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Tuesday, February 21, 2012

दिल्ली काण्ड...


@mishrashiv I'm reading: दिल्ली काण्ड...Tweet this (ट्वीट करें)!

यह केवल एक पैरोडियात्मक और जुगाडू पोस्ट है. इसे किसी भी तरह से गोस्वामी तुलसीदास का अपमान न समझा जाय. इसलिए लिख रहा हूँ कि प्रशंसक कई बार नाराज़ हो जाते हैं.

यह दिल्ली-कांड का प्रथम भाग है. अगर पाठकों को अच्छा लगा तो फिर आगे का वर्णन दिया जाएगा.फिलहाल इसे बांचिये...

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एक भोर सब सहित समाजा, दस जनपथ परधान बिराजा.

सकल कुटिल मंत्री, नरनाहू, राहुल जसि सुनु अतिहि उछाहू.

राहुल रहहि कृपा अभिलाषे, चमचे करहिं प्रीति रुख लाखे.

एहि जुबराज बने अब राजा, दस जनपथ पे बाजहि बाजा.

पणियप्पन के वचन सुहाए, सुनि के सिबल हृदय अति भाये.

अब अभिलाषु एक मन मोरे, राहुल पूजि अनुग्रह तोरे.

कहइ प्रधान सुनिअ जननायक, राहुल हैं सब बिधि सब लायक.

दिग्गी सह परिवार ओ माई, करहिं छोह सब रौरिहि नाई.

सुनि परधानाहि बचन सुहाए, दंगल दोदि मूल मन भाये

जौं चमचौ मत लागहि नीका, करहु हरिष हिय राहुल-टीका.

हरषि जमाइ कहेउ मृदु बानी, नापेहु कूपहि केतना पानी.

सब पूजहि स्कैमहि देवा, बिनु पूजा न करहि कलेवा.

जेह बिधि होइ कुटुंब कल्याना, तंत्र, मन्त्र सब बिधि कर नाना.

बाजा बाजेहि बिबिधि बिधाना, सुनि सब चमचे गावहि गाना.

हरषित हृदय लिए महतारी, बिटिया संग जमाइ पुकारी.

सब बिधि होइ प्रसन्न सब नेता, देखि सबइ जुबराज प्रणेता.

रहि रहि होइ प्रसन्न सब भांती, सेवक मिलिहि बनावहिं पांती.

चमचे सब पूजत जुबराजा, उनको कहाँ अउर कछु काजा.

दरस लिए बेनी सलमाना, श्रीप्रकाश दिग्गी सह नाना.

हाथ जोडि दिग्गी तब बोले, मुख पे शबद शबद सब तोले.

कोहु नृप होहि हमहि का हानी, सूखा पड़इ कि बरसइ पानी.

जानत सभै सुभाऊ हमारा, राहुल ही हैं मोर करतारा.

वे प्रसन्न जबतक हे माई, जीयत करबि ताहि सेवकाई.

आग्रह मोर बस एक बिशेषा, यूपी ठहरौ कुटुंब प्रदेशा.

बाईस बरस भये करतारा, यूपी में नहिं राज हमारा.

उधर मुलायम माया नाचे, पुनि पुनि आपन नीयम बांचे.

मातु दीन्हि जदि मोहि अधिकारा, जाऊं यूपी लइ लस्कारा.

हायर करेहु साथ 'लिंटासा', जौ से बढौ विजय को आशा.

राजपाट यूपी में लाऊँ, राहुल जस जिनगी भरि गाऊं.

मोर मने उपजहु एहि चित्रा, मैं कलियुग को विश्वामित्रा.

दिग्गी बचन हृदय अति तारी, मगन हुई सुनि के महतारी.

हामी भरेहु साथ परधाना, ताहि संग चमचे सब नाना.

आज्ञा आज तोहि मैं दीन्हा, सकल उपाय विजय को कीन्हा.


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15 comments:

  1. बढिया राहुलायन, जारी रखें :)

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  2. Ati sundar, Misirji. Aage ka bhi likha jawe.

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  3. आपका टिकट तो पक्का, लेकिन अगर आपने इसे मंच पर पढ़ा होता तो. इस पुस्तक के कापीराईट मुझे दे दीजियेगा. सभी युकों के लिये अनिवार्य होने जा रही है ये किताब. और हां अपनी आत्मकथा भी लिख लीजिये, कोर्स में आ जायेगी।

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  4. जुबराज होने में एक ही घाटा है, जुबराज चार्ल्स का उदाहरण बताता है कि जुबराज बने बने जिन्दगी गुजर सकती है! :(

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  5. जय हो.. जय हो... जय हो...

    जय हो.. जय हो... जय हो...

    जुबराज की नहीं भय्या , आपके लेखनी की जय हो...

    आगे कौन सा शब्द बोलूं जो ह्रदय के उदगार प्रतिबिंबित कर सकें, एकदम्मे नहीं बुझा रहा...

    जियो...

    यह क्रम जारी रहे, यही अनुरोध है...

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  6. अनुपम काव्य प्रतिभा और उसकी अभिव्यक्ति..

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  7. सुपरहिट शिव भैया, सत्चित आनंद:)

    जारी न रखेंगे तो प्रशंसक नाराज हो जायेंगे।

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  8. अत्युत्तम...!!
    चुनाव जीतने के गुर....
    धन, बल, भाग्य अरू बहु चमचे
    आगु चुनाव परखिये चारि समझे

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  9. हा हा हा| दिल्ली का सम्पूर्ण वर्णन कर दिया आपने तो, सर|

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  10. एहि जुबराज बने अब राजा, दस जनपथ पे बाजहि बाजा.
    जौं चमचौ मत लागहि नीका, करहु हरिष हिय राहुल-टीका
    हरषि जमाइ कहेउ मृदु बानी, नापेहु कूपहि केतना पानी.
    चमचे सब पूजत जुबराजा, उनको कहाँ अउर कछु काजा.

    हा हा हा हा हा हा हा हा हा ...कमाल कमाल कमाल...आप नहीं न जानते आप क्या लिख दिए हैं...माने हद कर डाली है आपने...धन्य हैं आप...सच में...देख रहा हूँ गोस्वामी जी स्वर्ग से पुष्प वर्षा कर रहे हैं आप पर...(जिन्हें तुलसीदास जी के नाम से क्रोध आये वो गोस्वामी के आगे नीरज पढ़ें और स्वर्ग के स्थान पर खोपोली)

    नीरज

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    1. हद है, हद है! गोस्वामी नीरज आपकी बेहद हद है!
      ऐसी हदतम टिप्पणी के लिये अतिशय धन्यवाद!

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  11. Best Lines: " हायर करेहु साथ 'लिंटासा', जौ से बढौ विजय को आशा. "

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  12. टिप्पणी का खांचा एम्बेडेड कर दिया है - कभी शिवकुमार मिश्र का मन टिप्पणी का Reply देने का हो जाये तो आलस्य न लगे! :-)

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  13. सुबेरे सुबेरे पूरी भक्तिभाव से गाएं है. पूण्य कमा लिये हैं हम भी.

    बहुत सुन्दर रचना है जी.

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  14. बहुत सही. बाबा तुलसी भी कहीं मुस्कुरा रहे होंगे.. :)

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टिप्पणी के लिये अग्रिम धन्यवाद। --- शिवकुमार मिश्र-ज्ञानदत्त पाण्डेय