Show me an example

Tuesday, October 27, 2009

आखिर ब्लॉगर हैं..हर स्थिति में अपना झंडा गडेगा ही.

इलाहबाद में ब्लॉगर संगोष्ठी हो गई. जब संगोष्ठी का पता चला तो एक बार मन में आया कि; 'अगर मुझे निमंत्रण न मिला तो एक 'सॉलिड पोस्ट' लिखने का बड़ा सॉलिड बहाना हाथ लगेगा.' यह कहते हुए 'सॉलिड पोस्ट' लिख डालूँगा कि; 'जिन्हें निमंत्रण भेजा गया उनके चुनाव का क्राइटेरिया क्या था? क्यों उन्हें ही निमंत्रण भेजा गया और मुझे नहीं?'

एक पोस्ट लिखकर उन सारे चिट्ठाकारों को अपनी तरफ कर लूँगा जिन्हें निमंत्रण नहीं भेजा जाएगा. टिप्पणियां मिलेंगी सो मिलेंगी ही, आने वाले समय में एक गुट बना लूँगा जो मुझे हिंदी ब्लागिंग में अमर कर देगा. एक पोस्ट और न जाने कितने फायदे.

खैर, ऐसा हो न सका. आयोजकों ने मुझे भी निमंत्रण भेजकर मेरे इरादों पर पानी फेर दिया. फिर सोचा कि निमंत्रण मिल गया है तो यह कहकर ठुकरा दूँ कि; 'आप लोगों ने बड़े शार्ट नोटिस पर हमें निमंत्रण भेजा इसलिए मैं न आ सकूँगा.'

ऐसा भी नहीं कर सका. वो हुआ ऐसा कि जब ये विचार मन में आये तभी तबियत खराब हो गई. वैसे तबियत खराब होने के बावजूद भी इस विचार पर काम किया जा सकता था लेकिन मेरी गलती की वजह से ऐसा न हो सका. असल में मैं पहले ही दो-चार ब्लॉगर बंधु को अपने बीमारी के बारे में बता 'चूका' था. अगर यह बहाना बनाता तो वे लोग मेरी पोल खोल देते. बोलते; "फालतू का बहाना कर रहा है. तबियत खराब है और इस तरह का झूठा बहाना करके अपना भाव बढा रहा है."

ऐसा हो न सका. मतलब अपनी चालों से अपनी ईमेज न बना सका. इस मामले में तमाम ब्लॉगर बंधु बाजी मार ले गए. जिन्हें निमंत्रण न मिला था वे भी और जिन्हें निमंत्रण मिला वे भी.

वैसे इलाहबाद में अपने प्रचार का काम मैंने अनूप जी को आउटसोर्स कर दिया था. मैंने उन्हें एस एम एस भेजकर बता दिया कि अगर वे मेरी बीमारी की चर्चा कर देंगे तो मेरे 'सिम्पैथेक्स' (सहानुभूति का सूचकांक) में कुछ बढ़ोतरी हो जायेगी. स्वास्थ लाभ की कामना करते हुए ही कुछ टिप्पणियां मिल जायेंगी.

एक हिंदी ब्लॉगर को और क्या चाहिए? दस एक्स्ट्रा टिपण्णी और क्या. वो चाहे किसी भी वजह से मिलें.

खैर, संगोष्ठी के दूसरे दिन शाम को स्पानडिलाइटिस की वजह दर्द बहुत बढ़ गया. डॉक्टर को बुलाया गया. उन्होंने कहा; "कल तो लग रहा था कि काफी इम्प्रूवमेंट है. अचानक ऐसा क्या हो गया? क्या किया सारा दिन?"

मैंने कहा; "कुछ नहीं. आपने बेड पर लेटे रहने के लिए कहा था तो मैं लेटा था. हाँ लेटे-लेटे सेलफ़ोन पर इलाहबाद में हुई ब्लॉगर संगोष्ठी की रपट और फोटो देखता रहा."

उन्होंने पूछा; "आपको भी इनवाईट किया गया था क्या?"

मैंने कहा; "हाँ. मुझे भी इनवाईट किया गया था. लेकिन तबियत खराब होने की वजह से जा न सका."

बोले; "बात समझ में आ गई. वहां के आयोजन की रपट पढ़कर और बाकी ब्लॉगर की फोटो-सोटो देखकर ही दर्द बढ़ गया है. यह नए तरह का दर्द है. नाम देना हो तो दे सकते हो 'ब्लागर्स' जीलसी पेन'."

आगे बोले; "अगली बार निमंत्रण मिले तो ज़रूर जाना. चाहे जितना दर्द हो. वहां जाने से दर्द ठीक हो जाएगा. ये जो
स्पानडिलाइटिस हुआ है उसमें ब्लागिंग का ही हाथ है. हो सकता है जिसने दर्द दिया वही दवा भी दे दे. वैसे भी महान गीतकार लिख गए हैं कि; "तुम्ही ने दर्द दिया और तुम्ही दवा...."

तो अब तो डॉक्टर ने भी कह दिया है. अगली बार की तैयारी कर रहा हूँ. बस एक ही चिंता है. कहीं ऐसा न हो कि अगली बार निमंत्रण ही न मिले.

लेकिन फिर सोचते हैं कि अगली बार निमंत्रण न मिला तो फिर सॉलिड पोस्ट लिखने का विकल्प तो रहेगा ही. आखिर ब्लॉगर हैं तो हर स्थिति में अपना झंडा गडेगा ही.

32 comments:

मुनीश ( munish ) said...

Jealousy ? ha..ha..क्या होती है एक आदर्श ब्लोग्गर मीट , कैसे करते हैं उसकी रिपोर्टिंग , कैसे वहां बैठना, चलना और फोटू खिंचवाना ‘चहिये ‘ , और भी बहुत कुछ ……देखें सिर्फ़ यहाँ — maykhaana.blogspot.com

रचना said...

आप ने अपनी पोस्ट भेज दी चुनी हुई १०० पोस्ट की किताब जो हिन्दी अकेडमी के सौजन्य से छपने वाली किताब के लिये , इसको जरुर भेजे । स्वास्थ्य लाभ तभी होगा ना जब पोस्ट छपने की बात पुष्ट हो जायेगी ।

अविनाश वाचस्पति said...

सब शिवजी की कृपा है
होइहै वहि जो शिव रचि राखा।


अब वो पोस्‍ट जो लगानी थी आपने
मेरे पास भेज दें तो मैं अपने नाम से लगा दूंगा
बाद में आप घोषित कर देना कि
यह तो मैंने तैयार की थी
चोरी हो गई
और चोरी पर ब्‍लॉगर तुरंत संज्ञान लेते हैं
क्‍यों ज्ञान देने वाले पांडेय जी
मैं सच कह रहा हूं हां।

रंजन said...

sahi he... jnahda uncha rahe hamaaraa..

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

इलाहबाद में ब्लॉगर संगोष्ठी आह ! वाह !

शेष शुभ .

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey said...

जल्दी से ठीक हो जाओ! ऐसी पोस्टें लिखने के अनेक मौके पांव चूमते रहेंगे।

दिगम्बर नासवा said...

बहुत अच्छा लिखा है ......... इलाहाबाद मशहूर हो रहा है ब्लोगेर्स के बीच .......... कुछ ही दिनों में ब्लोगेर्स की श्रधा-स्थली बन जायेगी ये नगरी ..........

काजल कुमार Kajal Kumar said...

आप पोस्ट सॉलिड पोस्ट लिखने से चूक गए तो क्या...मैं हूँ न (मुझे निमंतर्ण नहीं मिला)

ताऊ रामपुरिया said...

आप तो स्वास्थ्य का ख्याल रखिये, ये दुनियादारी और पोस्ट लिखने के बहाने तो रोज ही मौजूद रहेंगे.

रामराम.

कुश said...

जेलिसी तो ब्लोगर होने का मूल गुण है.. इसके बिना आप ब्लोगर नहीं बन सकते.. कुछ लोग तो खुले आम अपने इस गुण का प्रदर्शन कर रहे है.. वईसे उन्होंने मुझे न्योता भेज दिया था.. तो अपने भी अरमान खिसक लिए साईड में.. आप तो बस अपनी कमर का ख्याल रखिये.. दस क्या बीस एक्स्ट्रा टिपण्णी कर डालेंगे...

अभिषेक ओझा said...

'ब्लागर्स' जीलसी पेन' पेन के साथ 'पेन' (कलम) का भी काम करता है... देखिये एक पोस्ट निकल गयी इस पेन से. आप ठीक हो जाइए फिर झंडे तो गाड़ते ही रहेंगे उसे कौन उखाडेगा, उखाड़ दिया तो बगल में एक और गाड़ देंगे :)

नीरज गोस्वामी said...

आप सोच रहे होंगे की हम बीजी थे इसलिए टिपियाने नहीं आये...गलत सोचे...हम जेलेसी पेन से तड़प रहे थे...इलाहाबाद वालों ने हमें ब्लोगर समझा ही नहीं...बुलाना तो दूर की बात है...क्या शायरी और कविता लिखने वाले ब्लोगर की श्रेणी में नहीं आते ??? ब्लोगर की परिभाषा क्या है ये पूछना चाहते हैं हम इलाहबाद वालों से...आपको वहां कलकत्ते बैठे बुला लिया कुश को जयपुर बुलावा भेज दिया हमें मुंबई से बुलाने में लजा गए...धिक्कार है...चर्चा तो हम भी सुमे हैं उस ब्लोगर सम्मलेन की लेकिन वहां हुआ क्या ये जानकारी ठीक से नहीं है...सच तो ये है की हम जानकारी लेने के मूड में भी नहीं हैं...(इसे कहते हैं खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे)
आप जल्दी से ठीक हो जाईये फिर एक ईस्ट वेस्ट ब्लोगर मीट करेंगे और जिसे चाहेंगे उसे बुलाएँगे...ईंट का जवाब पत्थर टाईप अप्रोच है हमारी...
नीरज

विवेक सिंह said...

पानीपत में एक 1 नवम्बर, 2009 को ब्लॉगर-महासम्मेलन का आयोजन है । आप सादर आमन्त्रित हैं ।
एक मैं, दूसरे आप, और तीसरे यहीं से योगेन्द्र मौद्गिल जी को पकड़ लेंगे । बस हो गया ब्लॉगर-महासम्मेलन का कोरम पूरा । और स्पॉण्डलाइटिस भी ठीक हो जाएगा । तो आना न भूलियेगा ।

- विवेक सिंह

Udan Tashtari said...

ब्लागर्स' जीलसी पेन- ये बोनस बिमारी न पालो भाई..पहले ऊ जौन है उसी पर कनसेन्ट्रेट करो...जरा बाबा रामदेव के यहाँ पता करना..किसी को एकदम दुरुस्त होते सुना है इससे.

Mired Mirage said...

आपकी तो हर पोस्ट ही सॉलिड होती है। यह भी है। जल्द ठीक हो जाइए। हम यहाँ सम्मेलन करेंगे और आपको कतई नहीं बुलाएँगे। उस पोस्ट को अभी से लिखना शुरू कर दें।
घुघूती बासूती

रंजना said...

चिंतन तो तुम्हारा सटीक है,पर चिंता निर्मूल है....चाहे कितने भी दर्द में रहो,तुम्हे सम्मलेन में उपस्थिति का न्योता मिलेगा ही......तुम वरिष्ठ ब्लागर श्रेणी में आ चुके हो.....चूके नहीं हो...

सोचना तो हमें हैं......काश !! हम भी लघु वरिष्ठ ही होते......

वैसे सी डी मिला जाए तो मुझे भी भेजना...झलकियाँ देख जरा कृतार्थ तो हो लें..

संजय बेंगाणी said...

जीलसी पेन हो रहा है. हमें बुलाया गया था, मगर भाव खा गए. कहा समय नहीं है. अब लगता है.... :) हम तो पेन कम करने को कुछ लिख भी नहीं सकते. :(

MANOJ KUMAR said...

कोई हद ही नहीं शायद इलाहाबाद के फसाने की
सुनाता जा रहा है जिसको जितना याद आता है।

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

जीलसी पेन ..... waah waah . hamne to tippni se bora bhr liya

डॉ .अनुराग said...

कल ही हड्डी वालो को बुलाता हूँ के बेटे नया रोग आ गया है बाज़ार में ...जरा रिसर्च कर लो .कलकत्ता वाले आगे निकल गए है

cmpershad said...

"बीमारी के बारे में बता 'चूका' था"- आखिर चूक हो ही गई तो खामियाज़ा भी भुगतना पडेगा। रिपोर्टों में संगोष्टी की खींचातानी से जेलेसी पेन मे रिडक्शन तो आ ही गया हो- संगोष्टी क्या थी गोया शादी थी- जिसने किया बो भी परेशान और जिसने नहीं किया वो भी:)

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

ब्लॉगर हैं तो हर स्थिति में अपना झंडा गडेगा ही.
भले झण्डा "वर्चुअल" ही क्यों न ..?
खैर अब तबीयत कैसी है गुरु

अजय कुमार झा said...

ओह तो जौन जौन लोग नहीं पहुंचे उ सब ब्लोगिंट्टाईटिस से ग्रस्त थे ..ऊपर से जेलसी का संक्रमण भी ...बताईये हम तो ओईसे ही हलकान हुए जा रहे थे ..चलिये अगिला बार के लिये ..वार्म अप टाईप हो गया है..दर्दवा ठीक हो तो कहियेगा..नयका आईडिया है एक ठो..

eSwami said...

च्च्‍ च्... मौका खोने का बुरा मत मानो .. ये तो शुरुआत है - आपका भी जुगाड सेट हो लेगा. बस सेटिंग-मेटिंग टाईप लोगों को प्रेमपूर्ण टिप्पणियां करते रहें!

सतीश पंचम said...

अब जब ब्लॉगिंग नई विधा है तो बीमारीया भी नये नाम लेकर आएंगी ही :)

बढिया लिखा ।

Vivek Rastogi said...

एक एक्स्ट्रा टिप्पणी मेरी भी।

Shiv Kumar Mishra said...

सभी ब्लॉगर साथियों को टिप्पणी के लिए धन्यवाद. हमें टिप्पणियां कम मिल रही थीं इसलिए इलाहबाद ब्लॉगर संगोष्ठी पर एक पोस्ट लिख डाली. आजकल ये विषय फैशन में है सो लिख डाला.

@ ई-स्वामी जी,

सर, सेटिंग-मेटिंग लोगों को आज से ही प्रेम-पूर्वक टिप्पणियां देने का काम शुरू करता हूँ. वैसे भी प्रेम-पूर्वक टिप्पणियां न देने के लिए पहले भी लोग लताड़ चुके हैं....:-)

@ अजय कुमार झा

झा जी, बस आईडिया देते रहिये. मुझे विश्वास है कि आप आईडिया देंगे तो मैं टिका रहूँगा. मेरी ब्लागिंग अब आपके आईडिया से ही चलेगी. अभी तक आपके पास जो भी आईडिया है उसे अगर मेल कर दें तो अच्छा रहेगा. मेरा मेल पता है;

shiv2601@gmail.com

Mrs. Asha Joglekar said...

अजी जब झंडा गडना ही है तो काहे की जेलसी, खुश रहिये और इस जेलसी पेन से निजात पाले के लिये दस जगह और टिपियाइये ।

शरद कोकास said...

ऊपर ही ऊपर देखिये इससे पीठ का दर्द ठीक होता है ।

kmmishra said...

"एक हिंदी ब्लॉगर को और क्या चाहिए? दस एक्स्ट्रा टिपण्णी और क्या. वो चाहे किसी भी वजह से मिलें."

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10 टिपण्णी de di. Aur mangi ho ti to aur de data.

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

कहीं ऐसा तो नहीं कि बीमारी आपकी पुलिस के छापे की तरह पूर्वनियोजित थी?

Rakesh said...

Heh! Lagta hain ki Jhanda jhaadne ke liye aap kyoN naa Reddy BHAIYON PAR JHAADE?

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