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Saturday, July 19, 2014

ट्वीट महिमा




इन्द्र परेशान बैठे थे. माथे पर 'तिरशूल' के जैसे तीन-तीन बल पड़े हुए थे. बहुत कोशिश करने के बाद भी विश्वामित्र की तपस्या इस बार भंग नहीं हो रही थी. मेनका लगातार बहत्तर घंटे डांस करके अब तक गिनीज बुक में नाम भी दर्ज करवा चुकी थी लेकिन विश्वामित्र टस से मस नहीं हुए. मेनका के हार जाने के बाद उर्वशी ने भी ट्राई मारा लेकिन विश्वामित्र तपस्या में ठीक वैसे ही जमे रहे जैसे राहुल द्रविड़ बिना रन बनाए पिच पर जमे रहते हैं. उधर मेनका और उर्वशी से खार खाई रम्भा खुश थी.

इन्द्र को समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाय. दरबारियों और चापलूसों की मीटिंग बुलाई गई. मीटिंग बहुत देर तक चली. बीच में लंच ब्रेक भी हुआ. आधे से ज्यादा दरबारी केवल सोचने की एक्टिंग करते रहे जिससे लगे कि वे सचमुच इन्द्र के लिए बहुत चिंतित हैं. काफी बात-चीत के बाद एक बात पर सहमति हुई कि इन्द्र को उनके मजबूत पहलू को ध्यान में रखकर ही काम करना चाहिए. दरबारियों ने सुझाव दिया कि चूंकि इन्द्र का मजबूत पहलू डांस है सो एक बार फिर से डांस का सहारा लेना ही उचित होगा.

डांस परफार्मेंस के लिए इस बार रम्भा को चुना गया. मेनका और उर्वशी इस चुनाव से जल-भुन गई. लेकिन कुछ किया नहीं जा सकता था. रम्भा ने तरह तरह के शास्त्रीय और पश्चिमी डांस किए लेकिन विश्वामित्र जमे रहे. उन्होंने रम्भा की तरफ़ देखा भी नहीं. हीन भावना में डूबी रम्भा ने एक लास्ट ट्राई मारा. मशहूर डांसर पाखी सावंत का रूप धारण किया और तीन दिनों तक फिल्मी गानों पर डांस करती रही लेकिन नतीजा वही, ढाक के तीन पात.

रम्भा को वापस लौटना पडा. रो-रो कर उसका बुरा हाल था. उसे अपनी असफलता का उतना दुख नहीं था जितना इस बात का था कि उर्वशी और मेनका अब उठते-बैठते उसे ताने देंगी.

प्लान फेल होने से इन्द्र दुखी रहने लग गए. सप्ताह में तीन चार दिन तो सोमरस चलता ही था, अब सुबह-शाम धुत रहने लगे. लेकिन उनके प्रमुख सलाहकार को अभी तक नशे की लत नहीं लगी थी. काफी सोच-विचार के बाद वो एक दिन चंद्र देवता के पास गया. वहाँ पहुँच कर उसने पूरी कहानी सुनाई और साथ में चंद्र देवता से सहायता की मांग की.चंद्र देवता की गिनती वैसे ही इन्द्र के पुराने साथियों में होती थी. सभी जानते थे कि चन्द्र देवता इन्द्र के कहने पर एक बार मुर्गा तक बन चुके थे. वे इन्द्र के लिए एक बार फिर से पाप करने पर राजी हो गए.

चंद्र देवता रात की ड्यूटी करते-करते परेशान रहते थे, सो वे बाकी का समय सोने में बिताते थे. लेकिन इन्द्र की सहायता की जिम्मेदारी जो कन्धों पर पड़ी तो नीद और चैन जाते रहे. दिन में भी बैठ कर सोचते रहते थे कि 'इस विश्वामित्र का क्या किया जाय. इन्द्र के सलाहकार को वचन दे चुका हूँ. इन्द्र को भी दारू से छुटकारा दिलाना है नहीं तो आने वाले दिनों में पार्टियों का आयोजन ही बंद हो जायेगा.'

एक दिन बेहद गंभीर मुद्रा में चिंतन करते चंद्र देवता को नारद ने देख लिया. देखते ही नारद ने अपना विश्व प्रसिद्ध डायलाग दे मारा; "नारायण नारायण, किस सोच में डूबे हैं देव?"

"हे देवर्षि, बड़ी गंभीर समस्या है. वही देवराज और विश्वामित्र वाला मामला है. इसी सोच में डूबा हूँ कि देवराज की मदद कैसे की जाए. वैसे, हे देवर्षि, आप तो देवलोक, पृथ्वीलोक, ये लोक, वो लोक सब जगह घूमते रहते हैं. आप ही कोई रास्ता सुझायें. इस विश्वामित्र की क्या कोई कमजोरी नहीं है?"; चंद्र देवता ने लगभग गिडगिडाते हुए पूछा.

"नारायण नारायण. ऐसा कौन है जिसकी कोई कमजोरी नहीं है. वैसे आप तो रात भर जागते हैं, लेकिन आप भी नहीं देख सके, जो मैंने देखा"; नारद ने चंद्र देवता से पूछा.

"हो सकता है, आपने जो देखा वो मुझे इतनी दूर से न दिखाई दिया हो. वैसे भी आजकल जागते-जागते आँख लग जाती है. लेकिन हे देवर्षि, आपने क्या देखा जो मुझे दिखाई नहीं दिया?"; चंद्र देवता ने पूछा.

"मैंने जो देखा वो बताकर देवराज की समस्या का समाधान कर मैं ख़ुद क्रेडिट ले सकता हूँ, लेकिन फिर भी आपको एक चांस देता हूँ. आज रात को ध्यान से देखियेगा, ये विश्वामित्र एक से तीन के बीच में क्या करते हैं"; नारद ने चंद्र देवता को बताया.

रात को ड्यूटी देते-देते चंद्र देवता विश्वामित्र की कुटिया के पास आकर ध्यान से देखने लगे. उन्हें जो दिखाई दिया उसे देखकर दंग रह गए. उन्होंने देखा कि विश्वामित्र ट्विटर पर लगे हैं और ट्वीट किये जा रहे हैं. ट्वीट पोस्ट करते और बार-बार चेक करते कि किसी ने आर टी और फेवरिट किया या नहीं?

चंद्र देवता को समझ में आ गया कि नारद का इशारा क्या था.

दूसरे ही दिन इन्द्र के सलाहकार ने इन्द्र का एक ट्विटर अकाउंट बनाया. ट्विटर पर पहले ही दिन विश्वामित्र की निंदा करते हुए इन्द्र ने दर्जन भर ट्वीट कर दिया. साथ में विश्वामित्र की ट्वीट के जवाब देने के लिए अपने दरबारियों का अकाउंट भी खुलवा दिया. दरबारी उनकी ट्वीट आर टी करने लगे. साथ ही विश्वामित्र को ट्रॉल करने लगे. ट्वीट, आर टी और फेवरिट का सिलसिला शुरू हुआ तो विश्वामित्र का सारा समय अब ट्वीट लिखने, इन्द्र के गाली भरे ट्वीट का जवाब देने और इन्द्र और उनके दरबारियों से लड़ने झगड़ने में जाता रहा. उनके पास तपस्या के लिए समय ही नहीं बचा.

विश्वामित्र की तपस्या भंग हो चुकी थी. इन्द्र खुश रहने लगे.

Friday, September 6, 2013

कबीर के दोहों के ट्विटरीय अर्थ




कबीरदास जी दोहे लिखते थे. तमाम लोग उनके दोहे पढ़कर बड़े हुए. कुछ ने उन दोहों से कुछ तो कुछ ने बहुत कुछ सीखा. इन दो के अलावा तीसरी तरह के लोगों ने उन्हें दूसरों के सामने बोलकर खुद के लिए ज्ञानी की उपाधि पक्की कर ली. इन तीनो के अलावा एक और प्रजाति है जिसने उनके दोहों का ब्लॉग खोल लिया और ट्विटर पर अकाउंट बनाकर उन्हें ट्वीट भी करते रहे.

ट्विटर पर कबीरदास जी के दोहे पढ़कर हमलोगों के मन में एकदिन आया कि अगर वे आज रहते तो ट्विटर पर जरूर होते और अपने दोहे ट्वीट करते तो उन्हें खूब आरटी मिलती. दोहों का साइज भी ऐसा कि ट्विटर पर एक सौ चालीस करैक्टर की शर्त में फिट बैठता है. फिर मन में आया कि अगर वे अपने दोहे ट्वीट करते तो तमाम लोग उन दोहों को स्लाई समझकर अपने-अपने हिसाब से उसका अर्थ निकालते. सोचकर देखिये कि कैसे कैसे भावार्थ निकाले जाते। यह पोस्ट कुछ ऐसे ही संभावित भावार्थों का संकलन है. आप बांचिये।

नोट: यह पोस्ट बीबीपी यानि ब्लॉगर-ब्लॉगर पार्टनरशिप की पोस्ट है जिसे मैंने और विकास गोयल जी ने लिखा है.


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पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

उपरोक्त दोहे के माध्यम से कबीर दास जी सन्देश देना चाहते हैं कि हे ट्वीपल न ही मोटी-मोटी पुस्तकें पढने से और न ही अपने ट्विटर बायो में आईआईटी/आईआईएम लिख देने से ट्विटर पर पंडित या विद्वान कहलाये जाओगे. यह न भूलो कि ज्ञान नहीं, अपितु ज्ञान की बातें ट्विटर पर तुम्हारे विद्वान या पंडित कहे जाने का मार्ग प्रशस्त करती है. इसलिए हे ट्वीपल अगर विद्वान कहलाने की लालसा है तो फिर ट्वीट लिखकर बताओ कि ‘Just got my copy of ‘Human Psychology’ from flipkart, #nowreading.

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।

उपरोक्त दोहे के माध्यम से कबीरदास ट्वीपल से कह रहे हैं कि टेक इट ईजी डूड. बार-बार मेंशन या प्लीज आरटी लिखने से कुछ नहीं होगा. हे ट्वीपल वैसे तो आईफ़ोन, आईपैड, एस-फोर वगैरह रखना ईजी है और धीरज रखना कठिन, किन्तु सफलता की कुंजी बताती है कि धीरज ही रखने की जरूरत है. जब तुम्हारा समय आएगा और सामने वाले को पता चल जायेगा कि तुम बड़ी कंपनी में उच्च-पद पर कार्यरत हो, तब तुम्हें आरटी अपने आप मिलने लग जाएगी क्योंकि सामनेवाला जबतक आरटी नहीं करेगा वह तुम्हें लिंक्ड-इन पर इनवाईट नहीं कर पायेगा.

निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

उपरोक्त दोहे के माध्यम से कबीरदास जी यह सन्देश देना चाहते हैं कि हे ट्वीपल अपने आलोचक को न केवल फालो करो अपितु उसे अपने और पास रखने के लिए उसके साथ डीएम का आदान-प्रदान भी करो. क्योंकि ट्विटर पर असली आलोचक वह होता है जो तुम्हारी गल्तियाँ तुम्हें बताकर उनमें सुधार कर पाए या न कर पाए, अपनी आलोचना से तुम्हें फेमस जरूर कर देता है.

जहाँ एक तरफ कुछ विद्वान इस दोहे का भावार्थ यह निकालते हैं वहीँ सोशल मीडिया के कुछ और भावार्थ-वीरों का मानना है कि यह दोहा कबीरदास जी ने एक्स्क्लुसिवली ऐसे ट्विटर सेलेब के लिए लिखा है जिन्हें अपनी असाधारण रूप से साधारण ट्वीट के लिए भी एपिक नामक टिप्पणी पढने का नशा होता है. कबीरदास जी ऐसे ट्विटर सेलेब्स को इस दोहे के माध्यम से सन्देश दे रहे हैं कि हे ट्वीपल तुम मानो या न मानो लेकिन सत्य यही है कि हरबार तुम ऐसा ट्वीट नहीं ठेल सकते जो एपिक हो और एपिक के अलावा कुछ भी न हो. इसलिए जब तुम्हारा कोई फालोवर उसे रद्दी करार दे दे, तो उसकी आलोचना का सम्मान करो और उसे कुछ मत कहो क्योंकि तुम्हारे बाकी चेले-चपाटे उससे खुद ही निपट लेंगे.

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

उपरोक्त दोहे के माध्यम से कबीरदास जी ट्वीपिल को संदेश देते हैं कि ट्विटर पर फालोवर से यह पूछने की जरूरत नहीं कि वह रागां का फैन है या नमो का. कौन किसका फैन-शैन है यह जानने में कुछ आनी-जानी नहीं है. असल ज्ञान यह जानना है कि कौन से फैन फालोविंग से ज्यादा आरटी मिल सकती है? जिस ग्रुप से ज्यादा आरटी मिले, बस उसी के फैन बन जाओ, फालोवर भला करेंगे.

हिन्दू कहे मोहि राम पियारा, तुरक कहे रहमाना,
आपस में दोउ लडि लडि मुए, मरम न कोऊ जाना।

इस अत्यंत महत्वपूर्ण दोहे के माध्यम से कबीरदास जी कहते हैं कि ट्विटर पर कोई शाहरुख़ का भक्त है तो कोई सलमान का. इन दोनों के भक्तों की मंडली सुबह-शाम आपस में लडती-भिड़ती रहती है. यह साबित करने के लिए दोनों में से कौन महान है? लेकिन लड़ने-भिड़ने में बिजी दोनों ग्रुप आजतक इस मरम का पता नहीं लग पाए कि लाखों लोग जस्टिन बीबर और केआरके दीवाने क्यों हैं?

सात समंदर मसि करौ, लेखनि सब बनराइ,
धरती सब कागद करौ, हरि गुन लिखा न जाइ।

कबीरदास जी कहते हैं सात समंदर की स्याही घोल लो और संसार भर के वनों के पेड़ से कलम बना लो फिर भी ट्विटर पर विराजमान उस फ़िल्मी भगवान की रिप्लाई के जवाब के एवज में उसकी महिमा का बखान नहीं कर सकोगे जो उसने तुम्हारे एक हज़ारवें ट्वीट के बाद तुम्हें दिया है. हे ट्वीपल जब यह करके भी तुम धन्य नहीं हो सकते तो ट्वीट तो केवल एक सौ चालीस करैक्टर का होता है. ऐसे में अपने उस फ़िल्मी स्टार रुपी भगवान की रिप्लाई का बखान करने के लिए एक हज़ार ट्वीट लिखकर उसे थैंक यू बोलोगे तो भी उसका कर्ज नहीं उतार पाओगे.

जो जल बाढ़े नाव में, घर में बाढ़े दाम,
दोऊ हाथ उलीचिए, यही सयानो काम।

कबीरदास जी कहते हैं कि जब तुम्हारे फ़लोवर्स की संख्या हजारों में हो जायेगी और तुम अपने घर वालों को दिखाते हुए बताओगे तो तुम्हारे घर में तुम्हारा दाम बढेगा. अपना दाम बढाने के लिए तुम्हें और फ़ालोवर्स चाहिए और इसका एक ही मन्त्र है कि तुम नए नए फलोवार्स की ट्वीट की रिप्लाई दोनों हाथ से उलीच कर करते रहो. फालोवर्स की संख्या बढ़ती रहेगी और घर में तुम्हारा दाम भी बढ़ता रहे.

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।

श्री कबीरदास का उपरोक्त दोहा ऐसे ट्वीपल के लिए नीतिवचन टाइप है जो दिनभर में दो ढाई सौ ट्वीट ठेल देता है. उपरोक्त दोहे में कबीरदास जी ऐसे ट्वीपल को इशारा करते हुए बताना चाहते हैं कि हे ट्वीटयोद्धा दिनभर ट्वीट करने से कुछ नहीं मिलेगा. ऊपर से लोग जान जायेंगे कि तुम्हारे पास और कोई काम-धंधा नहीं है इसलिए तुम सारा दिन ट्विटर से चिपके रहते हो. साथ ही वे ऐसे ट्वीपल को भी इशारा करके समझा रहे हैं जो दिन भर सरकार और मीडिया पर बरसते रहते हैं. वे उन्हें हिदायत दे रहे हैं कि ज्यादा बरसना ठीक नहीं है क्योंकि इधर तुम बरसोगे और उधर सरकार और मीडिया धूप करके इस बरसात को सुखा देंगे.

सांई इतना दीजिये जामे कुटुंब समाय,
मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाय।

इस दोहे के माध्यम से संत कबीरदास ने ट्वीटबाजों के लिए नहीं अपितु फेसबुकियों के लिए सन्देश दिया है. कबीरदास जी फेसबुकी से कहते हैं कि वह अपने सांई से फेसबुक के फोटो और एलबम वाले सेक्शन में उतनी जगह मांगे जिसमें उसके और उसके कुटुंब यानी परिवार के हर सदस्य की हर होलीडे की फोटो लग जाए और उसका पूरा कुटुंब उन अलबमों में समा जाय. वह फेसबुक प्रोफाइल पर इतनी फोटो डाल दे कि फिर उसे फोटो डालने की भूख न रहे. साथ ही फ्रेंड रुपी साधु उन फोटो को देखकर इतनी लाइक दे कि लाइक देने से उसका पेट भर जाए और उसे भूखा वापस जाने की जरूरत न पड़े.

रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय,
हीरा जन्म अमोल था, कोड़ी बदलेजाय।

इस दोहे के माध्यम से कबीरदास जी कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि हे ट्वीपल रात को सोकर और दिन को खाकर अपना जीवन व्यर्थ न करो. असल मज़ा लेने के लिए पूरी-पूरी रात ट्वीट करो. यह चिंता न करो कि रात हो गई है और तुम्हारी ट्वीट कोई नहीं पढ़ेगा। अरे भारत में रात है तो क्या हुआ, ऑस्ट्रेलिया में तो दिन है और कैनाडा में शाम. इसलिए दिन रात ट्विटर पर लगे रहो. परिवार, मित्र वगैरह तो आते-जाते रहेंगे लेकिन ट्विटर पर फालो करने वाला एकबार चला गया तो फिर वापस नहीं आएगा और ट्विटर पर ही नहीं, घर में भी तुम्हारा मोल घट जायेगा.

Monday, June 17, 2013

नितीश कुमार जी की ट्विटर टाइमलाइन - Nitish Kumar's Twitter Timeline




नितीश कुमार जी अपनी पार्टी लेकर एन डी ए से कूच कर गए। कल शाम से ही लोग विश्लेषण किये जा रहे हैं। ऐसे में अगर नितीश बाबू की ट्विटर टाइमलाइन पर क्या बमचक मची है, वह आप बांचिये:

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नोट: और भी लोगों की ट्विटर टाइमलाइन बांच सकते हैं।

ममता बनर्जी की ट्विटर टाइमलाइन।

राष्ट्रपति चुनाव बमचक पर एक ट्विटर टाइमलाइन।

अरविन्द केजरीवाल की ट्विटर टाइमलाइन।

राहुल गांधी जी की पहली ट्विटर टाइमलाइन

Friday, January 25, 2013

एक और ट्विटर टाइमलाइन





राजनीति की लड़ाई धीरे-धीरे परंपरागत मीडिया से आगे जाकर सोशल मीडिया पर आ गई है। अब महत्व इतना बढ़ गया है कि अफवाहानुसार कांग्रेस पार्टी ने सौ करोड़ रूपये सोशल मीडिया पर अपना बर्चस्व बनाने के लिए खर्च करने का फैसला किया है।

फ़र्ज़ कीजिए कि उनके नेता श्री राहुल गाँधी भी कल को अगर ट्विटर पर आ जायेंगे तो पहले दिन उनकी ट्विटर टाइमलाइन कैसी दिखेगी? शायद कुछ ऐसी?
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नोट: कुछ मित्र "भगवा आतंकी" जैसे ट्विटर हैंडल देखकर नाराज हो सकते हैं। मुझे यही कहना है कि इसी नाम के और इससे मिलते-जुलते ट्विटर हैंडल पिछले 3-4 दिनों से ट्विटर पर देख रहा हूँ। और मुझे अच्छा नहीं लग रहा।


Monday, November 19, 2012

फेसबुकी और ट्वीटबाज




फेसबुकी ने अपने नए नवेले स्टेटस में लिखा; "आज दांत की डॉक्टर ने लापरवाही के लिए बहुत डांटा।" आधे घंटे में बीस लोगों ने उनकी बात को 'लाइक' कर डाला। फेसबुक से अपरिचित कोई इंसान देखे तो सोचने के लिए मजबूर हो जाए कि जिन लोगों ने फेसबुकी के स्टेटस को 'लाइक' किया, कहीं वे डॉक्टर द्वारा उन्हें लगाईं गई डांट से प्रसन्न तो नहीं हैं? या फिर 'लाइक' करने वाले ये फ्रेंड्स मन ही मन यह सोच रहे होंगे कि; "अच्छा हुआ जो तुझे डॉक्टर ने डांटा। उसने डांट लगाईं तो हमारे कलेजे को ठंडक पहुंची।"

धरमशाला में बिताई गई छुट्टियों की 'पिक्स' फेसबुक पर चढ़ाए आदित्य को आधा घंटा भी नहीं हुआ और सत्तर लोग 'लाइक' कर जाते हैं। यह बात अलग है की 'आदि' बार-बार अपना फेसबुक नोटिफिकेशन अपडेट देखता है। यह जानने के लिए कि जिस कॉलेज फ्रेंड के साथ वह पूरा दिन कॉलेज में था, उसने इन 'पिक्स' को लाइक किया या नहीं? अगर ऐसा नहीं हुआ तो उसे फोन करके रिमाइंड किया जा सकता है। यह कहते हुए कि ;"बेटा, चालीस मिनट हो गए 'पिक्स' लगाए हुए लेकिन उसे अभी तक लाइक नहीं 'करी' तूने। देख लेना, तू भी नेक्स्ट मंथ जाएगा वैकेशंस पर। लद्धाख की पिक्स लगइयो, फिर दिखाऊँगा तुझे। लाइक तो करूंगा नहीं, गन्दा सा कमेन्ट लिख दूंगा सो अलग।"

चंदू के चाचा अगर चंदू की चाची को लेकर चांदनी चौक जाते हैं तो चंदू को भी इस बात की खबर फेसबुक से ही मिलती है। वहीँ चंदू अगर नई जींस खरीद लाता है तो इस बात की ब्रेकिंग न्यूज़ टाइप खबर सबसे पहले स्टेटस के रूप में फेसबुक पर ही उभरती है। जॉब इंटरव्यू में अच्छा नहीं कर पाता तो घर वालों को बताने से पहले फेसबुकी मित्रों को बताता है। उसके स्टेटस मेसेज को देख फ्रेंड्स-लिस्ट में बिराजमान उसके चाचू को समझ में नहीं आता कि वे फेसबुक पर ही उससे सवाल कर लें या घर पहुंचकर उससे बात करें।

वे दिन लद गए जब कवि सौमेंद्र अपनी नई कविता का चुटका जेब में लिए मोहल्ले के कविताप्रेमियों की तलाश में डह-डह फिरा करते थे और तबतक घर वापस नहीं आते थे जब तक उस कविता को किसी न किसी के ऊपर झोंक न देते। अब हाल यह है कि इधर उन्होंने कविता लिखी, उधर आधे घंटे में कविता फेसबुक का स्टेटस बन गई। अगले एक घंटे में पचीसों ने कविता को लाइक कर कविवर को अनुगृहीत कर डाला। फेसबुकी व्यवस्था का एक फायदा यह है कि कविवर की फ्रेंड्स-लिस्ट में उपस्थित मित्र कविता को केवल लाइक कर सकते हैं। ऐसा नहीं कि इस व्यवस्था से हमें केवल फेसबुकी कवि की प्राप्ति होती है। कविवर की फ्रेंड्स-लिस्ट में से ही कोई आलोचक बनकर उभर आता है।

एक ही जगह पर पाठक और आलोचक दोनों मिल जाते हैं। एक कवि को और क्या चाहिए?

ट्वीटबाज ने लिखा; "वी डोंट मेक फ्रेंड्स एनीमोर, वी सिम्पली ऐड देम।"

तमाम लोगों ने न सिर्फ ट्वीटबाज की इस सूक्ति में अपनी आस्था जताई बल्कि घंटे भर में ढाई सौ लोगों ने उसे री-ट्वीट करके इस सूक्ति ठेलक ट्वीटबाज को बिना शर्त समर्थन दे डाला। देशभक्त नम्बर वन के नाम से प्रसिद्द ट्वीटबाज प्रधानमंत्री तक से पॉलिसी मैटर्स पर ट्वीट करके सवाल पूछ ले रहा है। उनकी आलोचना कर रहा है। पार्लियामेंट इज सुप्रीम नामक जुमले पर अपना ट्वीट-रुपी ड्रोन दागकर उसे धराशायी कर दे रहा है। श्रद्धानुसार अपनी ट्वीट से देश को मज़बूत कर रहा है।

जी हाँ, सोशल मीडिया की दुनियाँ में आपका स्वागत है। बोले तो वेलकम टू द वर्ल्ड ऑफ़ सोशल मीडिया। इंटरनेट की नागरिकता प्राप्त शहरी का नया ठिकाना। हाल के वर्षों में भारतीय शहरी को प्रभावित करनेवाला मंहगाई के बाद दूसरा सबसे बड़ा फैक्टर। हाल यह है कि देखकर अनुमान लगाना कठिन हो जाता है कि सोशल मीडिया ने हमारे जीवन में प्रवेश किया या हमारे जीवन ने सोशल मीडिया में।

भारत ही क्यों, दुनियाँ भर में लोगों ने फेसबुक और ट्विटर पर भी अपना एक घर बना लिया है। परिणाम यह कि सोशल मीडिया के ये ठिकाने तमाम लोगों की कलाओं का एक म्यूजियम सा दीखते हैं। यहाँ अब हम इतना समय बिताने लगे हैं कि हमारे ऊपर यहाँ भी परफॉर्म करने का प्रेशर रोज दो इंच बढ़ जाता है। अगर एक फेसबुक स्टेटस हिट हो जाता है तो हमारा अगला प्रयास अपने अगले स्टेटस को सुपरहिट बनाने का होता है। इस कवायद के तहत हम अपने ऊपर प्रेशर भी डाल लेते हैं। कई बार लगता है कि इस चिंता में तमाम लोग सोते से उठ जाते होंगे। इस चिंता में कि कल सुबह फेसबुक का नया स्टेटस किस विषय पर होगा?

ऐसा टेंशन समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों को नए सिंड्रोम ईजाद करने का मौका देता है।

मौका सोशल मीडिया भी सबको दे रहा हैं। हम सवाल उठा सकते हैं, अपनी बात कह सकते हैं, लोगों से बतिया सकते हैं, उनकी आलोचना कर सकते हैं, उनका विरोध कर सकते हैं, और चाहें तो उनसे सहमत भी हो सकते हैं। ऐसा कर सकने की बात शायद उस पॉवर से उभरती है जो हमें यह विश्वास दिलाता है कि हमें कोई पढ़ रहा है, सुन रहा है, देख रहा है।

यही विश्वास मुरादाबाद के चौबे जी से बराक ओबामा तक को ट्वीट करवा देता है और चौबे जी उनसे सवाल पूछ लेते हैं कि वे अगली बार भारत कब आ रहे हैं? या कि मिशेल भाभी कैसी हैं? एक बार तो उन्होंने ओबामा जी पूछा कि अगर वे अमेरिका जाएँ तो क्या ओबामा जी से मुलाकात हो सकती है? इस बात की सनद नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने उनके सवालों का क्या जवाब दिया? इसी सिद्धांत के तहत लोग भारत के प्रधानमंत्री तक से सवाल पूछते बरामद होते है। उनके अर्थशास्त्र के ज्ञान तक पर शंका जाहिर कर देते हैं। उन्हें सुझाव दे डालते हैं। जो अमिताभ बच्चन सिनेमा की स्क्रीन से चलकर लोगों के ड्राइंग रूम तक ही पहुंचे थे, वही अब लोगों के स्मार्ट फ़ोन और लैपटॉप की स्क्रीन तक पहुँच गए हैं। ट्विटर और फेसबुक प्रदेश का नागरिक उनसे बतिया रहा है।

अपनी सामर्थ्य के अनुसार अपने लिए स्पेस निकाल लिया जा रहा है। अपनी विचारधार की रक्षा की जा रही है। समर्थकों और विरोधियों के गुट बन रहे हैं। विरोधी की ट्वीट-मिसाइल टाइम-लाइन पर गिरी नहीं कि उसके जवाब में इधर से एक मिसाइल दाग दी जाती है। एकाग्रचित्त होकर लोग एक-दूसरे से सलट ले रहे हैं। फालोवर्स आ रहे हैं। स्पेस बढ़ाया जा रहा है। ह्यूमर को नए आयाम दिए जा रहे हैं। चुटुकुले गढ़े जा रहे हैं। तर्क दिए जा रहे हैं। तर्क स्वीकार किये जा रहे हैं। सहमति बनाई जा रही है। नीतियों और खबरों का विश्लेषण किया जा रहा है। खबरों को नए नजरिये से न सिर्फ देखा जा रहा है बल्कि वह नजरिया हजारों तक पहुँचाया जा रहा है।

कुल मिलाकर एक बिकट नए-लोकतंत्र की सृष्टि कर ली जा रही है।

सोशल मीडिया में हमारी जीवनशैली दिक्खे, बात यहीं ख़त्म होती नहीं लगती। अब लोग इस बात की भी आशंका जताने लगे हैं कि विवाह-योग्य कन्या का पिता आनेवाले समय में वर के पिता से सवाल सकता है कि; "भाईसाहब, मैंने तो आपके बेटे को देख लिया है। अब एक सवाल बेटी डॉली के बिहाफ पर पूछ रहा हूँ। वह जानना चाहती है कि ट्विटर पर आपके बेटे के फालोवर्स कितने हैं? कह रही थी अगर फालोवर्स पाँच हज़ार होंगे तो सिद्ध हो जाएगा कि आपके बेटे का सेन्स ऑफ़ ह्यूमर अच्छा है।"

यह बात भी की जा रही है कि आनेवाले समय में नौकरी के लिए जारी विज्ञापन में कंपनी लिख सकती है; 'कैंडिडेट्स विद मोर दैन टेन थाऊजेंड फालोवर्स ऑन ट्विटर विल बी प्रेफर्ड' या 'कैंडिडेट्स विद मोर दैन सेवेन थाऊजेंड सब्सक्राइबर्स ऑन फेसबुक विल बी प्रेफर्ड' अब तो कुछ जॉब इंटरव्यू ट्विटर पर ही हो जा रहे हैं और लोगों को वहीँ से रिक्रूट कर लिया जा रहा है। अब ट्विटर और फेसबुक सेलेब्रिटी दूरसंचार कंपनियों के ब्रांड एम्बेसेडर बना लिए जा रहे हैं।

कुछ ट्वीटबाजों की ट्वीट्स देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे इस मीडियम को कितनी गंभीरता से लेते हैं? उनके ट्विटर टाइमलाइन को कोई पढ़ ले तो उसके मन में बात आ सकती है कि ; "इस ट्वीटबाज को विश्वास है कि उसे एक दिन स्टार ट्वीटर ऑफ़ द ईयर का पुरस्कार ज़रूर मिलेगा। या कि ये ट्वीटबाज एक दिन आयोजित होनेवाले अंतर्राष्ट्रीय ट्वीट कान्फरेन्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। कि वह दिन भी आ जाएगा जब बुकर प्राइज़ कमिटी प्रावधान करेगी कि ट्वीटस के लिए भी बुकर प्राइज दिया जाय।"

हर तरह के लोगों से सुसज्जित है ट्विटर का प्लेटफ़ॉर्म। यह हमपर निर्भर करता है कि हम किसे फालो करना है? इस मामले में ये ठिकाने बड़े डेमोक्रेटिक हैं। जो जिसको चाहे फालो कर ले। कोई चाहे तो ऐसे ट्वीटबाज को फालो कर ले जिनका ट्वीट-दर्शन अमेरिका से प्रभावित है। जैसे युद्ध में अमेरिका कारपेट बॉम्बिंग करता है वैसे ही ये ट्वीटबाज कारपेट ट्वीटिंग करते हैं। इनके कीबोर्ड से एक क्षण अगर अफगानिस्तान पर घोषित नई अमेरिकी नीति के समाचार वाला लिंक है तो दूसरे ही क्षण ये ब्राजील की इकॉनमी के सॉफ्ट लैंडिंग के विषय में आई खबर का लिंक ट्वीट कर डालेंगे। पांच मिनट के अन्दर ये अफ्रीका के खाद्यान्न संकट, ऑपेक देशों द्वारा क्रूड आयल के उत्पादन में की गई कटौती, करण जोहर की नई फिल्म की रपट, फ़ूड इन्फ्लेशन के आँकड़े, वगैरह की खबरों वाले लिंक ट्वीट कर सकते हैं। आपको जो पढना हो, उसे चूज कर लें। ऐसे ट्वीटबाजों के फालोवर्स इस बात से प्रभावित हुए बिना नहीं बच पाते कि बन्दे के इन्टरेस्ट कितने वाइड हैं।

इन सबके बीच सोशल मीडिया चुनौती भी दे रहा है। चुनौती सरकारों को। पारंपरिक मीडिया को। चुनौती इसे इस्तेंमाल करने वालों को।

इसे कहाँ, कब और कितना इस्तेमाल किया जाय, उसपर बहस शुरू हो गई है। जहाँ सरकारी कवायद इस बात पर केन्द्रित है कि क्या सोशल मीडिया को कुछ हद तक कंट्रोल किया जाय, वहीँ इस्तेमाल करनेवाले इस बात पर भी विचार करने लगे हैं कि वे कितना समय दें? यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो देर-सबेर हर माध्यम पर लागू होती है। जो भी है, फिलहाल तो ऐसा लगता है कि अभी इस मीडिया के लिए ये शुरुआती दिन हैं और आनेवाले समय में यह अपने आप अपनी तरह से अपना विकास कर लेगा। जो भी है, माध्यम है मस्त।

जैसा कि प्रसिद्द ट्वीटबाज माधवन नारायणन जी ने अपनी एक ट्वीट में लिखा; "एज आई हैव सेड इट अर्लियर टू, ट्विटर इज अ ग्रेट प्लेस टू इंस्पायर एंड कन्स्पायर।"


नोट: यह लेख दीपावली पर निकलनेवाली नवभारत टाइम्स की पत्रिका के लिए लिखा गया था।

Wednesday, October 10, 2012

अरविन्द केजरीवाल की ट्विटर टाइम लाइन...




घोटाले हुए हैं तो खुलासे भी होंगे ही। घोटालों की यही खासियत होती हैं कि ये अकेले नहीं होते। बिना खुलासे का घोटाला वैसा ही होता है जैसे बिना सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट मैच। आरोप और प्रत्यारोप के बीच हर सीमा पर लड़ाई छिड़ी है। मेन स्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया कोई भी मैदान बचा नहीं है। ऐसे में मन में आया कि अरविन्द केजरीवाल की ट्विटर टाइम लाइन पर पिछले दो दिनों में हुए घमासान पर बहस चलती तो कैसी रहती? शायद कुछ ऐसी :

Arvind Kejriwal's Twitter Timeline

Tuesday, August 7, 2012

ट्वीटर का आह्वान!




यह सवा सौ ग्राम की तुकबंदी ट्वीट-योद्धा का आह्वान कर रही है. आप बांचिये और अगर ट्विटर पर हैं तो इस आह्वान को सुनते हुए लग जाइए:-)

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पूरब में सूरज उगा, जग उठा दिन अब,
अलसाई आँखें मलकर खोलोगे कब?
ट्वीटाधिराज बिस्तर से अब उठ जाओ,
स्मार्टफ़ोन पर को झट से हाथ लगाओ
पढ़ लो पहले जो टी एल है बतलाती,
मत ध्यान करो गर कोयल भी हो गाती
मन करे अगर तो गुडमोर्निंग कह डालो,
बदले में गुड़-डे वाली कुछ विश पा लो
चिंता कर डालो देशभक्त बन जाओ,
झट अपने दल का खूब समर्थन पाओ
अन्ना को गाली, रामदेव को रगड़ो,
गर मिलें सपोर्टर उनसे फट से झगड़ो
सोनिया माइनो, मनमोहन को गाली,
आरटी भी ले लो और साथ में ताली
दो यूं कुतर्क राहुल महान हो जायें,
सड़ियल ट्वीटें भी स्वीट-तान हो जाए
जिसको भी चाहो पेड-न्यूज बतलाओ,
अपने लोगों से खुब आशीष कमाओ
स्वामी जवाब दें फट आर टी कर डालो,
दूसरों की टाइम-लाइन को भर डालो
खबरों की लेकर लिंक उन्हें झट ठेलो,
फालोवर्स की तारीफ फटाफट ले लो
फैसला सुनाओ धर्म तुम्हारा बढ़िया,
कोई जो करे अपोज उसे कह घटिया
अपने रस्ते पर बस चलते ही जाओ,
जो करें विरोध उन्हें चिरकुट बतलाओ
कुछ पत्रकार को बतलाना तुम हालो,
पर कभी न करना उनको तुम अनफालो
फिर उसकी कोई घटिया ट्वीट पकड़कर,
और ट्रोल करो फिर उसको रोज रगड़कर
बतलाओ सबको मीडिया बिका हुआ है,
इनपर ही भ्रष्टाचारी टिका हुआ है
पर लिंक उसी मीडिया वाली तुम लेना,
उसको चाहे जितनी गाली तुम देना
कुछ कर डालो कि ट्वीट-क्रान्ति आ जाए,
और ट्वीट तुम्हारे लाखों आर टी पाए
हर मुद्दे को पकड़ो टांगों से, खींचो,
और बीच-बीच में ट्वीट-मुट्ठियाँ भींचो
ललकारो अपने दुश्मन को दो गाली,
कोई भी ट्वीटिंग-बुलेट न जाए खाली
छेड़ो तुम दलित-विमर्श जो आये मन में,
फिर दौड़ो जैसे कोई चीता वन में
स्त्री-विमर्श मोहताज रहे ट्वीटों की,
जो गाली दें ऐसे लम्पट, ढीठों की
आसाम की चाहे हों यूपी की बातें,
चाहे नेता की हों घातें-प्रतिघातें
हों यूपी वाली सिस्टर जी के हाथी,
या जो थे कलतक नेताजी के साथी
हों ज़रदारी या फिर बाराक ओबामा,
चाहे हों देसी सिब्बल, दिग्गी मामा
झट ट्वीट-एक्शन सबपर ही कर डालो,
जिससे सब पढ़ें जो करते तुमको फालो
लेकर शस्त्रों को ट्वीटक्षेत्र में जाओ,
भारत-गौरव अब राष्ट्रप्रेम दिखलाओ

ट्विटर एंथेम ट्वीटपथ ट्वीटपथ ट्वीट पथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कर सकते हैं. ट्विटर पर और ब्लॉग पोस्ट यहाँ, यहाँ और यहाँ क्लिक करके बांच सकते हैं.


Wednesday, June 20, 2012

राष्ट्रपति चुनाव बमचक - एक ट्विटर टाइम-लाइन.




जैसा कि होता है. हर मुद्दे की तरह राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर भी बड़ी बमचक मची हुई है. मुलायम सिंह जी ने ममता दी को धोखा दे दिया. ममता दी ने धोखा ले लिया. उधर शिवसेना और जेडीयू ने बी जे पी को धोखा दे दिया. बी जे पी ने भी ले लिया. सबने मिलकर डॉक्टर कलाम को धोखा दे दिया. धोखा लेन-देन का कार्यक्रम लगातार चलता जा रहा है. सबकुछ देखकर मन में आया कि मुलायम सिंह जी के धोखा देने के बाद अगर ममता दी की ट्विटर टाइम-लाइन दीखती तो कैसी दीखती?

शायद कुछ ऐसी:


Mamta Banerjee @DialMforMamta                                                                                     
What Mulayom Singh did will prove to be detrimental to Indian democracy in future.

@DialMforMamta देखिये हामे जो किया वोई ओकतन्त्र के इये अच्छा था। हामे जो है कुछ बुआ नईं किया।

Mamta Banerjee @DialMforMamta                                                                                                 
@Soft_Lion  ei ki? Eta ki bhasha? Mone hoy Hindi te likhe chhe..Mulayom ji, let me first get the trans-lesson of whatever you have written.

Mulayam Singh @Soft_Lion                                                                                                
@DialMforMamta अ इजिये कअ इजिये। हमें जो ऐ ... कोई आपत्ति नईं ऐ।

@Soft_Lion No no, Mulayom ji, I don’t agree with you. You see, @Official_kalam is people’s president, just like I am people’s Chief Minister. 

@DialMforMamta जन्ता के इए ई तो हम भी काम कअ अहें एं। हम सभी जन्ता के इए ई तो एं।

@DialMforMamta Telling @Soft_Lion such thing would not work. Don’t worry I have plan-B and if needed, I have Plan-C and Plan-D too. I am all for a Virat president.

Rashid Alvi @Ra.Shid
@Swamy39  Do whatever, you want to do but our pirdhanmantri is honest and he will not resign for coal scam. @DialMforMamta

@Ra.Shid We are talking about presidential election. First see what the subject is. Don’t behave like congi reptiles. @DialMforMamta

@Ra.Shid  Rosheed ji, please don’t tag me in your tweets. I don’t want to see a congressi on my TL. @Swamy39

@Swamy39 ई जोमुलायम सिन्ह जी किये हैं आ ऊ बिल्कुल ठीक किये हैं आ देश को सेकुलर प्रेसिडेन्ट . का जरूरत है। 
@Law-Lu-P  Lalu ji, I knew you would oppose me. You opposed me even when I was railways minister. Nothing new in it. @swamy39

@DialMforMamta  Don’t waste your energy by replying these people. I will soon come up with Plan-D.

Lalu Prasad  @Law-Lu-P @Swamy39  कह त आइसा रहे हैं जईसे कम्प्लान-डी है कि बाज़ार से खरीद लाये आ दे दिए दीदी को. @DialMforMamta
@Law-Lu-P  Oiisa hi somajhiye Lalu ji. Game is not over yet. @Swamy39

@DialMforMamta  देखेंगे ठाकुर केतना बार कहे कि नाऊ. ऊ हमरे बिहार में एगो किहनी है? ऊ बोले जजमान आगे ही गिरेगा आ गिन लीजिये। @Swamy39 @pranab_M
@Law-Lu-P  Please don’t tag me in your tweets Lalu ji. I have great regard for you but I am now a presidential candidate.@DialMforMamta @swamy39

A P J Abdul Kalam @official_kalam
@DialMforMamta  I believe, now this discussion is useless. I have decided not to contest. Now, repeat this three times with me; “I will not contest. I will not contest. I will not contest.” @swamy39 @Law-Lu-P

@DialMforMamta Mamta ji, now that @official_kalam has decided to not contest, may I request you to support me? @Swamy39

Mamta Banerjee @DialMforMamta
@Poor_No_S  First you should try get support of your party NCP then you ask for our support. @Swamy39

@Poor_No_S    After seeing such huge support for me, you still want to contest? I think, you will not get even 8% of total votes. @Swamy39 @DialMforMamta  

@pranab_M   Dada, I have great regards for u but y fixation with this figure of 8%? You are now presi candidate & not FM. @Swamy39 @DialMforMamta

@Poor_No_S  I have put all the evidences in public domain against @pranab_M. We demand a thorough enquiry into allegation of corruption. @Swamy39 @DialMforMamta

@Kejriwal_Arvind    This is ‘robbish’. I deny all charges. After this denial, there is no need for any enquiry. Post of president is supreme. @Swamy39 @DialMforMamta

@pranab_M   But how will our democracy survive without constituting an enquiry? @Swamy39 @DialMforMamta

@Kejriwal_Arvind  Democracy is also about presidential election. President is supreme. @Swamy39 @DialMforMamta

@pranab_M  First you said parliament is supreme. Now you say president is supreme. First decide who is supreme. @Swamy39 @DialMforMamta

@Kejriwal_Arvind   भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई में व्यक्तिगत आक्षेप करना उचित नहीं है। @Swamy39 @DialMforMamta @pranab_M

Arvind Kejriwal @Kejriwal_Arvind
@Yog_Kapalbhanti  Babaji, aap kaledhan ke mudde ke baad ab is mudde par bhi bolenge? Ab kya president bhi aap hi banwayenge? @Swamy39 @pranab_M @DialMforMamta

Baba Ramdev @Yog_Kapalbhanti
@Kejriwal_Arvind  हे हे हे। हम तो योगी हैं। ...भी सिखायेंगे, राष्ट्रपति भी बनवायेंगे और देश भी बचायेंगे। योग से कुछ भी हो सकता है। @Swamy39 @pranab_M

Rajdeep Sardesai @sardesairajdeep
Politicos can be wise, let’s see who will rise, to the post of president, even so, when you get loyalty on rent. Gnite!

Tuesday, May 29, 2012

एक ट्विटर टाइम-लाइन




जिस तरह से आजकल सारे संवाद ट्विटर पर हो जाते हैं उसे देखते हुए आज सुबह सोच रहा था कि अगर ममता दी ट्विटर पर होतीं तो कल शाम को उनकी ट्विटर टाइम-लाइन कैसी दीखती? शायद कुछ इस तरह की:

टाइम लाइन पढ़ें के लिए Scribd क्लिक कीजिये.



Monday, April 16, 2012

ट्वीटपथ, ट्वीटपथ, ट्वीटपथ




एक पैरोडियात्मक ट्विटर गान बांचिये.

........................................

ट्वीट हों छोटे-बड़े
या हों ड्राफ्ट में पड़े
एक भी आर टी
मांग मत, मांग मत, मांग मत
ट्वीटपथ, ट्वीटपथ, ट्वीटपथ

होवे चाहे सुप्रभात
चाहे हो क्रिकेट की बात
ट्वीटर की हैंडल
टांग मत, टांग मत, टांग मत
ट्वीटपथ, ट्वीटपथ, ट्वीटपथ

आर टी मिले नहीं
मुख कभी खिले नहीं
ट्वीट किये चलता जा
भाग मत, भाग मत, भाग मत
ट्वीटपथ, ट्वीटपथ, ट्वीटपथ

सुबह शाम ट्वीट कर
आफिस हो चाहे घर
बैकलॉग भूल जा
जाग मत, जाग मत, जाग मत
ट्वीटपथ, ट्वीटपथ, ट्वीटपथ

फालोवर्स काऊंटिंग
प्रेशर इज माऊंटिंग
सभी को अट्रैक्ट कर
झटपट, झटपट, झटपट
ट्वीटपथ, ट्वीटपथ, ट्वीटपथ

Friday, January 6, 2012

सगी मौसी हूँ, कोई सौतेली माँ नहीं..




मैंने अपनी एक पोस्ट में लिखा था;

वह दिन भी दूर नहीं जब शादी-ब्याह के लिए माँ-बाप अपने होने वाले संबंधी से मिलेंगे तो यह कहते हुए बरामद होंगे;

"भाई साहब बुरा मत मानियेगा लेकिन इतना तो पूछना ही पड़ता है कि आपकी बेटी के ट्विटर पर फालोवर्स कितने हैं? कितने? इक्कीस सौ आठ? राजेश के तो सात सौ पैसठ ही हैं. इस मामले में आपकी बेटी मेरे बेटे से आगे है. अब क्या कहें भाई साहब, मेरा बेटा वैसे तो ट्विटर पर तीन सालों से है लेकिन फालोवर्स नहीं बढ़ रहे."

लड़की के पिताजी कहेंगे; "देखिये मेरी बेटी इस मामले में बहुत कुशल है. उसके फालोवर्स बढ़ते ही जा रहे हैं. अभी तो उसे केवल आठ महीने ही हुए ट्विटर पर लेकिन आज भगवान के आशीर्वाद से दो हज़ार से ज्यादा फालोवर्स हो गए हैं."
अब लड़की के पिताजी को क्या पता कि केवल ब्लॉगर पर ही नहीं, ट्विटर पर भी बहुत से महापुरुष ऐसे हैं जिनका इस दर्शन में विश्वास है कि;"दिल का हाल सुने दिलवाली."

मैं पार्टी-वार्टी में नहीं जाता लेकिन मुझे इस बात का पक्का विश्वास है कि अब तक लोगों ने परिचय करवाते वक़्त कहना शुरू कर दिया होगा कि; "इनसे मिलिए, ये मिस्टर शुक्ला हैं.... ट्विटर और फेसबुक पर भी हैं. अरे ट्विटर पर इनके साढ़े चार हज़ार से ज्यादा फालोवर्स हैं भाई...."

कल कल विकास गोयल जी के साथ ट्विटर पर बात हो रही थी. बातचीत इस बात पर पहुँची कि अगर फिल्म शोले आज बने तो किस तरह के सीन होंगे? आज जब जीवन में हर तरफ सोशल मीडिया छाया हुआ है? शायद डायरेक्टर ज़रूर दिखाएगा कि फिल्म के पात्र न केवल सोशल मीडिया पर हैं बल्कि कहानी भी उसी के आस-पास घूमती है. जय, वीरू, ठाकुर, गब्बर...सभी ट्विटर पर हैं और फिर सीन कैसे-कैसे हो सकते हैं.

कुछ सीन देखिये;

सीन - १


शोले का पहला सीन. जेलर साहब ट्रेन पकड़कर ठाकुर साहब से मिलने आते हैं. स्टेशन से रामलाल जी जेलर साहब को घोड़े पर बैठाकर लाते हैं.

जेलर: ठाकुर साहब, आपका डी एम मिलते ही मैंने सोचा कि आपने मुझे याद किया है. मैं ट्वीट पकड़कर नहीं आ सकता था इसलिए पहली गाड़ी पकड़कर आप से मिलने चला आया.

ठाकुर: जेलर साहब, मैं आपको एक तकलीफ देना चाहता हूँ.

जेलर: हा-हाँ कहिये. क्या ब्लड नीडेड वाली ट्वीट को री-ट्वीट करना है? या फिर हाथ के ऑपरेशन के लिए आर्थिक मदद के लिए ट्विटर पर अपील करनी है?

ठाकुर: नहीं, दूसरा काम है. मुझे दो आदमियों की जरूरत है.

जेलर : दो आदमी?

ठाकुर: रामलाल

रामलाल जी आलमारी की दराज से दो डी पी निकालते हैं. जेलर साहब डी पी को हाथ में लेकर देखते हैं.

ठाकुर: इन्हें पहचानते हैं आप?

जेलर: ठाकुर साहब, शायद ही कोई सोशल मीडिया साईट हो जिसपर ये दोनों न हों. दोनों के दोनों एक नंबर के बदमाश, पक्के चोर और छठे हुए गुंडे हैं. दोनों ने न जाने कितनी बार बड़े-बड़े ट्वीटबाजों की ट्वीट चोरी की है. दूसरों के फेसबुक स्टेटस मेसेज चुराकर अपने नाम से लगाया है. ट्विटर पर तो कई बड़े ट्वीटबाजों का मानना है कि इनकी गिनती जल्द ही दुनियाँ के सबसे बड़े ट्रोल्स में होने लगेगी.

ठाकुर: जानता हूँ लेकिन काम ही ऐसा है कि मुझे ऐसे ही आदमियों की ज़रुरत है.

जेलर: ठाकुर साहब, मुझे ये तो नहीं मालूम कि आपको क्या काम है लेकिन इतना ज़रूर कह सकता हूँ कि ये दोनों किसी काम के नहीं हैं. इनके पास तो बारह सौ से ज्यादा फालोवर्स भी नहीं हैं. ऊपर से जो फालोवर्स हैं वे जब-तब इन्हें अन-फालो कर देते हैं क्योंकि ये दोनों उनसे गाली-गलौच कर लेते हैं. वैसे भी ये पहले तो रीयल वर्ल्ड में चोरी करते थे लेकिन जबसे सोशल मीडिया साइट्स आयी हैं अब इनकी चोरियां भी केवल वर्चुवल होकर रह गई हैं. दोनों किसी काम के नहीं रहे. दिन भर ट्वीट करते रहते हैं. कभी अगर रीयल वर्ल्ड में चोरी करते भी हैं तो उसके बारे में ट्वीट पहले कर देते हैं और पकड़ लिए जाते हैं. वैसे ठाकुर साहब, आप भी तो ट्विटर पर हैं. आप इनदोनो को डी एम करके खुद भी तो अपने पास बुला सकते हैं.

ठाकुर: वो तो ठीक है जेलर साहब लेकिन मैं डी एम करूं तो इनका क्या भरोसा? उसको लेकर एक ट्वीट कर देंगे कि Tweetup with @BalDLion at Ramgarh. Tweeple around Ramgarh can also attend.

जेलर: तो मैं क्या कर सकता हूँ?

ठाकुर: अगली बार ये ट्वीट चोरी के इलज़ाम में आपकी जेल में आयें तो आप इन्हें मेरे पास लेकर आइये.

जेलर: लेकिन ठाकुर साहब, ये दोनों बड़े होशियार हैं. अपनी ट्वीट में अपना लोकेशन कभी नहीं दिखाते.


सीन - २

ठाकुर बलदेव सिंह ने जय और वीरू को डिस्ट्रिक्ट जमालपुर में ट्वीट चोरी के आरोप में पकड़ लिया है. दोनों को हथकड़ी पहना दी गई है. शाम तक ठाकुर साहब को इन दोनों को लेकर ताम्बली स्टेशन पहुंचना है. गुड्स-ट्रेन के डिब्बे में फर्श पर दोनों बैठे हैं. जय अधलेटा हो आंखें बंद किये है और और अपने चेहरे पर कैप रख ली है. सामने ठाकुर साहब एक कुर्सी पर बैठे हैं. वीरू ने थोड़ा सा उठकर ठाकुर साहब की वर्दी पर लगे बैज पर उनका नाम पढ़ा. ठाकुर बलदेव सिंह. फिर शुरू हो गया;

वीरू: थानेदार साहब आप क्या ट्विटर पर भी हैं?

ठाकुर: हाँ, हूँ. क्यों?

वीरू: हाँ, अब याद आया. तभी मैं कहूँ कि आपका नाम जाना-पहचाना लग रहा है. ये ट्विटर हैंडल @BalDLion कहीं आपका तो नहीं?

ठाकुर: हाँ, लेकिन तुम्हें कैसे पता?

वीरू जय को कोहनी मारता है.

वीरू: जय-जय, तुझे याद है जब हमने पिछली बार दौलतपुर के @LalBhaiBaniya की ट्वीट चोरी करने के प्लान की जानकारी देते हुए एडवांस में ट्वीट की थी, तो सात नम्बर पर जिसने री-ट्वीट किया था वे यही तो थे. फिर इन्होने बड़ी आसानी से हमें पकड़ लिया था. याद है वो ट्विटर हैंडल @BalDLion ? वह इन थादेदार साहब का ही हैंडल है.

जय: मुझे तो बिना रिक्वेस्ट के री-ट्वीट करने वाले हर ट्वीटर की शक्ल एक सी लगती है. सब की डीपी पर अंडा लगा रहता है.

वीरू: अब अब क्या बोलूँ, इसकी तो आदत है बक-बक करने की.

ठाकुर: कब से हो तुम ट्विटर पर? कब से दूसरों की ट्वीट चोरी कर रहे हो?

वीरू: बस समझिये थानेदार साहब कि जब पहली बार नौकरी मिली थी, तभी से ट्विटर पर हैं. तभी से ट्वीट-चोरी भी शुरू कर दी थी.

ठाकुर: लेकिन जब नौकरी मिल गई थी तो तुमने फिर ट्वीट की चोरियां करनी क्यों शुरू कर दी?

वीरू: अब क्या कहें थानेदार साहब? जिस दिन से नौकरी मिली उसी दिन लाइफ सीक्योर्ड फील होने लगी और मैंने ट्विटर अकाउंट खोल लिया. उसके बाद नौकरी के बारह बज गए और मैं केवल ट्वीट करने लगा. मालिक से पंद्रह दिन की नोटिस देकर नौकरी से निकाल दिया. बस तभी से चोरियां करने लगे हमलोग. लेकिन अब सब ठीक है. ट्वीट चोरी के धंधे में खतरा है लेकिन फिर खतरा तो आपके धंधे में भी है.

ठाकुर: क्यों हो तुम ट्विटर पर?

वीरू: वही जिसके लिए आप हैं. फेम.

ठाकुर: फेम तो मेरे पास बहुत है. मेरे पुरखे भी फेमस थे. मेरे पिताजी फेमबुक पर थे. मेरा पूरा परिवार ट्विटर पर है. मैं खुद भी ट्विटर पर हूँ. मेरा पोता फोर-स्क्वायर और लिंक्ड-इन पर है. वैसे मैं ट्विटर पर एक मकसद के लिए हूँ. मैं ट्विटर पर रहकर चोर-उचक्कों की ट्वीट पढ़ता हूँ और उन्हें पकड़ लेता हूँ. वहाँ मैं एक कॉज के लिए हूँ. शायद खतरों से खेलने का शौक है मुझे.

जय: हम भी तो रोज खतरों से खेलते हैं.

ठाकुर: फर्क है. मैं साइबर कानून की हिफाज़त के लिए खतरे मोल लेता हूँ और तुम साइबर कानून तोड़ने के लिए.

जय: और दोनों ही कामों में बहादुरी की ज़रुरत होती है.

ठाकुर: तुम अपने आपको बहुत बहादुर समझते हो?

वीरू: वक़्त आने पर साबित कर देंगे थानेदार साहब. हमदोनों एक दिन में पचास-पचास ट्वीटर की ट्वीट चोरी कर सकते हैं. गाली-फक्कड़ में हमदोनों सौ-सौ पर भारी पड़ेंगे.

सीन - ३


जय और वीरू गाँव के बाहर पत्थर के पास बैठे हैं. वीरू ने कई दिनों तक सोचा कि डी एम करके बसन्ती से प्यार का इज़हार कर दे लेकिन डी एम इसलिए नहीं कर पा रहा क्योंकि बसन्ती उसे फालो नहीं कर रही है. इस गम में वह बीयरपान किये जा रहा है. थोड़ी देर बाद जब नशा हो गया;

वीरू: जय, आज मैंने कुछ सोचा है.

जय: हा, कभी-कभी ये काम भी करना चाहिए. दिन भर ट्वीट करके ट्वीटर बोर भी तो हो जाता है. कुछ सोचकर ट्वीट करना बुरी बात नहीं. ये अलग बात है कि तेरे जैसे लोग़ ट्वीट पहले करते हैं और सोचने का काम बाद में.

वीरू: आज मैंने एक बहुत बड़ा फैसला किया है.

जय: मैं बताऊँ तेरा वो बहुत बड़ा फैसला? तू चाहता है कि बसंती को ट्वीट करके उसको फालो करने के लिए बोलेगा.

वीरू: अरे वाह यार. तू मेरा सच्चा यार है. एक यार ही यार के दिल की बात जान सकता है.

जय: और वो यार यह भी जानता है कि इस साल किसी लड़की को फालो करने का रिक्वेस्ट वाली ट्वीट करने का ये तेरा आठवां फैसला है.

वीरू: ये फाइनल है यार.

जय: फाइनल है? सुबह से बीयर पी रहा है न.

वीरू: यार पार्टनर, मेरा एक काम करेगा?

जय: क्या?

वीरू: वो बसन्ती की मौसी है न. उससे जाकर कह कि वो बसन्ती से कहे कि बसन्ती मुझे फालो करे.

जय: मैं क्यों करूं ऐसा? मौसी से कहना ही होगा तो मैं उससे कहूँगा कि वह बसन्ती से मुझे फालो करने के लिए कहे. तुझे क्यों?

वीरू: समझा. तू मेरा दोस्त नहीं है. लानत है ऐसी दोस्ती पर. इसीलिए अकड़ रहा है न कि मेरा तेरे सिवाय और कोई नहीं? तू नहीं चाहता कि बसन्ती मुझे फालो करे. तू नहीं चाहता कि मैं उसे डी एम करके उससे प्यार का इज़हार करूं. आज ट्विटर पर मेरी माँ होती तो वह बसन्ती की फालोवर बनकर उसके साथ दोस्ती करके उससे मुझे फालो करने को कहती. मेरे बाप से मैंने कितनी बार कहा कि ऑर्कुट छोड़कर ट्विटर पर ट्विटर पर आ जाए क्योंकि अब ऑर्कुट आउट-डेटेड हो गया है लेकिन वो सुने तब तो. मेरे भाई बहन होते....तू नहीं चाहता कि बसन्ती मेरी हो. समझ गया...

जय: स्साला, घड़ी-घड़ी ड्रामा करता है. ठीक है ठीक है. मैं मौसी से बात करूँगा.

सीन - ४

जय मौसी से बात करने गया है. दोनों आमने-सामने बैठे हैं. बातचीत शुरू हुई.

मौसी: अरे बेटा, बस इतना समझ लो कि ट्विटर पर जवान बेटी सीने पर पत्थर के शिल की तरह होती है. एक बार बसंती का फालोवर्स काउंट दस हज़ार क्रॉस करे तो चैन की सांस लूँ.

जय: हाँ, सच कहा मौसी आपने. बड़ा बोझ है आप पर.

मौसी: लेकिन बेटा इस बोझ को कोई इंटरनेट के कुएं में तो फेंक नहीं देता. बुरा नहीं मानना. इतना तो पूछना ही पड़ता है कि लड़का ट्विटर पर कितना फेमस है? फालोवर्स कितने हैं?

जय: अब फालोवर्स का तो ये रहा मौसी कि एक बार बसन्ती फालो करने लगेगी तो बसन्ती के हजारों फालोवर्स इसके भी फालोवर्स बन जायेंगे.

मौसी: तो क्या अभी एक भी फालोवर नहीं है?

जय: नहीं-नहीं ये मैंने कब कहा मौसी? फालोवर्स हैं. लेकिन अब रोज-रोज तो फालोवर्स नहीं मिल सकते न. फालोवर्स तो उसके बारह सौ के आस-पास हैं लेकिन उनमें से ज्यादाटर ट्रोल्स हैं. अमेरिका के ट्रोल्स ज्यादा हैं.

मौसी: तो क्या इंडिया वाले बिलकुल भी फालो नहीं करते?

जय: ये मैंने कब कहा. करते हैं इंडिया वाले भी फालो करते हैं लेकिन क्या है मौसी कि एक बार वीरू गाली-गलौच पर उतर आता है तो फिर कईलोग़ एक साथ अनफालो भी कर देते हैं.

मौसी: गाली-गलौच पर उतर आता है? तो क्या गाली भी देता है.

जय: नहीं-नहीं मौसी वो तो बहुत ही अच्छा और नेक लड़का है. लेकिन मौसी एक बार शराब पी ले न फिर अच्छे-बुरे का कहाँ होश? किसी ने उसके साथ किसी मुद्दे पर ट्वीटबाज़ी शुरू कर दी तो वह भी नशे में गाली-गलौच शुरू कर देता है.

मौसी: आय-हाय, तो क्या शराब भी पीता है?

जय: अरे तो शराब कौन नहीं पीता मौसी? शराब तो बड़े-बड़े ट्वीटर पीते हैं. कईयों ने तो अपने डी पी में शराब की बोतल भी लगा रखी है. कई तो दारु पीते हुए ट्वीट करके बताते हैं कि उन्होंने कितने पेग पी ली है. अब शराब के नशे में अगर वो गाली-गलौच शुरू कर दे तो इसमें बेचारे वीरू का क्या दोष?

मौसी: ठीक कहते हो बेटा. शराबी हो, गाली-गलौच करे लेकिन इसमें उसका कोई दोष नहीं.

जय: मौसी आप तो मेरे दोस्त को गलत समझ रही हैं. वो तो इतना सीधा है और भोला है. अरे बसंती से उसको फालो करने के लिए कहकर तो देखिये. बसंती फालो करने लगेगी तो गाली-गलौच और शराब की आदत तो दो दिन में छूट जायेगी.

मौसी: अरे बेटा, मुझ बुढ़िया को समझा रहे हो? ये शराब और गाली-गलौच की आदत किसी की छूटी है आजतक?

जय: मौसी आप मेरा विश्वास कीजिये वीरू इस तरह का लड़का नहीं है. बसंती उसे फालो करने लगेगी तो वह दूसरी लड़कियों को डी एम भेजना बंद कर देगा. जवाब न मिलने का फ्रस्ट्रेशन नहीं रहेगा तो शराब वगैरह ऐसे ही छूट जायेगी.

मौसी: आय-हाय तो बस यही एक कमी रह गई थी? तो क्या और लड़कियों को भी डी एम भेजता है?

जय: लड़कियों को डी एम भेजने की कोशिश कौन नहीं करता मौसी? बड़े-बड़े ट्वीटर लड़कियों को डी एम भेजते हैं. खानदानी लोग़ भेजते हैं.

मौसी: तो बेटा ये भी बताते जाओ कि तुम्हारे ये दोस्त हैं किस खानदान के?

जय: बहुत बड़े खानदान के हैं मौसी. वीरू के पिताजी भी ऑर्कुट पर हैं.

मौसी: तो तुम चाहते हो कि बसन्ती ऐसे लड़के को फालो करे जिसके पिताजी आजतक ऑर्कुट पर हैं? एक बात कान खोलकर सुन लो. भले ही बसन्ती का फालोवर्स काउंट दो साल बाद दस हज़ार क्रॉस करे लेकिन मैंने उससे ऐसे लड़के को फालो करने के लिए नहीं कहूँगी जिसका बाप अभी तक ऑर्कुट पर है. सगी मौसी हूँ, कोई सौतेली माँ नहीं.

जय : अजीब बात है. मेरे इतना समझाने पर भी आपने ना कर दिया. बेचारा वीरू, न जाने क्या करेगा?