tag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post9150446745648240511..comments2008-03-31T20:01:56.140+05:30Comments on शिवकुमार मिश्र और ज्ञानदत्त पाण्डेय का ब्लॉग: नाराज हैं राखी सावंतShiv Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/16210136982521324733noreply@blogger.comBlogger21125tag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-88072055020999118952008-03-31T20:01:00.000+05:302008-03-31T20:01:00.000+05:30आइडिया कमाल का है साहब.आप को तो चैनल वालों का फ़्री...आइडिया कमाल का है साहब.आप को तो चैनल वालों का फ़्रीलांसिन्ग सलाहकार बन ही जाना चाहिये.Ila's world, in and outhttp://www.blogger.com/profile/13648932193142137941noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-46738788514250627652008-03-22T14:24:00.000+05:302008-03-22T14:24:00.000+05:30मान गए डॉक्टर साहब...कमेंट लिखने के बाद आप ये भी द...मान गए डॉक्टर साहब...कमेंट लिखने के बाद आप ये भी देखते हैं कि बन्दा आगे क्या लिखता है...<BR/>ये 'फंडित' वाला संबोधन बहुत खूब लगा...बरसाने की होली नहीं खेल सकते, सो हम दोनों ने मिलकर 'हड़काने' की होली खेल ली...और फिर दोस्ती तो है ही.Shiv Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/16210136982521324733noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-6536285342647672542008-03-21T23:36:00.000+05:302008-03-21T23:36:00.000+05:30अमें फंडितजी,छोड़ो यार, कुछ ज़्यादा ही सीरियस किसिम ...<B>अमें फंडितजी,</B><BR/>छोड़ो यार, कुछ ज़्यादा ही सीरियस किसिम के मानुष लगते हो तुम ? <BR/><I>यह तू तड़ाक प्यार की तू तड़ाक है, उखड़ न जाना!</I><BR/>जिस मूड से तूने पोस्ट लिखी है,<BR/>मैंने भी तो उसी मूड से टिप्पीयाया है,<BR/>और तुम पसीने पसीने हो गया, वा भई !<BR/>वक्रोति तो समझा कर,<I><B> और यहाँ मैं सर नहीं,</B></I><BR/><I>केवल एक ब्लागर हूँ,</I> <BR/>पद या नाम पर मत जा <BR/>तू तो घुटे हुए ब्लागर का चेला और मेरा गुरुभाई है<BR/><BR/>अब तेरे को क्या बताना, क्योंकि तू तो वह सब भी जानता है, जो मैंने कभी सोचा ही नहीं !<BR/><BR/><A><I><B>इस होली की शाम में आ दोस्ती कर ले, <BR/>कुट्टी मिल्ली करने को बहुत टाइम बाकी है </B></I></A><BR/><B>ज़िंन्दे रह !</B>डा० अमर कुमारhttp://www.blogger.com/profile/12658655094359638147noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-65871582058317442922008-03-21T22:43:00.000+05:302008-03-21T22:43:00.000+05:30बड़ा अजीब लग रहा है डॉक्टर साहब. आपकी बात कि 'मैं ...बड़ा अजीब लग रहा है डॉक्टर साहब. आपकी बात कि 'मैं राखी के साथ बना रहूँ, समझ में नहीं आई'. <BR/><BR/>पता नहीं आपको मेरी किस लाइन से लगा कि मैंने अपनी पोस्ट में राखी सावंत की तरफदारी की है. खली का विरोध किया है, या फिर टीवी न्यूज़ चैनल की तरफदारी की है....बड़ी दुविधा में डाल दिया आपने. सोच रहा हूँ अपना 'दस पैसा' का सवाल या फिर दस पैसा का लेखन जारी रखूँ, या फिर बंद कर दूँ.<BR/><BR/>लेकिन आप कह रहे हैं तो कुछ तो बात होगी जरूर. आख़िर आप राम चरितमानस के ज्ञानी हैं और मैं नहीं.Shiv Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/16210136982521324733noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-40718963441585003462008-03-21T21:37:00.000+05:302008-03-21T21:37:00.000+05:30चुराता न्याय जो रण को बुलाता भी वही हैयुधिष्ठिर स्...<A><B>चुराता न्याय जो रण को बुलाता भी वही है<BR/>युधिष्ठिर स्वत्व की अन्वेशणा पातक नहीं है<BR/>नरक उनके लिए जो पाप को स्वीकारते हैं<BR/>न उनके हेतु जो रण में उसे ललकारते हैं</B></A><BR/><BR/>इस कविता की ये लाइनें तो, मैं भी गुनगुनाया करता था ! धन्यवाद मित्र, स्मरण दिलाने के <BR/>लिये ! गोचर में <I>ललकार आपकी !,</I>इस कविता से भी अधिक खूबसूरत है ! <I><B>बधाई हो,</B></I><BR/><B>चलो , आप राखी के साथ ही बने रहो ,<BR/>हमको तो यह खली भी यहाँ पर खल रहा है !</B><BR/><BR/>नमस्कार !डा० अमर कुमारhttp://www.blogger.com/profile/12658655094359638147noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-5961052578399242562008-03-21T09:40:00.000+05:302008-03-21T09:40:00.000+05:30@ डा अमर कुमारसर, आपकी गंभीर टिपण्णी के लिए धन्यवा...@ डा अमर कुमार<BR/><BR/>सर, आपकी गंभीर टिपण्णी के लिए धन्यवाद. आपका सवाल है; "कांट वी इग्नोर सच इस्यूज?" <BR/><BR/>हम क्यों इग्नोर करें? आपको नहीं लगता कि ऐसी बातों को इग्नोर करने से ऐसे लोगों का हौसला बढ़ता है. दूसरी बात है राखी सावंत जैसे लोगों की टू रीमेन इन न्यूज वाली सोच को बढावा देने में हमारा भी हाथ है. <BR/><BR/>आपको लगता है कि ऐसा है? हम तो शिष्टाचार के नाते ऐसी बातों को इग्नोर कर देते हैं. लेकिन ऐसे लोगों को शिष्टाचार की बातें समझ में आती हैं? दिनकर जी ने लिखा है;<BR/><BR/>चुराता न्याय जो रण को बुलाता भी वही है<BR/>युधिष्ठिर स्वत्व की अन्वेशणा पातक नहीं है<BR/>नरक उनके लिए जो पाप को स्वीकारते हैं<BR/>न उनके हेतु जो रण में उसे ललकारते हैं<BR/><BR/>सहज ही चाहता कोई नहीं लड़ना किसी से<BR/>किसी को मारना अथवा स्वयं मरना किसी से<BR/>नहीं दु:शांति को भी तोड़ना नर चाहता है<BR/>जहाँ तक हो सके निज शांति प्रेम निबाहता है<BR/><BR/>मगर यह शांतिप्रियता रोकती केवल मनुज को<BR/>नहीं यह रोक पाती है, दुराचारी दनुज को<BR/>दनुज क्या शिष्ट मानव को कभी पहचानता है?<BR/>विनय को नीति कायर की सदा वह मानता है<BR/><BR/>समय ज्यों बीतता त्यों-त्यों अवस्था घोर होती<BR/>अनय की श्रृंखला बढाकर कराल-कठोर होती<BR/>किसी दिन तब महाविस्फोट कोई फूटता है<BR/>मनुज ले जान हाथों में दनुज पर टूटता है<BR/><BR/>मेरी इस टिपण्णी का ध्येय केवल आपको मेरे विचार से आगाह करना है. बात इतनी सी है कि मैं ऐसे मसले पर क्या सोचता हूँ और क्यों मैंने ऐसी पोस्ट लिखी.Shiv Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/16210136982521324733noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-53454851292326303202008-03-21T00:12:00.000+05:302008-03-21T00:12:00.000+05:30राखी मय होने की बधाई......राखी मय होने की बधाई......बोधिसत्वhttp://www.blogger.com/profile/09557000418276190534noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-10823960945508454352008-03-21T00:07:00.000+05:302008-03-21T00:07:00.000+05:30भैये ये तेहरवीं टिप्पणी का अंक अशुभ लग रहा था इस ल...भैये ये तेहरवीं टिप्पणी का अंक अशुभ लग रहा था इस लिये चौहदवें नंबर से टिपिया रहे हैं!<BR/><BR/>राखी -खली और शिव कुमार मिश्र कुछ दाल में काला जरूर है,आप टी.वी पर राखी रिंग में और खली ब्लॉगजगत में क्या अंडरस्टैंडिंग है भायाकमलेश मदानhttp://www.blogger.com/profile/14947827548102778374noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-75947490076581252342008-03-20T23:49:00.000+05:302008-03-20T23:49:00.000+05:30भाई जी,क्या मेरी राय भी यहाँ कुछ महत्व रखती है ?मु...भाई जी,<BR/>क्या मेरी राय भी यहाँ कुछ महत्व रखती है ?<B>मुझे तो खली से ज़्यादा राखीं ही खली हैं, और उसके </B><I>रिमेन इन न्यूज़</I><B> के सूत्र को जिलाये रखने में सफलता दिलाने में हमारा सहयोग भी </B><I>एक खली है</I>व्हाई कांट वी इग्नोर सच ईश्यूज़ ? इट हैज़ बिकम ए टेन पैसा क्वेश्चन ! और दस पैसे की किल्लत हमेशा की तरह बरकरार है क्योंकि हम बदले में टाफ़ी पाकर संतुष्ट हो लेते हैं !डा० अमर कुमारhttp://www.blogger.com/profile/12658655094359638147noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-40538648187167513932008-03-20T23:37:00.000+05:302008-03-20T23:37:00.000+05:30क्या बात है, एक ही तीर से तीन शिकार मार डाले - राख...क्या बात है, एक ही तीर से तीन शिकार मार डाले - राखी, खली और चैनल। सबको लपेटे में ले लिया। मजेदारTarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-59943223106590600612008-03-20T19:52:00.000+05:302008-03-20T19:52:00.000+05:30भाई राखी और खली से भाग कर तो इधर ब्लॉग पढ़ने को आए...भाई राखी और खली से भाग कर तो इधर ब्लॉग पढ़ने को आए थे। यहाँ भी वही। लगता है दोनों सर्वव्यापी हैं।दिनेशराय द्विवेदीhttp://www.blogger.com/profile/00350808140545937113noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-73024313703517306072008-03-20T19:12:00.000+05:302008-03-20T19:12:00.000+05:30क्या आईडिया है महाराज..कोई चैनल क्यूँ नहीं ज्वाईन ...क्या आईडिया है महाराज..कोई चैनल क्यूँ नहीं ज्वाईन कर लेते. :) चल निकलेगी...आपकी भी, चैनल की भी... :)Udan Tashtarihttp://www.blogger.com/profile/06057252073193171933noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-6559073190284388472008-03-20T17:12:00.000+05:302008-03-20T17:12:00.000+05:30वाह! राखी सावंत न हुयी कैसियस क्ले की बेटी लैला अल...वाह! राखी सावंत न हुयी कैसियस क्ले की बेटी लैला अली हो गयी! उनका एक बॉक्सिंग/कुश्ती मैच खली से करा दिया जाये! पुराणिक जी की भाषा में कहें तो घणे पइसे मिलेंगे! :DGyandutt Pandeyhttp://www.blogger.com/profile/05293412290435900116noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-64201213972575234022008-03-20T17:05:00.000+05:302008-03-20T17:05:00.000+05:30वाकई साल खली खली का राग अलापते रहते हैं ये चैनल वा...वाकई साल खली खली का राग अलापते रहते हैं ये चैनल वाले!!<BR/>एक बात मिल बस जाए इनको कोई नई, फ़िर तो ऐसा घिस देते हैं उसे कि दर्शक उकता जाए!Sanjeet Tripathihttp://www.blogger.com/profile/18362995980060168287noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-52270505376645922952008-03-20T16:34:00.000+05:302008-03-20T16:34:00.000+05:30काकेश जी की सलाह ही हमारी सलाह है,काकेश जी की सलाह ही हमारी सलाह है,दिलकार नेगीhttp://www.blogger.com/profile/16234593517987771094noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-32731654821487525542008-03-20T16:18:00.000+05:302008-03-20T16:18:00.000+05:30अरे आपने आलोक पुराणिक से कहा होता. वे आपको होली के...अरे आपने आलोक पुराणिक से कहा होता. वे आपको होली के मौके पर राखी से मिलवा देते और उन्हें मनाने के दो-चार फंडे भी बता देते. ऐसे कि घर में किसी को कुछ पता भी न चलता. ये फालतू में चैनल, रिपोर्टर और एडिटर के झमेले में क्यों पड़ते हैं जी!इष्ट देव सांकृत्यायनhttp://www.blogger.com/profile/06412773574863134437noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-30591695498083332832008-03-20T15:45:00.000+05:302008-03-20T15:45:00.000+05:30ये आईडियावान एडिटर सही कहता है. वैसे खली तो कभी-कभ...ये आईडियावान एडिटर सही कहता है. <BR/>वैसे खली तो कभी-कभी कुश्ती लड़ता है. लेकिन राखी जी हमेशा जुबान से लड़ती रहती हैं.<BR/>कहीं खली हार न जाए.बाल किशनhttp://www.blogger.com/profile/18245891263227015744noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-27125428750111983272008-03-20T15:34:00.000+05:302008-03-20T15:34:00.000+05:30बंधूखली अपने शरीर से बलि है और आप अपनी बुद्धि से ख...बंधू<BR/>खली अपने शरीर से बलि है और आप अपनी बुद्धि से खली हैं...क्या दिमाग पाया है आपने...एक से बढ़ कर एक धांसू अईडियास आपके खोपडी में आते हैं की देख कर दांतों तले ऊँगली दबानी पड़ती है...और अब तो इतनी बार ऊँगली दबा चुके हैं की की दब दब के तिनके सी पतली हो गयी हैं. ऐसा क्यों न करें की खली के साथ उसका जो पिद्दी मरियल सा चमचा रहता है अरे भाई उसका P.R.O., उसकी जगह राखी को लेलें, बोलने का काम राखी करे और लड़ने पिटने का खली...याने एक पंथ दो काज...खली भी खुश राखी भी खुश और चॅनल वालों की तो बांछे ..वो कहाँ होती हैं पता नहीं, हमेशा खिली रहेंगी.<BR/>नीरजनीरज गोस्वामीhttp://www.blogger.com/profile/07783169049273015154noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-91515500802493618342008-03-20T15:14:00.000+05:302008-03-20T15:14:00.000+05:30लगता है आपसे कोई चैनल वाला पटा नही..:)लगता है आपसे कोई चैनल वाला पटा नही..:)अरुणhttp://www.blogger.com/profile/14008981410776905608noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-54242040011126363252008-03-20T15:02:00.000+05:302008-03-20T15:02:00.000+05:30आपने हम चैनल वालों की बुरी तरह भद्र पिट दी है। खैर...आपने हम चैनल वालों की बुरी तरह भद्र पिट दी है। खैर सही भी हैआशीषhttp://www.blogger.com/profile/04428886830356538829noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-2230265261477575582008-03-20T14:44:00.000+05:302008-03-20T14:44:00.000+05:30आपको बेहतरीना आइडियाज के लिये सबसे तेज चैनल के मार...आपको बेहतरीना आइडियाज के लिये सबसे तेज चैनल के मार्केटिंग हैड के लिये नामांकित किया जा रहा है.<BR/><BR/>एक धांसू गाना ..अमिताभ जी का गाया हुआ...<BR/><BR/>खली खली खली खली ...<BR/>राखी से आगे निकला खली..<BR/>ओ हो ..या...ओ...या ...<BR/><BR/>आपसे अपने ब्लॉग में कुछ डिमांड रखी है कृपया उसे पूरा करने की कोशिश करें.काकेशhttp://www.blogger.com/profile/12211852020131151179noreply@blogger.com