इस्लामाबाद १९ जुलाई
इस्लामाबाद से कासिफ अब्बासी
आज अंडरअचीवर वार ने एक नया मोड़ ले लिया. सूत्रों के मुताबिक़ पाकिस्तान के सदर जनाब आसिफ अली ज़रदारी इस बात से नाराज़ हो गए हैं कि दुनियाँ की किसी मैगेजीन ने उन्हें अंडरअचीवर नहीं कहा. आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि पहले अमेरिकी मैगेजीन टाइम ने इंडिया के वजीर-ए-आज़म जनाब मनमोहन सिंह को अंडरअचीवर करार दिया था जिसका जवाब एक इंडियन मैगेजीन आऊटलुक ने अमेरिकी सदर बराक ओबामा को अंडरअचीवर कहकर दिया. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द ही दुनियाँ के तमाम मुल्क की मैगजीन एक-दूसरे के सदर और वजीर-ए-आज़म को अंडरअचीवर कहकर पूरी दुनियाँ के लीडरान को अंडरअचीवर करार दे देंगी.
दुनियाँ भर के दानिशमंद और तर्जियानिगार ऐसा मानते हैं कि एक बार ऐसा हो जाने से पूरी दुनियाँ एक नई शुरुआत कर सकेगी.
उधर कुछ पाकिस्तानी इदारों और हलकों में यह बात भी की जा रही है कि जब अमेरिका ने नाटो सप्लाई को बहाल करने के लिए पाकिस्तान से कहा तब सदर जरदारी ने अमेरिका के समाने रखी तमाम शर्तों में एक शर्त यह भी रखी थी कि नाटो सप्लाई के एवज में अमेरिका पाकिस्तान को रुपया-पैसा वगैरह देगा ही, साथ ही अमेरिकी मैगेजीन टाइम सदर जरदारी को अपने फ्रंट-कवर पर रखेगी. जब टाइम ने इस बात के लिए यह कहते हुए मना कर दिया कि सदर ज़रदारी को वह फ्रंट-पेज पर नहीं रख सकती क्योंकि वे तमाम मुद्दों पर फेल रहे हैं तब प्रेसिडेंट ओबामा ने टाइम मैगेजीन को यह कहते राजी कर लिया था कि मैगेजीन चाहे तो उन्हें फ्रंट-कवर पर रखने के लिए अंडरअचीवर करार दे सकती है.
दोनों मुल्कों के सदर और मैगेजीन के बीच यह फैसला यह हुआ था कि जुलाई महीने के एक एडिशन में सदर जरदारी को फीचर किया जाएगा लेकिन नाटो सप्लाई खुलने के बाद अमेरिकी मैगेजीन अपने वादे से मुकर गई और इंडिया के वजीर-ए-आजम जनाब मनमोहन सिंह को अंडरअचीवर बताते हुए उन्हें अपने फ्रंट-कवर पर रख दिया. टाइम मैगेजीन के एक तर्जियानिगार ने अपना नाम न लिए जाने की शर्त पर यह खुलासा किया है कि मैगेजीन को हमेशा से यह लगता था कि इंडिया के वजीर-ए-आजम जनाब मनमोहन सिंह का अंडर-अचीवमेंट पाकिस्तानी सदर ज़रदारी से बड़ा है लिहाजा मैगेजीन ने अपने फ्रंट-कवर पर उन्हें मौका दिया.
इधर इस्लामाबाद में ऐसी बातें भी की जा रही हैं कि अब अंडरअचीवर टैग पाने के लिए अब सदर जरदारी ने अफगानिस्तानी सदर जनाब हामिद करजई से अपील की है. सदर ज़रदारी चाहते हैं कि अफगानी सदर जनाब हामिद करजई काबुल से निकलेवाले न्यूजपेपर अनीस डेली से कहकर उन्हें अंडरअचीवर का टैग दिला दें. कुछ दिफाई तर्जियानिगारों का यह भी मानना है कि पाकिस्तानी सदर ने आई एस आई को हिदायत दी है कि वह तालिबानी लीडरान से डायरेक्ट बात करके यह काम करवा दे. पाकिस्तानी सदर यह भी चाहते थे कि अमेरिकी वजीर मोहतरमा हिलेरी क्लिंटन भी इस काम में अपनी टांग अड़ा दें तो काम जल्दी हो जाने की उम्मीद रहेगी. अमेरिका की तरफ से फिलहाल यह आईडिया ड्रॉप कर दिया गया है क्योंकि मोहतरमा हिलेरी क्लिंटन को यह समझ नहीं आ रहा था कि अनीस डेली पर सदर ज़रदारी को फीचर करने के लिए उन्हें गुड तालिबान से बात करने की ज़रुरत है या बैड तालिबान से.
उधर दुनियाँ भर में आइडेंटिटी क्राइसिस के मारे तमाम लीडरान चाहते हैं कि उन्हें किसी न किसी मैगेजीन के कवर-पेज पर अंडरअचीवर करार देते हुए रखा जाय ताकि उन्हें आइडेंटीटी क्राइसिस के इस रोग से निजात मिले. हाल यह है कि चीन में आई हल्की सी इकॉनोमिक क्राइसिस के चलते वहाँ के प्रेसिडेंट हू जिंताओ तक यह चाहते हैं कि मेड इन चायना वाली टाइम पत्रिका अपने एक एडिशन में उन्हें अंडरअचीवर करार दे ताकि चीन की सरकार इकॉनोमी की फील्ड में अपने अचीवमेंट के नए-नए आंकड़ों में हेर-फेर करके पूरी दुनियाँ के सामने रखें और चाइनीज गवर्नमेंट खुद को ग्रेट बता सके. सरकार का ऐसा मानना है कि ऐसा करने से चायना की जनता में एक नया जोश आएगा, वह दिन में बाईस घंटे काम करेगी और और इकॉनोमिक क्राइसिस खत्म हो जायेगी.
आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि टाइम पत्रिका की एक डुप्लीकेट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चीन की एक कंपनी ने शंघाई में खोल रखी है.
उधर ब्रिटेन में रह रहे साबिर पाकिस्तानी सदर और जनरल जनाब परवेज़ मुशर्रफ ने भी अंडरअचीवर बनने की कवायद शुरू कर दी है. पिछले कई सालों से पाकिस्तानी मीडिया में उनको लेकर कोई बात नहीं होती लिहाज़ा मुशर्रफ चाहते हैं कि उनका नाम भी न लेनेवाले अगर उन्हें अंडरअचीवर कह के भी याद कर लें गे तो आनेवाले इलेक्शंस में कुछ लोगों को उनके बारे में पता चल जाएगा और उनकी पार्टी को कुछ वोट मिल जायेंगे.
हमारे इंडियन व्यूरो से यह खबर भी मिली है कि इंडिया के पेज-थ्री इंडसट्रीएलिस्ट और आईपीएल टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के मालिक जनाब विजय माल्या भी चाहते हैं कि उन्हें अंडरअचीवर करार दे दिया जाय ताकि उन्हें इंडिया की गवर्नमेंट से कुछ स्पेशल पॅकेज मिल जाए. वहीँ दूसरी तरफ एक्सपर्ट्स और तर्जियानिगारों का मानना है कि इंडिया की सिविल एवियेशन मिनिस्ट्री के डायरेक्टर जनरल सिविल एवियेशन जनाब भारत भूषण को हटाने में विजय माल्या का हाथ है लिहाजा उन्हें अंडरअचीवर बताना नामुमकिन होगा.
दूसरी तरफ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडिया और अमेरिका के बीच पोलिटिक्स में शुरू हुई यह अंडरअचीवर जंग को आनेवाले समय में एक नया मोड़ मिल सकता है. ऐसे एक्सपर्ट्स यह मानते हैं कि लन्दन ओलिम्पिक्स में अगर अमेरिका को एथेलेटिक्स इवेंट्स में पचास से कम गोल्ड मेडल्स मिले तो इंडिया की कई मैगेजिंस अमेरिकी एथलीटों को अंडरअचीवर बतायेंगी. दूसरी तरफ अमेरिकी मैगेजिंस और न्यूजपेपर्स की निगाह श्रीलंका में इंडिया की क्रिकेट टीम के ऊपर भी रहेंगी ताकि आनेवाली श्रीलंकाई सीरीज और टी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप में अगर इंडिया की टीम अच्छा न कर पाए तो टीम और उसके तमाम खिलाड़ियों को अंडरअचीवर बताया जा सके. पकिस्तान के साबिर कप्तान जनाब आसिफ इकबाल का मानना है कि अमेरिकी मैगेजिंस की निगाहें इंडिया के आलराऊंडर रवींद्र जडेजा और उनके मेंटोर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर होंगी.
आनेवाले समय में हमारी निगाह इस अंडर अचीवर जंग पर रहेगी. जल्द ही इसपर एक और कॉलम लेकर हाज़िर होऊंगा.
नोट: कल रात को उड़ती खबर सुनाई दी है कि फेमस हॉलीवुड डायरेक्टर जनाब जेम्स कैमरोन ने अपनी नई मूवी पर काम शुरू कर दिया है. मूवी का नाम है लीग ऑफ एक्स्ट्राऑर्डिनरी अंडरअचीवर्स.
Friday, July 20, 2012
अंडरअचीवर बनने की जंग
Monday, March 28, 2011
साल २०१५ के भारत संबंधी विकिलीक्स
जब से विकिलीक्स द्वारा खुलासे करने का श्रीगणेश हुआ है तब से बाकी मीडिया ने खुलासे से अपना पल्ला झाड़ लिया है. विकिलीक्स के पास भी इतना केबिल्स है जिसे पढ़ कर लगता है जैसे पूरी दुनियाँ में फैले अमेरिकी डिप्लोमैट केबिल लिखने के अलावा और कुछ करते ही नहीं. शाम को किसी नेता, ब्यूरोक्रेट, मंत्री, संत्री, पत्रकार, कलाकार, लोबीयिस्ट वगैरह से बात की और दूसरे दिन ही अमेरिका में बैठे अपने लोगों को केबिल ठेल दिया. एक बात और समझ में आती है कि पूरी अमरीकी विदेश-नीति केबिलों पर चल रही है. ठीक वैसे ही जैसे करेंट केबिलों पर चलता है. जैसे-जैसे ये केबिल अखबारों में छाप रहे हैं वैसे-वैसे न जाने कितनों को करेंट लग रहा है.
मैं मार्च नहीं मना रहा हूँ. अब मार्च में जब भारतीय मार्च नहीं मनायेगा तो वह कुछ न कुछ सोचेगा. आज सोच रहा था कि अगर ऐसे ही विकिलीक्स केबल्स पब्लिश करता रहा तो क्या होगा? देखेंगे कि साल २०१५ में तमाम केबिल्स छापे जायेंगे तो साल २०१० या साल २०११ की घटनाओं से सम्बंधित होंगे. क्या नज़ारा हो सकता है?
अब जैसे साल २०११ में जो खुलासे हो रहे हैं वे राजनीति से जुड़ी हुई बातें, पॉलिसी, बातचीत वगैरह-वगैरह सम्बंधित हैं. ऐसे में साल २०१० और २०११ में जो भी भारतीय नेता, ब्यूरोक्रेट, सेक्रेटरी, लेखक, पत्रकार वगैरह अमेरिकी डिप्लोमैट्स से बात करेंगे वे राजनीतिक कम और बाकी मुद्दों पर ज्यादा होंगी. क्या-क्या बातें हो सकती हैं? एक नज़र मारिये. अरे, मेरा मतलब इधर नीचे नज़र मारिये; (अब मैं हिंदी में लिखता हूँ इसलिए उस समय पब्लिश होने वाले केबल्स के हिंदी अनुवाद छाप रहा हूँ....)
केबिल संख्या २५७७१३ तारीख १३.०२.२०११
"भारतीय सरकार पर भारतीय सुप्रीम कोर्ट और जनता का बहुत दबाव पड़ रहा है. सरकार, उसके मंत्री और मुखिया की सुप्रीम कोर्ट में, ब्लाग्स और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर रोज ऐसी-तैसी हो रही है. वैसे कल अमेरिकी राजनयिक ने बातचीत में राहुल गांधी ने बताया कि बस पाँच दिन की बात है. उन्नीस फरवरी से क्रिकेट वर्ल्ड कप शुरू हो रहा है तो चीजें कुछ हद तक कंट्रोल में आ जायेंगी. जैसे ही पूरा देश करप्शन एक्सपर्ट से क्रिकेट एक्सपर्ट बना नहीं कि मामला हमारे लिए ईजी हो जाएगा. वर्ल्ड कप के बाद आई पी एल भी है. साल २००९ में तो चुनावों के बहाने हमने आई पी एल को सुरक्षा की गारंटी न देते हुए दक्षिण अफ्रीका पहुँचा दिया था लेकिन इस बार तो डबल सुरक्षा देंगे जिससे आई पी एल भारत में रहे. वैसे इस बार भी पाँच राज्यों में चुनाव रहे हैं लेकिन हम इस बार आई पी एल को जेड कैटगरी की सुरक्षा देंगे. यह हमारी सरकार के लिए ज़रूरी है. इधर एक महीना से ज्यादा वर्ल्ड कप राहत दे देगा उसके बाद एक महीना आई पी एल. सुना है उसके बाद वेस्टइंडीज का दौरा है. ऐसे में....."
केबिल संख्या २५७८०९ तारीख २५.०२.२०११
"अमेरिकी दूतावास में कार्यरत अधिकारी, पीटर स्कॉट के साथ शाम को व्हिस्की की चुस्कियां लेते हुए एक प्रसिद्द पत्रकार वहीद लखवी ने बताया था कि राहुल गाँधी को मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिए गाना बहुत पसंद है. कांग्रेस की एक इनर सर्किल जो राहुल के बहुत करीब है, ने खुद बताया कि राहुल ने फिल्म दबंग छत्तीस बार और यह गाना चौरासी बार......"
केबिल संख्या २५७९१६ तारीख २५.०३.२०११
"भारतीय मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के पॉलिट-ब्यूरो के कई सदस्यों का मानना है कि अमेरिका ने भारतीय क्रिकेट टीम के ऊपर दबाव डाला कि वो अच्छा खेलकर सेमीफाइनल में पहुंचे ताकि पाकिस्तान और भारत के प्रधानमंत्री मैच देखने के बहाने मुलाकात कर सकें. मार्क्सवादियों को इस बात से गुरेज नहीं था कि दोनों देशों के प्रधानमंत्री मिलें बल्कि वे इस बात से नाराज़ थे कि अमेरिका अब भारतीय क्रिकेट में भी दखलंदाजी करने लगा है..."
केबिल संख्या २५७७६९ तारीख १८.०२.२०११
"दूतावास में काम करने वाले एक भारतीय कर्मचारी को कांग्रेसी नेता जनार्दन द्विवेदी ने बताया कि राहुल गाँधी अपने पिता के कदमों पर चलकर अपनी ईमानदारी को अमर करना चाहते थे. जैसे उनके पिता ने पच्चीस साल पहले यह कहकर अपनी ईमनदारी को अमर कर लिया था कि आम आदमी के लिए सरकार से चलने वाला एक रुपया आम आदमी तक पहुँचते-पहुँचते पंद्रह पैसा रह जाता है उसी प्रकार राहुल ज़ी भी कुछ करना चाहते थे. राहुल का मानना था कि पच्चीस साल पहले कही गई बात को अब रिवाइज करके एक बार फिर से प्रेस और जनता से अपनी ईमानदारी पर मुहर लगवा लिया जाय लेकिन आम आदमी तक पहुचने वाले पैसे पर कांग्रेस वर्किंग कमिटी में सहमति नहीं हो सकी.
राहुल ज़ी चाहते थे कि अपने पिता द्वारा दिए गए फिगर यानि पंद्रह पैसे को रिवाइज करके अब पाँच पैसा कर दिया जाय लेकिन वित्तमंत्री मुखर्जी और गृहमंत्री सात पैसे से नीचे आने पर सहमत नहीं हुए. बाद में मामला यह कहकर टाल दिया गया कि प्रधानमंत्री एक ज़ीओएम बनायेंगे जो एक सहमति बनाने की कोशिश करेगा.."
केबिल संख्या २५७९६१ तारीख ०२.०४.२०११
"विदेश मंत्रालय के एक सचिव ने पीटर स्कॉट को बताया कि चंडीगढ़ में सेमी फाइनल देखने आये पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के खाने के मेन्यू को लेकर मंत्रिमंडल में अंतिम समय तक असहमति बनी रही. जहाँ गृहमंत्री चाहते थे कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को पंजाबी खाना खिलाया जाय वहीँ विदेशमंत्री कृष्णा चाहते थे कि उन्हें पुर्तगाली खाना परोसा जाय. बाद में विदेश सचिव अनुपमा राव ने सुझाव दिया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के लिए अफगानी और बलोची खाना परोसना ठीक रहेगा. वैसे जब प्रधनमंत्री श्री मनमोहन सिंह से इस बाबत सवाल पूछा गया तो उन्होंने गब्बर सिंह 'इश्टाइल' में कहा - हमको नहीं पता. हमको कुछ नहीं पता.."
केबिल संख्या २५७९८७ तारीख ०५.०४.२०११
"कांग्रेसी नेता जयन्ती नटराजन ने अमेरिकी दूतावास के एक सेक्रेटरी के साथ अपनी बातचीत में बताया कि तमिलनाडु विधानसभा के चुनावों में चुनाव प्रचार को एक नया मोड़ देने के लिए कांग्रेस ने करीब साठ हज़ार कार्यकर्ताओं का एक समूह तैयार किया है जो डी एम के और ए आई डी एम के की रैलियों में घुसकर इन पार्टियों द्वारा प्रदेश के पुरुष वोटरों को भाव न दिए जाने पर नारा लगाएगा. यह समूह अपनी मांग में यह कहेगा कि राजनैतिक पार्टियाँ राज्य के पुरुष वोटरों के लिए फ्री शेविंग क्रीम और रेजर का वादा करें. साथ ही पुरुष मतदाताओं के लिए लुंगी और चन्दन की डिबिया की भी डिमांड रखेगा..."
केबिल संख्या २५७९२७ तारीख २८.०३.२०११
"साल २०११ के वर्ल्ड कप सेमी फाइनल में भारत के पहुँचने के क्रेडिट के लिए तू-तू मैं-मैं शुरू हो गई है. जहाँ मार्क्सवादी सेमी फाइनल में भारत के पहुँचने के लिए अमेरिकी दबाव को जिम्मेदार मानते हैं वहीँ भारतीय जनता पार्टी इसके लिए नरेन्द्र मोदी को क्रेडिट दे रही है. बी जे पी का मानना है कि क्वार्टर फाइनल में गुजरात क्रिकेट एशोसियेशन के अध्यक्ष्य के रूप में मोदी ने ऐसी पिच बनवाई जिससे ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग धरासायी हो जाए. वहीँ कांग्रेस का मानना है कि क्वार्टर फाइनल से पहले राहुल गाँधी ने भारतीय क्रिकेट टीम को शुभकामना संदेश भेजा था जिससे टीम जीत गई. चेयरमैन ऑफ सेलेक्टर्स इसके लिए मुनफ पटेल द्वारा अपने पूरे ओवर्स नहीं करने को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. वहीँ भारतीय क्रिकेट प्रेमी क्वाटर्स फाइनल में नेहरा के नहीं खिलाये जाने को टीम की जीत के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. बड़ी बमचक मची हुई है. पता नहीं चल रहा कि क्रेडिट कहाँ जाएगा और कैश कहाँ..."
केबिल संख्या २५७७०६ तारीख २४.०३.२०११
"संसद में बहस के दौरान विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री से एक-दूसरे पर शेरों से हमला किया. जहाँ विपक्ष के नेता ने हमले के लिए इकबाल के शेर का इस्तेमाल किया वहीँ प्रधानमंत्री श्री सिंह ने ग़ालिब के शेर का इस्तेमाल किया. खबर यह भी है कि संसद में शेर कहने के तीन घंटे बाद प्रधानमंत्री श्री सिंह को कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद ग़ालिब के उस शेर का मतलब समझाते हुए देखे गए. अन्दर की खबर यह है कि बाद में प्रधानमंत्री ने माना कि उनके द्वारा कहा गया शेर उस मौके पर मैच नहीं कर रहा था. लेकिन फिर वही बात है कि - कमान से निकला हुआ तीर और मुँह से निकला हुआ शेर कभी वापस नहीं आते.."
केबिल संख्या २५८१०३ तारीख ०७.०४.२०११
"पश्चिम बंगाल में भी चुनाव हो रहे हैं लेकिन वहाँ पर तमिलनाडु की तरह वोटरों को मिक्सर, टीवी, मंगलसूत्र, मिनरल वाटर, फ्रिज, लैपटॉप, चावल, गेंहू ऑफर नहीं किया जा सका है. बाकी देश के लोग़ यह अनुमान लगा रहे हैं कि तमिलनाडु की पार्टियों द्वारा ऑफर किये गए सामानों की तरह पश्चिम बंगाल की पार्टियों ने क्या ऑफर किया?
कोलकाता स्थित डिप्टी हाई-कमीशन के एक स्टाफ से बात करते हुए एक वरिष्ट बांग्ला पत्रकार ने बताया कि पश्चिम बंगाल में पार्टियाँ वोटरों को ऐसे स्कूल ऑफर कर रही हैं जिनमें नारे लिखने, हड़ताल करने और राज्य को बंद करने की शिक्षा दी जायेगी.."
केबिल संख्या २५७९२८ तारीख २८.०३.२०११
"आज एक भारतीय चैनल ने हिंदी फिल्म तीस मार खान एक ही दिन में दो बार दिखाई. सोशल नेटवर्किंग साईट ट्विटर पर कुछ ट्वीटबाजों का मानना है कि यह २६/११ के बाद भारत पर हुआ सबसे बड़ा असॉल्ट है. भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों का मानना है कि ट्वीटबाजों द्वारा किये गए इस खुलासे को पाकिस्तान के मंत्री रहमान मलिक ने बहुत सीरियसली लिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री श्री गिलानी को सुझाव दिया है कि वे चंडीगढ़ में मैच देखने के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री श्री सिंह से सवाल करें कि वे इस असॉल्ट के ऊपर भी कार्यवाई कर रहे हैं या नहीं?"
Friday, March 18, 2011
अमर सिंह का इंटरव्यू - न्यूक्लीयर डील री-विजिटेड
नोट: मैंने यह पोस्ट संसद में न्यूक्लीयर डील पर होने वाले (अ)विश्वास प्रस्ताव पर जुलाई २००८ में लिखा था. चूंकि न्यूक्लीयर डील पर एक बार फिर से बात हो रही है इसलिए सोचा कि इस पोस्ट की रि-ठेल कर दूँ. जिन्होंने नहीं पढ़ा होगा वे पढ़ लेंगे.
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अपने देश में दो तरह के नेता होते हैं. एक वे जो डिमांड में रहते हैं और दूसरे वे जो रिमांड में रहते हैं. जैसे अमर सिंह जी आजकल डिमांड में हैं. 'न्यू-क्लीयर डील' को पास कराने का बीड़ा उठाकर राष्ट्रहित में काम करने का जो साहस उन्होंने किया है वैसा बिरले ही कर पायेंगे. पिछले पन्द्रह दिनों से हर टीवी चैनल पर वही दिखाई दे रहे हैं. एक पत्रकार ने उनक इंटरव्यू लिया था लेकिन वो इंटरव्यू प्रसारित नहीं हो सका. प्रस्तुत है वही इंटरव्यू. टीवी पर नहीं प्रसारित हो सका तो क्या हुआ, ब्लॉग पर ही सही.
पत्रकार: "स्वागत है आपका अमर सिंह जी. हमारे कार्यक्रम में आपका बहुत-बहुत स्वागत है."
अमर सिंह: "देखिये, फालतू की बातों के लिए समय नहीं है हमारे पास. आप जल्दी से अपने सवाल पूछिए. हमें आधे घंटे बाद बीबीसी पर इंटरव्यू देना है. उसके बाद सीएनएन पर जाना है. उसके बाद हमें रेडियो अफ्रीका के लिए..."
पत्रकार: " नहीं-नहीं, ऐसा मत कहिये. ये तो हम तो औपचारिकता निभा रहे थे."
अमर सिंह: "आप पत्रकार भी क्या-क्या निभा जाते हैं. नेताओं से दोस्ती निभाने के लिए कहते हैं और ख़ुद केवल औपचारिकता निभाते हैं. खैर, कोई बात नहीं. आप सवाल दागिए."
पत्रकार: "सवाल दागना नहीं है. मैं तो सवाल पूछूंगा."
अमर सिंह: "वो तो देखिये ऐसे ही मुंह से निकल आया. जब से 'न्यू-क्लीयर' डील में उलझा हूँ, दागना, फोड़ना जैसे शब्द जबान पर आ ही जाते हैं. वैसे, आप सवाल पूछिए."
पत्रकार: "मेरा सवाल आपसे यह है कि आपने कैसे फ़ैसला किया कि न्यूक्लीयर डील राष्ट्रहित में है?"
अमर सिंह: "आप किस तरह के पत्रकार हैं? आपको पता नहीं है कि हमने सबसे पहले न्यूक्लीयर डील को लेकर डाऊट किया, तब जाकर जान पाये कि ये डील राष्ट्रहित में है."
पत्रकार: "अच्छा, अच्छा. हाँ, वो मैंने पढ़ा था. आपके डाऊट के बारे में. वैसे एक बात ये बताईये, आपके वामपंथी साथियों ने न्यूक्लीयर डील को राष्ट्रहित में क्यों नहीं माना?"
अमर सिंह: "डाऊट नहीं किया न. डाऊट किया होता तो उन्हें भी पता चलता कि ये डील राष्ट्रहित में है."
पत्रकार: "लेकिन उनके डाऊट नहीं करने के पीछे क्या कारण हो सकता है? मतलब, आपको क्या लगता है?"
अमर सिंह: "मैंने पूछा था. मैंने कामरेड करात से पूछा था. मैंने पूछा कि 'आपने डाऊट क्यों नहीं किया?' वे बोले 'हम तो साढ़े चार साल से डाऊट कर के राष्ट्रहित में काफी कुछ कर चुके हैं. अब आपको मौका देते हैं कि न्यूक्लीयर डील पर डाऊट करके आप भी राष्ट्रहित में कुछ कीजिये."
पत्रकार: "ओह, तो ये बात है. लेकिन आपने समझाया नहीं कि आपदोनों मिलकर भी तो राष्ट्रहित में कुछ कर सकते हैं?"
अमर सिंह: "हमने तो कहा था. हमने कहा कि आधा डाऊट हम कर लेते हैं, आधा आपलोग कर लीजिये. हम अपने डाऊट का समाधान डॉक्टर कलाम से करवा लेंगे. आपलोगों को डॉक्टर कलाम पसंद नहीं हैं तो आप ऐसा कीजिये कि अपने डाऊट का समाधान किसी चीन के वैज्ञानिक से करवा लीजियेगा."
पत्रकार: "क्या जवाब था उनका?"
अमर सिंह: "कुछ साफ़ नहीं पता चला. वे कुछ बुदबुदा रहे थे. मुझे लगा जैसे कह रहे थे 'चीन के कारण ही तो सारा झमेला है.'"
पत्रकार: "वैसे आप ये बताईये कि डॉक्टर कलाम से मिलने के बाद आपके सारे डाऊट क्लीयर हो गए?"
अमर सिंह: "बहुत अच्छी तरह से. उनसे मैंने और राम गोपाल यादव जी ने इतनी शिक्षा ले ली है कि हम दोनों न्यू-क्लीयरोलोजी में मास्टर बन गए हैं. अब तो हम भारत ही नहीं बल्कि ईरान, पाकिस्तान, उत्तरी कोरिया जैसे देशों का न्यूक्लीयर डील पास करवा सकते हैं."
पत्रकार: "माफ़ कीजियेगा, लेकिन न्यू-क्लीयरोलोजी नहीं बल्कि उस विषय को न्यूक्लीयर फिजिक्स कहते हैं."
अमर सिंह: "हा हा हा हा. वैसे आपकी गलती नहीं है. मैं साइंस की नहीं बल्कि आर्ट की बात कर रहा था. न्यू-क्लीयरोलोजी का मतलब वो कला जिसमें न्यू-क्लीयर डील पास कराने की पढाई होती है."
पत्रकार: "अच्छा, अब जरा इस डील से उपजी राजनैतिक परिस्थितियों पर बात हो जाए. अफवाह है कि आपने केन्द्र सरकार को इस मुद्दे पर समर्थन इस शर्त के साथ दिया है कि वो मायावती जी के ख़िलाफ़ सीबीआई से कार्यवाई करने को कहे. क्या यह सच है?"
अमर सिंह: "यह बात बिल्कुल ग़लत है. देखिये सुश्री मायावती के ख़िलाफ़ सीबीआई के पास सुबूत तो पिछले तीन सालों से थे. लेकिन सीबीआई के लिए काम करने वाले पंडितों और ज्योतिषियों ने सीबीआई को सुबूत अदालत में दाखिल करने से रोक रखा था. पंडितों ने कहा था कि अगर ये सुबूत साल २००८ के जुलाई महीने में अदालत को दिए जाय, तो ये सीबीआई के लिए शुभ होगा. पंडित लोग तो मनुवादी हैं न. वे तो शुरू से मायावती जी के पीछे पड़े हैं."
पत्रकार: "अच्छा, अच्छा. तो ये बात है. लेकिन अमर सिंह जी, आपको नहीं लगता कि अब आप उसी सरकार को समर्थन दे रहे हैं, जिस सरकार से आप लड़े."
अमर सिंह: "देखिये, हमारा ऐसा मानना है कि राजनीति में लड़ाई नहीं होती है. विरोध करना एक बात है और फिर उन्ही विरोधियों के साथ मिल जाना सर्वथा दूसरी. हम पहले विरोध करते हैं. जब देखते हैं कि विरोध से कुछ नहीं होनेवाला तो हम मिल जाते हैं. अभी हम और कांग्रेस मायावती जी के विरोध में हैं. लेकिन कल को मायावती जी केन्द्र में आ जायेंगी तो हम साथ भी हो सकते हैं."
पत्रकार: "लेकिन आप उनलोगों के साथ कैसे रह सकते हैं जिनसे आप झगड़ चुके हैं? आपने ख़ुद एक बार लालू जी को भांड कह दिया था."
अमर सिंह: "देखिये इस मामले में मुझे यही कहना है कि आई हैव बीन मिसकोटेड. भांड शब्द का मतलब यहाँ कुछ और ही था. देखिये मैं कलकत्ते में पला बढ़ा हूँ. और कलकत्ते में कुल्हड़ को भांड कहा जाता है. मैंने तो केवल ये कहा था कि लालू जी कितने प्यारे हैं. बिल्कुल कुल्हड़ की तरह. और दूसरी बात ये कि कुल्हड़ मिटटी से बनता है और लालू जी मिट्टी से जुड़े नेता हैं. मैंने तो उनकी तारीफ़ की थी."
पत्रकार: "तो आपको क्या लगता है, आप संसद में सरकार का बहुमत साबित कर पायेंगे?"
अमर सिंह: "बिल्कुल, पूरी तरह से. हमारे साथ ३०० सांसद हैं."
पत्रकार: "लेकिन अफवाह है कि सांसद खरीदे जा रहे हैं. कल बर्धन साहब ने कहा कि पच्चीस करोड़ में एक बिक रहा है."
अमर सिंह: "मैं इस पर कुछ कमेन्ट नहीं करना चाहता. बर्धन साहब का तो कोई सांसद बिका नहीं है. उन्हें कैसे पता क्या रेट चल रहा है."
पत्रकार: "अच्छा ये बताईये कि ये बात कहाँ तक जायज है कि आप अपने उद्योगपति मित्रों का एजेंडा राजनीति में ले आयें?"
अमर सिंह: "देखिये मैंने माननीय प्रधानमंत्री के सामने कुछ मांगे रखी हैं. लेकिन ये सभी मांगे राष्ट्रहित में हैं. हाँ, अब इन मांगों से अगर हमारे मित्रों का भला हो जाए, तो वो तो संयोग की बात है. हमारे मित्रो के लिए इस तरह का फायदा केवल एक बायप्रोडक्ट है. ठीक वैसे ही जैसे हम साम्प्रदायिकता की समस्या को दूर करने के लिए कांग्रेस के साथ आए हैं. अब ऐसे में अगर न्यूक्लीयर डील पास हो जाए, तो वो महज एक संयोग समझा जाय."
पत्रकार: "वैसे आपने प्रधानमंत्री से अम्बानी भाईयों के झगडे को सुलझाने की बात कही. क्या यह सच है?"
अमर सिंह: "हाँ. यह बात सच है. मैंने प्रधानमंत्री से कहा है कि दोनों भाईयों का झगडा अगर सुलझ जाता है तो वो राष्ट्रहित में होगा."
पत्रकार: "मतलब ये कि दोनों भाईयों का हित ही असली राष्ट्रहित है."
ये सवाल सुनकर अमर सिंह जी कुछ बुदबुदाए. लगा जैसे कह रहे थे, ' दोनों का झगडा सुलझ जाए तो मैं दोनों के नज़दीक रहूँगा. असल में तो मेरा हित होगा. मेरा हित मतलब राष्ट्रहित है.'
उनकी बुदबुदाहट बंद होने के बाद पत्रकार भी कुछ बुदबुदाया. मानो कहा रहा हो; 'हम बेशर्मी के स्वर्णकाल में जी रहे हैं.'
Monday, November 8, 2010
बराक ओबामा इन एक्सक्लूसिव चैट विद चंदू चौरसिया
पत्रकारिता मेहनत का काम है. ईमानदारी का काम है. अब देखिये न, बड़े-बड़े पत्रकार अपने टीवी स्टूडियो में बैठे-बैठे ही एनालिसिस करते रह गए लेकिन असली पत्रकार राष्ट्रपति ओबामा से मिलकर उनका इंटरव्यू निकाल लाया. ज़ी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ हमारे ब्लॉग पत्रकार चंदू चौरसिया की.
चंदू ने मुझे एक महीना पहले ही भरोसा दिलाया था कि चाहे जो हो जाए, वह बराक ओबामा ज़ी का इंटरव्यू लेकर रहेगा. मेहनती इतना कि पाँच तारीख से ही आगरा में डेरा जमाये था. सुबह से ही ताजमहल के सामने वाले दरवाजे पर पेन और पेपर लेकर बैठ गया. जब शाम तक ओबामा ज़ी नहीं निकले तो उसने सोचा कि कोई न कोई लफड़ा है. पूछताछ करने पर पता चला कि ओबामा ज़ी छ तारीख को आयेंगे और आगरा वाले ताजमहल में नहीं बल्कि मुंबई वाले ताजमहल में रहेंगे.
यह भी पता चला कि वे मुंबई से सीधा दिल्ली आयेंगे तो चंदू ने निश्चय किया कि वह अब दिल्ली में ही इंटरव्यू लेगा. मुंबई नहीं गया. नहीं जाने का एक कारण और भी था, उसे डर था कि मुंबई जाने के बाद उसके मन में कहीं हीरो बनने का लालच न आ जाए. उसने अपना जीवन पत्रकारिता को समर्पित कर दिया है इसलिए अब हीरो बनने में उसे शर्म आती है.
आज सुबह ही दिल्ली से कोलकाता पहुँचा. मैं इंटरव्यू टाइप कर दे रहा हूँ. आप बांचिये.
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चंदू: गुड ईविनिंग सर. वेलकम तो आवर इंटरव्यू, सर.
ओबामा: चंदू ज़ी, अंग्रेजी में बात क्यों कर रहे हैं? अरे भाई मुझे हिंदी आती है.
चंदू: सर! ये तो चमत्कार हो गया. आपको हिंदी आती है? कहाँ सीखी, सर?
ओबामा: हाँ भाई, मुझे हिंदी आती है. मैं अमेरिका का प्रेसिडेंट हूँ. और आपको बता दूँ कि अमेरिका का प्रेसिडेंट कुछ भी कर सकता है. यहाँ तक कि हिंदी भी सीख सकता है. भाई व्यापार करने निकला हूँ भाषा का ज्ञान नहीं रहेगा तो व्यापार कैसे होगा? वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैंने हिंदी सीखने के लिए टेली-शॉपिंग का महागुरु हिंदी स्पीकिंग कोर्स खरीदा और हिंदी सीख ली.
चंदू: अरे सर, आपने तो हमारी मुँह की बात छीन ली. बहुत बढ़िया कोर्स है सर.
ओबामा: अच्छा, क्या आपने भी हिंदी वहीँ से सीखी है?
चंदू: नहीं सर. हमने तो महागुरु के कोर्स से अंग्रेजी सीखी है. वैसे सर, यह बताइए कि आपने हिंदी कब और क्यों सीखी?
ओबामा: जब मैं प्रेसिडेंट बना तभी मैंने निश्चय किया कि मुझे हिंदी सीखनी है. साल २००८ में मैंने आपके तत्कालीन विदेशमंत्री द्वारा अंग्रेजी में दिया गया भाषण सुना. भाषण ख़त्म होने के बाद मैंने उसी अंग्रेजी भाषण का अंग्रेजी ट्रांसलेशन माँगा. उसे पढ़ने के बाद मैंने अपने अफसरों के साथ मीटिंग की और यह तय किया हिंदी सीखकर झमेला ख़तम किया जाय और भारतीय नेताओं के साथ हिंदी में ही बात कर ली जाय.
चंदू: सर, यह बताइए कि आप अभी अपने देश का मध्यावधि चुनाव हार गए हैं. क्या आप अपने पद से इस्तीफ़ा देंगे?
ओबामा: पद से इस्तीफ़ा? क्यों? मैं मिड-टर्म इलेक्शन हारा हूँ, उसके लिए इस्तीफ़ा क्यों दूँ?
चंदू: दरअसल सर, आपको इस्तीफ़ा देने की ज़रुरत नहीं है. मैंने यह सवाल तो पत्रकार धर्म का पालन करने के लिए पूछा है. हमारे देश में जब कोई सरकार मिड-टर्म इलेक्शन हारती है तो विपक्ष और पत्रकार दोनों उसके इस्तीफे की बात करते हैं. यह अलग बात है कि सरकार इस्तीफ़ा नहीं देती.
ओबामा: अच्छा यह बात है? आपके देश के पत्रकार तो बहुत अच्छे हैं.
चंदू: हाँ सर. एक से बढ़कर एक हैं. वैसे मेरा आपसे अगला सवाल है कि आप भारत क्यों आये? आपके आने का उद्देश्य मेरे लिए जानना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि कुछ लोग़ कह रहे हैं कि इतने सारे लोगों को भारत लेकर आये हैं इतने बड़े-बड़े व्यापार समझौते किये आपने जिसे देखकर लगता है जैसे आप साल २०१२ के लिए अपना चुनाव प्रचार मुंबई से शुरू कर रहे हैं.
ओबामा: नहीं-नहीं यह सच नहीं है. मैं यहाँ चुनाव प्रचार करने नहीं आया हूँ. दरअसल मैं यहाँ कुछ और अजेंडा लेकर आया हूँ.
चंदू: मैं आपकी बात मान गया सर. वैसे भी अगर आप चुनाव प्रचार करते तो आपके साथ हमारी फिल्म इंडस्ट्री का कोई न कोई हीरो अवश्य होता. वैसे आपका अजेंडा क्या है सर?
ओबामा: देखिये ऐसा है कि अमेरिका में तो मैं गाँधी ज़ी को कई बार महान बता चुका हूँ. अपने देश में भाषण देते हुए मैं कई बार भारत को इकॉनोमिक पावरहाउस बता चुका हूँ. कई बार आपके प्रधानमंत्री को मैं महान बता चुका हूँ. मैंने सोचा कि क्यों न यही बातें भारत में की जाएँ. उससे मेरी ईमेज भी बढ़िया होगी और आपके प्रधानमंत्री की ईमेज में भी चार चाँद लग जायेंगे.
चंदू: वैसे सर, मेरा अगला सवाल यह है कि आप पाकिस्तान को मदद पर मदद दिए जा रहे हैं. जिस पाकिस्तान में आपको सैनिक झोंकने चाहिए उसमें आप डालर झोंके जा रहे हैं. ऐसा क्यों?
ओबामा: मुझे पता था कि आप कभी न कभी यह सवाल पूछेंगे. देखिये पाकिस्तान पूरे विश्व के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. अमेरिका भी पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे में एक महत्वपूर्ण देश का धर्म बनता है कि वह दूसरे महत्वपूर्ण देश के लिए कुछ करे...... भारत एक उभरता हुआ इकॉनोमिक पॉवर हाउस है. दक्षिणी पूर्वी एशिया में ही नहीं भारत का विश्व के मंच पर एक अपना रोल है. भारत आनेवाले समय में पूरी दुनियाँ को विकास का रास्ता दिखा सकता है. आज के विश्व में भारत का जो स्थान है वह उसे मिलना चाहिए. मैं जब प्रधानमंत्री श्री सिंह से पहली बार मिला था तभी मैंने उन्हें बताया था कि मैं उनका बहुत बड़ा फैन हूँ. मुंबई में रहकर मैंने जो महसूस किया वह यह है कि आनेवाले समय में भारतीय युवा अपन रोल बखूबी समझता है. देखने वाली बात यह है कि......
चंदू: सर, आप मेरे सवाल का जवाब नहीं दे रहे हैं.
ओबामा: आपके सवाल का उचित जवाब यही है जो मैंने दिया है. अगर आपको कोई और जवाब सुनना है तो फिर मैं सच बता देता हूँ. देखिये हमारे देश में डालर प्रिंट करने वाले प्रेस अभी ओवरटाइम काम कर रहे हैं. जब हम टार्गेट से ज्यादा डालर प्रिंट कर लेते हैं तो उसमें से कुछ पाकिस्तान को दे देते हैं. हमारे यहाँ रखने की भी दिक्कत होती है न.
चंदू: अच्छा सर यह बताइए कि आप इतने बड़े-बड़े सीईओ को लेकर आये हैं. व्यापार समझौते के अलावा और किन मुद्दों पर पर समझौता करना चाहेंगे?
ओबामा: बहुत सारे और क्षेत्र हैं जिनमें भारत और अमेरिका को एक साथ आने की ज़रुरत है. मैं प्रधानमंत्री श्री सिंह से कहूँगा कि व्यापार के अलावा सांस्कृतिक क्षेत्र में भी समझौते हों. जैसे कि ढेर सारे अमेरिकी टीवी प्रोग्राम की नक़ल करके आपके देश में प्रोग्राम चल रहे हैं. मेरा मानना है कि हमारे देश की टीवी इंटरटेनमेंट को और ज्यादा से ज्यादा भारत में दिखाया जा सके तो बढ़िया रहेगा. आपके हिंदी न्यूज चैनल जिस तरह से कानपुर, मेरठ, दिल्ली, सहारनपुर जैसी जगहों के आपराधिक मामले दिखाते हैं वैसे ही अब वे न्यूयार्क, लास वेगास और लास एंजेलिस के आपराधिक मामले दिखा सकते हैं. जैसे वे रामपुर, बदलापुर, नजफगढ़ जैसी जगहों के भूत-प्रेत, चुड़ैल, जिन्न आदि की कहानियां दिखाते हैं वैसे ही वे अमीरीक भूत-प्रेत, चुड़ैल वगैरह........जैसे वे राखी सावंत, सम्भावना सेठ और डाली बिंद्रा के किस्सों वाले प्रोग्राम्स दिखाते हैं वैसे ही वे अब ब्रिटनी स्पीयर, पेरिस हिल्टन वगैरह के प्रोग्राम्स दिखायें.
चंदू: अरे सर, आप राखी सावंत और डाली बिंद्रा को भी जानते हैं?
ओबामा: उन्हें कौन नहीं जानता? ह्वाईट हाउस का मेरा स्टाफ बिग बॉस और राखी का इन्साफ जैसे प्रोग्राम का बहुत बड़ा फैन है.
चंदू: दोनों देशों के बीच और किस तरह के सांस्कृतिक आदान-प्रदान हो सकते हैं सर?
ओबामा: मेरा मानना है कि एक क्षेत्र और है जिसमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अद्भुत सम्भावना है. मुझे लगता है कि अगर भारतीय ज्योतिषाचार्य लोग़ अमेरिका में अपनी सर्विस दें तो यह अमेरिका के लिए बहुत अच्छा रहेगा. मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ कि हमारे देशवासियों का अब हमारे इकॉनोमिस्ट में विश्वास नहीं रहा. ऐसे में हम देश की आर्थिक समस्याओं को सॉल्व करने के लिए ज्योतिष का सहारा ले सकते हैं. दरअसल ऐसा है कि अब हमारे देश के इकॉनोमिस्ट इकॉनोमी के बारे में सही भविष्यवाणी नहीं कर पा रहे हैं. आपके देश के ज्योतिषी लोग़ हमारे बहुत काम आ सकते हैं. मुंबई में ताजमहल होटल में मैंने कुछ न्यूजपेपर देखे जिनमें आपके ज्योतिषी लोगों की भविष्यवाणियाँ पढ़ने को मिलीं जिनमें बताया गया था कि चन्द्र, सूर्य, राहु-केतु वगैरह का देश के शेयर बाज़ार पर क्या असर पड़ता है? खासकर मेटल ट्रेडिंग पर ग्रहों के प्रभाव के बार में जानकार मुझे बहुत अच्छा लगा. मैंने अपने सलाहकारों से बात कर ली है और आशा करता हूँ कि जल्द ही आपके ज्योतिषी हमारे देश के गोल्डमैन सैक्श और मेरिल लिंच को अपनी सर्विस देंगे. वैसे भी हमारे इन्वेस्टमेंट बैंकर आपके ज्योतिषियों के आगे नहीं ठहरते. मेरा....
चंदू: सर, भारतीय पत्रकारिता का आपका अनुभव कैसा रहा?
ओबामा: बहुत बढ़िया रहा. आपके पत्रकारों ने मुझे जो इज्ज़त दी, उतनी तो मैं भी खुद को नहीं देता. मैं सोच रहा था कि आपके देश से कुछ पत्रकारों को मैं अपने साथ अमेरिका ले जाऊं. पिछले कुछ न्यूज प्रोग्राम देखकर मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि अगर आपके अंग्रेजी पत्रकार हमारे देश में होते तो ग्राउंड जीरो पर मस्जिद बनने में मुझे कोई दिक्कत नहीं आती. मैं बरखा दत्त ज़ी से बहुत प्रभावित हूँ. और अरनब....मुझे आपका राष्ट्रीय चैनल इंडिया टीवी देखकर बहुत ख़ुशी हुई.
चंदू: अच्छा सर, यह बताएं कि आपकी अफगानिस्तान नीति अब क्या होगी? खासकर तब जब आप मिड-टर्म इलेक्शन हार गये हैं?
ओबामा: देखिये अफगानिस्तान में हम सफल रहे हैं. दो साल पहले तक जिस देश में गुड तालिबान और बैड तालिबान थे वहाँ अब केवल तालिबान है. ऐसे में कहा जा सकता है हम सफल रहे हैं. हम तालिबान से बात कर रहे हैं. हाँ, अब हमें यह तय करने में दिक्कत आ रही है कि असली तालिबान कौन है? हामिद करजई या हक्कानी? लेकिन सी आई ए ने केस हाथ में ले लिया है. हम जल्द ही पता लगा लेंगे कि....
चंदू: सर, मेरा एक सवाल और है कि...
ओबामा: बस-बस चंदू ज़ी बस. बाहर आपके सरकारी राष्ट्रीय चैनल इंडिया टीवी के पत्रकार भी इंतजार कर रहे हैं. उन्हें भी तो मौका मिलना चाहिए.
चंदू: अरे, सर, आप नाम पर न जाएँ. इंडिया टीवी का मतलब सरकारी टीवी नहीं है....
ओबामा: लेकिन नाम तो...
चंदू: अरे सर, नाम से धोखा हो जाता है. अब देखिये न पकिस्तान के एक नेता हैं नवाज़ शरीफ...शराफत नाम में भी है लेकिन क्या वे...
ओबामा: हा हा हा...
चंदू: अच्छा सर, नमस्कार. आपने इतना समय दिया. उसके लिए आपको धन्यवाद.
ओबामा: धन्यवाद.
Thursday, October 7, 2010
अमेरिका बिग बॉस हाउस को इनवेड करेगा?
कोहराम सा मचा हुआ है. बंटी चोर को बिग बॉस हाउस से निकाल दिया गया. पता चला कि बंटी ज़ी ने बिग बॉस को माँ-बहन की गालियाँ दीं. इतनी मंहगाई के ज़माने में अगर कुछ सस्ता है तो वह है गालियाँ. जब चाहे दे डालो. वैसे बंटी ज़ी के बिग बॉस हाउस से निकाले जाने के मामले ने जल्द ही तूल पकड़ लिया. आजकल मामले जल्द तूल पकड़ते हैं. अब वह ज़माना नहीं रहा जब मामले धीरे-धीरे तूल पकड़ते थे.
आज सुबह ही मॉर्निंग-वाक के दौरान एक जगह बैठकर सुस्ता रहा था. वहीँ कुछ लोगों को इस मामले पर बात करते सुना. आप भी बांचिये कि वे क्या बात कर रहे थे?
- नहीं-नहीं. मैं तुम्हारी बात से सहमत नहीं हूँ. भाई, यह तो हद है. अगर उसे निकलना ही था तो उसे बुलाया क्यों? अपने घर किसी को बुलाते हो और उसका अपमान करते ही?
- लेकिन उसे भी तो सोचना चाहिए. किसी को ऐसे गाली देते हैं क्या? माँ-बहन की गाली?
- अरे गाली दे दी तो कौन सा गुनाह कर दिया? और फिर गाली टीवी पर तो किसी ने सुनी नहीं. आपके पास सुविधा है कि आप गाली को सुनाएं ही नहीं.
- अरे वैसे तो मैंने देखा की गाली देते समय चैनल वालों ने पी की आवाज़ वाला शंख बजा दिया था.
- पी की आवाज़ वाला शंख?
- मेरा मतलब वही आवाज़ जो गाली-फक्कड़ को ढांपने के काम आती है.
- लेकिन इस मुद्दे पर दिग्विजय सिंह ने कुछ नहीं कहा?
- दिग्गी राजा इस मुद्दे पर क्यों बोलें? वो भी तब जब चिदंबरम ज़ी ने अभी तक कुछ भी नहीं कहा है.
- और राहुल गाँधी ज़ी?
- वे बोले हैं. उन्होंने बंटी चोर को बिल क्लिंटन से कम्पेयर करते हुए बताया कि दोनों एक ही हैं.
- क्या बात करते हो? ये कब हुआ?
- अरे ये मत पूछो. जबसे राहुल ज़ी कम्पेयरिंग मोड में आये हैं, तब से गज़ब ढा रहे हैं. कल रात को ही उन्होंने बिल क्लिंटन से बंटी चोर को कम्पेयर कर दिया. वे तो बंटी ज़ी को बराक ओबामा से कम्पेयर करने जा रहे थे. वो तो भला हो सतीश शर्मा का जिन्होंने उन्हें याद दिलाया कि ओबामा अगले महीने ही इंडिया आ रहे हैं.
- वैसे तुम्हें क्या लगता है? बंटी वाले मामले में अमेरिका हस्तक्षेप करेगा? अमेरिका क्या बिगबॉस हाउस को इनवेड करेगा?
- अमेरिका क्यों इनवेड करेगा? वह ऐसी किसी जगह इनवेजन नहीं करता जहाँ किसी का डेमोक्रेटिक राइट्स वायलेट नहीं हो.
- अरे इसीलिए तो मैं कह रहा हूँ. बंटी का डेमोक्रेटिक राइट्स वायलेट तो हुआ ही है. उसे गाली देने से न सिर्फ रोका गया बल्कि हाउस से भी निकाल दिया गया.
- मुझे तो चांस कम ही लगता है.
- क्यों? मैं तो सोचा रहा हूँ कि अमेरिका ने ईराक से भी सेना बुलाना शुरू कर दिया है. ईराक से जो सैनिक निकलेंगे वे खाली बैठेंगे. ऐसे में बिग बॉस हाउस को इनवेड करना बुरा प्रपोजीशन नहीं है.
- नहीं-नहीं. मुझे ऐसा नहीं लगता. मुझे लगता है अमेरिका अपने नेटो अलाईज के साथ बात किये बिना इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा. अभी हाल ही में पकिस्तान सैनिकों पर जो ड्रोन अटैक हुआ उसके बाद जो स्थिति उत्पन्न हुई है, उससे तो मुझे यही लगता है कि उसके नेटो अलाईज बंटी वाले मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहेंगे. वे चाहेंगे कि अभी उनका अटेंशन पूरी तरह से अफगानिस्तान पर ही रहे.
- लेकिन अगर कुछ देशों ने अमेरिका को समर्थन दे दिया तो?
- तब कुछ चांस बनता है. लेकिन अभी ब्रिटेन की इकॉनोमी ठीक नहीं है. और टोनी ब्लेयर के जाने के बाद अमेरिका को समर्थन मिलना उतना ईजी नहीं रहा. हाँ, अगर स्पेन और ऑस्ट्रेलिया अपना समर्थन अमेरिका को दें तो फिर शायद नेटो वाले अपनी सेना भेजकर बिग बॉस हाउस को इनवेड कर सकते हैं.
- लेकिन इकॉनोमी तो स्पेन की भी ठीक नहीं चल रही है. ऐसे में स्पेन समर्थन देगा?
- हा हा हा...मुझे तो लगता है कि इकॉनोमी ठीक नहीं चल रही है ऐसे में समर्थन देना ज़रूरी हो जाएगा. वैसे ऑस्ट्रेलिया समर्थन देगा या नहीं, यह इस बात पर डिपेंड करता है कि ब्रेट ली प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड को क्या सलाह देते हैं? भारतीय सेलेब्रिटी को उनसे बेहतर कोई ऑस्ट्रेलियन नहीं जानता.
- हा हा हा..सही कहा. लेकिन अगर अमेरिका बिग बॉस हाउस को इनवेड करेगा तो पकिस्तान का क्या रोल रहेगा?
- पकिस्तान का क्या रोल रहेगा? पकिस्तान तो केवल अमेरिका से इतना चाहेगा कि इन्वेजन से पहले वह वीना मलिक और नवाजिश बेगम को वहाँ से निकाल ले.
- अमेरिका मान जाएगा यह बात?
- क्यों नहीं मानेगा? भूल गए जब अफगानिस्तान से चार हज़ार पाकिस्तानी लड़ाकों को मुशर्रफ ने अमेरिका से बात करके निकाला था?
- हाँ, सही कह रहे हो. कुछ लोग़ तो यहाँ तक मानते हैं कि उन्ही लड़ाकों के साथ ही ओसामा और मुल्ला ओमर भी अफगानिस्तान से निकल गए थे.
- तब? वैसे तुम्हारा क्या मानना है? बंटी चोर को वापस बिग बॉस हाउस में भेजने के लिए स्वामी अग्निवेश बिग बॉस और बंटी के बीच समझौता करवाएंगे?
- इस मामले में अभी तक तो अग्निवेश ज़ी ने कुछ नहीं कहा है. वैसे वे यह काम करवा सकते हैं. आजकल वही भारत के सबसे बड़े बिचौलिए हैं. ऐसे में इतनी बड़ी समस्या जब उभर कर आई है तो....
- हम तो मना रहे हैं कि स्वामी ज़ी जल्द ही टीवी चैनल पर कुछ बोलें.
- लेकिन इस समस्या को सुलझाने में सरकार को भी कुछ कदम उठाने चाहिए. मैं कहता हूँ अगर अयोध्या मुद्दे पर सरकार बातचीत करवा सकती है तो फिर....
- नहीं-नहीं. इस मुद्दे पर सरकार बातचीत करवाएगी, मुझे तो ऐसा नहीं लगता. हाँ अगर एक ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स बना दे तो शायद कुछ...
- न-न. वो कैसे होगा? प्रणब दा तो अगले दस दिन कलकत्ते और उसके आस-पास दुर्गापूजा में व्यस्त रहेंगे. ऐसे में ज़ी ओ एम की अध्यक्षता कौन करेगा?
- अरे कोई और कर लेगा. मणिशंकर ऐय्यर तो आजकल खाली चल रहे हैं...ओह, लेकिन वे तो मिनिस्टर नहीं हैं...सॉरी सॉरी. लेकिन शरद पवार भी तो कर सकते हैं.
- ना-ना. हाँ, एक आदमी है जो करवा सकता है. जयपाल रेड्डी.
- लेकिन वे तो कामनवेल्थ में बिजी हैं. वैसे जल्द ही सरकार को कुछ करना चाहिए. कहीं ऐसा न हो कि बंटी ज़ी यह मामला अंतर्राष्ट्रीय न्यायलय में लेकर चले जाएँ. भारत की भद्द पिट जायेगी.
- भद्द तो पिटती रहेगी. कामनवेल्थ में नहीं पिटी क्या?
- हाँ, वो तो है. मज़ा तो तब आता अगर कलमाडी ज़ी को वाइल्ड कार्ड इंट्री मिल जाती बिग बॉस में.
- सही कह रहे हो. बहुत मज़ा आता. मुझे तो लगता है कि कलमाडी ज़ी वहीँ पर वकील कर लेते. अगर ख़ुदा न खास्ता आगे भ्रष्टाचार को लेकर कोई लोचा...
- तुम भी न. भ्रष्टाचार को लेकर और लोचा...वो भी भारत में. वैसे कहीं ऐसा न हो कि पकिस्तान बंटी को समर्थन देते हुए कहीं मामला यू एन में ले जाकर भाषणबाजी न शुरू कर दे...
- ठीक कह रहे हो. ये चिंता तो मुझे भी है. पकिस्तान कहीं यह न कहे कि बंटी चोर घर में रहेगा या नहीं उसके लिए एक प्लेबिसाईट करवाना पड़ेगा.
इच्छा तो थी कि कुछ देर और बैठूं और इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनकी बातचीत सुनूँ लेकिन देर हो रही थी. लिहाजा मैं वहाँ से उठकर चल दिया. नहीं चलता तो आफिस आने में बहुत देर होती....
Wednesday, September 22, 2010
"..अमेरिका पकिस्तान को एंटी नो-बॉल मिसाइल दे."
करीब पंद्रह दिन हो गए जब इंग्लैंड के एक बुकी मज़हर मजीद ने एक अखबार के साथ मिलकर पाकिस्तान के तीन निर्दोष खिलाड़ियों को फिक्सिंग में फँसा दिया. ये खिलाड़ी निर्दोष हैं बेचारे. साथ ही टैलेंटेड भी हैं. निर्दोष और टैलेंटता के अद्भुत संगम वाले इन तीन खिलाड़ियों में से दो ने नो-बॉल फेंकी थी और एक ने फिंकवाई.
आप पूछ सकते हैं कि पुरानी घटना पर मैं आज क्यों लिख रहा हूँ? तो मैं आपको बता दूँ कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने इंग्लैंड में नो-बॉल फिक्स किया. जिस अखबार ने बेचारे निर्दोष खिलाड़ियों को फंसाया वह इंग्लैंड का था. ऐसे में यह एक ग्लोबल घटना हुई कि नहीं?
तो ग्लोबेलाइजेशन के इस युग में ग्लोबल घटना पर लोकल बात करना जायज है क्या? नहीं न? इसीलिए मैंने अपने ब्लॉग पत्रकार चंदू चौरसिया को दुनियाँ भर में भेजकर लोगों की प्रतिक्रिया लेनी चाही. आप बांचिये कि लोगों ने क्या कहा?
हिलेरी क्लिंटन, यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट्स : "वी री-टरेट आर पोजीशन दैट इंडिया इज ऐन एमर्जिंग इकॉनोमिक सुपरपॉवर इन साउथ एशिया. वी वुड आल्सो लाइक टू स्टेट दैट पाकिस्तान इज आर नेचुरल-अलाई ह्वेन इट कम्स टू एलिमिनेटिंग दिस मेनेस ऑफ नो-बॉल नॉट ओनली फ्रॉम एशिया बट शुड आई से, फ्रॉम होल वर्ल्ड ...वी विल वर्क क्लोजली विद पकिस्तान टू डिस्मैन्टेल द फोर्सेस बिहाइंड बाउलिंग नो-बॉल. दिस सॉर्ट ऑफ एक्टिविटीज...वी अवेट अ रिपोर्ट फ्रॉम आर नेटो अलाई, यूनाइटेड किंगडम टू लुक इन टू ह्वाट ट्रान्स्पायर्ड फॉर दीज यंग नो-बॉल बॉलर्स..."
आसिफ अली ज़रदारी, टेन परसेंट प्रेसिडेंट, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान: "ओ ज़ी ये कोई बहुत बड़ी बात नहीं है. ये लड़के टैलेंटेड हैं इसलिए नो-बॉल कर दिया. और मैं आपसे पूछता हूँ कि कितनी परसेंट नो-बॉल फेंकी है बच्चे ने? अब छ बॉल का एक ओवर होता है. उसमें से एक नो-बॉल फेंक ही दे तो करीब १६ पारसेंट होती है नो-बॉल....मैं आपकी बात मानता हूँ कि बच्चों को नो-बॉल का पारसेंट कम कर के करीब दस तक लाना चाहिए. मतलब ये कि हर दास बॉल में एक नो-बॉल चलेगा. मैं खुद भी इस बात को मानता हूँ कि कोई भी काम दस पारसेंट तक ठीक है..."
एजाज बट, प्रेसिडेंट, पकिस्तान क्रिकेट बोर्ड एंड चीफ कांस्पीरेसी थेओरिस्ट, एजाज बट स्कूल ऑफ क्रिकेट मैनेजमेंट : "ये ज़ी, हमारे बच्चों को फंसाया गया है. नो-बॉल फिक्सिंग सरासर झूटी बात है. ये पाकिस्तान के खिलाफ साजिश है. कल ही एक बुकी ने मुझे बताया कि दारसल अम्पायर ने क्रीज की सामने वाली लाइन को पीछे खिसका दिया था इसलिए नो-बॉल हो गया. क्रीज की सामने वाली लाइन को पीछे खिसकाने में अम्पायर के साथ इंग्लैंड के खिलाड़ी भी इन्वोल्व हैं. इस काम के लिए अम्पायर को डेढ़ लाख पाउंड पेमेंट किया गया है. आई सी सी के पास कोई सुबूत नहीं है कि हमारे बच्चे फिक्सिंग में इन्वोल्व हैं. वहीँ मेरे बुकी के पास सुबूत है कि अम्पायर ने क्रीज -लाइन को पीछे खिसका दिया था...."
रहमान मलिक, इन्टेरियर मिनिस्टर एंड चीफ एविडेंस सीकर, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पकिस्तान: "हामने जांच की है और मैं आपको गारंटी से बता सकता हूँ कि न्यूज़ ऑफ ड वर्ल्ड के एविडेंस काफी नहीं हैं. हामने पता लगाया है कि ये पाकिस्तान टीम के खिलाफ साजिश है और इसमें हिन्दस्तान का रा ही सही लेकिन हाथ ज़रूर है. हिन्दस्तान जब पकिस्तान को बॉल में नहीं फँसा ससका तो फिर साजिश करके नो-बॉल में फंसाने की कोशिश कर रहा है. हामने चार और डोस्सियर मांगे हैं इंग्लैंड से....."
मुल्लाह ओमर, स्पिरिचुअल लीडर, तालिबान स्कूल ऑफ स्पिरिचुअलिटी: "आल्लाह ने हमें एक और तरीका दे दिया दिया है अमेरिकियों से लड़ने का. पहले जब हम ख़ुदा के सिपाही कहीं बॉल-बम रखने जाते थे तो 'स्क्यूरिटी' की वजह से पकड़ लिए जाते थे. अब पाकिस्तानी साइंस-दानों की मदद से हम नो-बॉल बम बनायेंगे. हमारे साइंस-दान और पाकिस्तानी साइंस-दान मिलकर काम कर रहे हैं और ख़ुदा के करम से हम जल्द ही नो-बॉल बम बना लेंगे. नो-बॉल बम का फायदा ये होगा कि वो दिक्खेगा ही नहीं. फिर हमें अमरीकी 'स्क्यूरिटी' वाले कैसे पकड़ेंगे...."
शाह महमूद कुरैशी, फ़ारेन मिनिस्टर एंड एड रिजेक्टर, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पकिस्तान: "हम इंडिया से कहेंगे कि हम उनके साथ मिलकर इस नो-बॉल को ख़त्म करना चाहते हैं. हम ये भी कहेंगे कि इंडिया हमारे साथ नो-बॉल पर इंटेलिजेंस शेयर करे.....हाल ही में अपने वाशिंगटन 'टूर' में मैंने प्रेसिडेंट ओबामा से डिमांड की है कि अमेरिका पकिस्तान को एंटी नो-बॉल मिसाइल दे जिससे हम नो-बॉल को कंट्रोल कर सकें...हमारी कोशिश रहेगी कि नो-बॉल को अफगानिस्तान में फैलने से रोका जाय लेकिन उसके लिए हमारी फ़ौज का नॉर्थ-वेस्टर्न बोर्डर पर रहना जुरुरी है...."
श्री मनमोहन सिंह, ऑनेस्टी पर्सानफाइड एंड लोंगेस्ट सर्विंग ऑनेस्ट प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया : "ये नो-बॉल की प्रॉब्लम कोई प्रॉब्लम नहीं है. पकिस्तान को चाहिए कि नो-बॉल से हटकर अपनी इकोनोमी के बारे में कुछ करे. केवल चार परसेंट ग्रोथ है पकिस्तान की. उन्हें कोशिश करनी चाहिए कि वे कम से कम टू थाऊजैंड एलेवेन से नौ परसेंट ग्रोथ रेट ले आयें. और नो-बॉल की प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए तो ज़ी क्रिकेटिकल विल चाहिए....क्रिटिकल नहीं क्रिटिकल नहीं...मैंने कहा क्रिकेटिकल...क्रिकेटिकल...जैसे पोलिटिकल वैसे ही क्रिकेटिकल..हैं ज़ी? और फिर वे एक ज़ीओएम भी तो बना सकते हैं...ज़ीओएम से कोई भी प्रॉब्लम सॉल्व हो सकती है...."
दलेर मेहँदी, फार्मर सिंगर एंड प्रजेंट डे रिअलिटी शो जज: "मैं तो मोहम्मद आमिर से यही कहूँगा ज़ी कि पुत्तर तुझे रब्ब ने, उस मालिक ने, उस ख़ुदा ने टैलेंट दिया है नो-बॉल फेंकने का. तू तो पुत्तर ऐसे ही नो-बॉल फेंकता रह. रब राखां पुत्तर...चक दे फट्टे.."
अमिताभ बच्चन, एक्टर, मॉडल, ट्वीटर, ब्लॉगर एंड अ फादर-इन-ला : "अब देखिये मैं तो एक कलाकार हूँ. मैं इसके बारे में क्या कहूँ? वैसे अगर कुछ कहना ही है तो मैं कहूँगा कि भाई साहब, माना कि आपकी टीम प्रचंड है लेकिन नो-बॉल फेंकने की वजह से खंड-खंड है....आईं? लगी..लगी मिर्ची लगी. और फिर देखिये आप क्रिकेटर हैं. आप बालिंग कीजिये, अपना पारिश्रमिक लीजिये और घर जाइए. नो-बॉल फेंककर क्या मिलेगा आपको? कुछ एक्स्ट्रा पाऊंड? पूज्यनीय बाबूजी कहा करते थे कि जो एक बार नो-बॉल फेंककर अपनी गलती न दोहराए वही असली खिलाड़ी है.....मैंने इस नो-बॉल वाली घटना पर कल ही मधुशाला में एक रुबाई जोड़ी है...हाँ, सुनिए
बालिंग पथ पर बालिंग करने चलता है बालर आला
जोर से दौड़े या फिर धीरे दुविधा में है मतवाला
कोच बताते राहें कितनी पर मैं यह बतलाता हूँ
धीरज के संग कदम धरो तो फेंकोगे फिर नो-बॉला
बाबा रामदेव, ब्रीदिंग एक्सपर्ट, आंटरप्रेनर एंड पोलिटिसियन-इन-मेकिंग: "हे हे हे. लोग पाकिस्तान से फोन करके पूछते हैं बाबा जी, ये अपने नौजवान क्रिकेटर इतना नो-बॉल क्यों फेंक रहे हैं. मैं कहता हूँ ये नो-बॉल फेंके जाने का कारण है कि एम् एन सी का आटा. पकिस्तान लीवर जो आटा पकिस्तान में बेंच रहा है उसको खाकर ही बालर नो-बॉल फेंक रहे हैं. एम् एन सी कम्पनियाँ पाकिस्तान में करीब एक लाख करोड़ का आटा और तेल बेंचती हैं. अब कोई क्रिकेटर इन कंपनियों का आटा और तेल खायेगा तो वह जो है नो-बॉल तो फेंकेगा ही. यह बात हमारे राष्ट्र के लिए एक सन्देश है कि एम एन सी के बनाये खाद्य पदार्थों को अगर न रोका गया तो हमारा भी एक-एक क्रिकेटर नो-बॉल फेंकने लगेगा. यह जो है वह पूरे राष्ट्र के लिए बहुत ही खराब होगा. इसीलिए पतंजलि योगपीठ ने चावल, बाजरा, गेंहू और जौ को मिलाकर एक आटा बनाया है जिसकी रोटी खाने से बोलर कभी भी नो-बॉल नहीं फेंकेगा. हम तो राष्ट्र निर्माण करते हैं. उसके लिए हम कटिबद्ध हैं. आज ज़रुरत है......."
चन्दन सिंह हाठी, मैनेजर गंगोत्री यन्त्र प्रतिष्ठान: "क्या आप अपने बालिंग रन-अप से परेशान हैं? क्या आप इन-स्विंगर करते हैं और वो आउट-स्विंगर हो जाता है? क्या आप जब भी नो-बॉल फेंकना चाहते है तब नहीं फेंक पाते? क्या आपकी एल बी डब्ल्यू की अपील पर अम्पायर बैट्समैन को आउट दे देता है? क्या आप विश्व के सबसे बड़े नो-बॉलर बनना चाहते हैं? क्या नो-बॉल फिक्स करने की वजह से आप बार-बार पकड़े जाते हैं? तो पहली बार गंगोत्री यन्त्र प्रतिष्ठान लाया है नो-बॉल सुरक्षा रुद्राक्ष. यह पहनने के बाद आप जब भी चाहें नो-बॉल फेंक सकते है और पकड़े भी नहीं जायेंगे. हमारा दावा है ...."
प्रणब मुख़र्जी, फिनांस मिनिस्टर एंड पोलिटिकल मैनेजर, यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस : "दीस ईभेंट हुविच हैपेण्ड ईन इंग्लैंड शूड नाट हैभ हैपेण्ड...उई फार्मली बिलीभ दैट पकिस्तान शूड ट्राई एंड ब्रिंग डाउन दा नो-बाल बोल्ड टू आंडर एट पारसेंट...आल्दो उई आर कोंसोटेंटोली मोनिटोरिंग दा सिचुयेशान एमार्जिंग फ्रॉम...."
यह था हमारे ब्लॉग-पत्रकार चंदू चौरसिया की विश्व के तमाम बड़े नेताओं और लोगों से नो-बॉल फिक्सिंग पर बातचीत. चंदू चौरसिया का अगला असाइंमेंट है कि वे युवा-नेता, युवराज, भावी प्रधानमंत्री श्री राहुल गाँधी का इंटरव्यू लेंगे. हम जल्द ही वह इंटरव्यू अपने ब्लॉग पर प्रकाशित करेंगे. तब तक हम आपसे विदा लेते हैं.