्य पात्र आपको ताड़ गया तो सारी हँसी निकल जाएगी। जरा सोच समझकर हँसा कीजिए। :)

punter said...

aap ko yeh kavita class 1 se maloom hai,very amazing.aap t20 wc par ek vishesh blog avashya likhe,i would love to read that.agar aapko bachpan ki koi aur kavita malum hai toh uske bhi post karein.

विवेक सिंह said...

आप शायद विश्वास न करें पर इस कविता को मैं काफ़ी अर्से से खोज रहा था ! आपका धन्यवाद !

हो सके तो चूहों की सभा वाली कविता और प्रस्तुत की जाय , बहुत कृपा होगी ! फ़िर से धन्यवाद !

Krishna Kumar Mishra said...

श्रीमान शिवकुमार जी व पाण्डेय जी आप को बहुत-बहुत धन्यवाद जो आप ने आम्मा जरा देख........चले आ रहे हैं बादल वाली कविता प्रकाशित की, क्योंकि मेरी मां ने मुझ से अभी कहा कि आज उन्हे बहुत पुरानी कविता याद गयी, जब वह छत पर गयी और आसमान की तरफ़ देखा किन्तु कुछ लाइनों के सिवा आगे की कविता उन्हे नही याद थी। मै आनलाईन था और बड़े गर्व से बोला अम्मा अभी आप को वह पुरानी रचना पढ़वाता हूं नेट पर मेरा अथाह विश्वास टूटने लगा जब पहली दफ़ा मैनें गूगल में कविता के कुछ शब्द लिखे। किन्तु जैसे मैने दोबारा थोड़ी हेर-फ़ेर कर कविता की पहली पंक्तिया सर्च की आप मिल गये इस कविता के साथ।...........धन्यवाद मेरी मां की तरफ़ से जिनकी सुखद विस्मित स्मृतियों को आप ने ताज़ा करा दिया।