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Saturday, September 10, 2016

ट्विटर चरित्र




सेलेब, नेता,
औ अभिनेता,
बाक़ी जनता
सबकी क्षमता
ट्वीट बजायें
अपनी गायें
पानी आग
सब में राग
अजब प्रोफ़ाइल
मीटर माइल
टू-इन-वन है
भारी फन है
नर मादा है
कम ज़्यादा है
ट्रेंडवीर हैं
पर अधीर है
पालक-बालक
पार्टी चालक
हैशटैग है
कैशबैग है
म्यूट ब्लॉक है
अजब क्लॉक है
आउटरेजित
हरदम ब्लेज़ित
बहस रेल की
और खेल की
आपटार्ड की
राशनकार्ड की
यहाँ बिहारी
वहाँ पहाड़ी
इधर का रिक्शा
उधर की गाड़ी
फ़ोटोशॉपर
ज़रा नहीं डर
लिंकित मन है
क्विंटल टन है
पानी-दाना
हाँ हाँ ना ना
इल्लॉजिक है
पर ब्लू-टिक है
सेक्युलर कम्यूनल
मिले नहीं कल
बहते हैं नल
गहरा दलदल
भारी डेटा
बेटी-बेटा
सीएम पीएम
मेसेज डीएम
कर एक्स्पोज़े
उत्तर खोजे
राष्ट्रवाद है
पर विवाद है
सभी सख़्त हैं
टार्ड भक्त है
बेटा-माँ हैं
संजय झा है
सच सवाल है
मगर ट्रोल है
लेम जोक है
अजब ब्लोक है
आरटी दे दो
मेन्शन ले लो
उड़ता तीर
ले ले वीर
मारो स्लाई
लो रिप्लाई
बायो पढ़ लो
छवियाँ गढ़ लो
पिक-एनलार्ज
करता चार्ज
फ़्रेंड ज़ोन
फ़ॉरएवर अलोन
सॉलिड कंधा
रजनीगंधा
नेता फ़ैन
लड़ाए नैन
खाने की पिक
देती है किक
भाषा क्लिश्टम
ईको-सिस्टम
पढ़ा-लिखा है
ज्ञान-शिखा है
बड़ा है पंडित
महिमामंडित
फालोवर से
नारी-नर से
सबको भय हो
उनकी जय हो।



यूपी में चुनाव लीला




नारे घटिया,
अच्छी खटिया,
टूटी कुर्सी,
मातमपुर्सी,
सपा, भाजपा,
कांग्रेस, बसपा
राहुल भ्राता
सोनिया माता,
चचा मुलायम,
माया क़ायम,
क़ाबिल शीला
नेता ढीला,
गंवई ढाबा,
राहुल बाबा
बस पदयात्रा,
टूटी मात्रा,
चक्कू छूरी
सब्ज़ी पूरी
बड़ा समर्थन
लाएगा धन
मथुरा, क़ाबा
सूफ़ी, बाबा
'अमर' हैं आज़म
भारी है ग़म
बने धुरी हैं
रामपुरी हैं
क्षत्रिय, ब्राह्मण
खुला हुआ रण
यादव, क़ुर्मी
भारी गर्मी
केवट, मौर्या
एक दिनचर्या
रामगोपाला
या शिवपाला
कहे भतीजा
यही नतीजा
धोती सूखी
कुर्ता भीजा
कहे लोपकी
लेकर झपकी
आँख दिखाओ
सब फल पाओ
सेब, मुसम्मी,
खीरा, केला,
जेबा ख़ाली
नहीं अधेला
नेता की जय
वोटर में भय
अमित शाह की
एक चाह की
टूटें सब दल
मिले तभी कल
प्रतिक्रिया हो
अनुप्रिया हो
दिखे न एका
दुखी मनेका
हुआ चहेटा
घायल बेटा
चाय ईरानी
पीये नानी
प्रेश्या-रण में
सबकुछ पण में
नाव एक हो
सोच नेक हो
यूपी भर की
तरकश शर की
जय कृपान की
राष्ट्रगान की

Sunday, March 20, 2016

बहुत किया अपमान......




बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।
करो चंद एहसान तुम्हारी ऐसी-तैसी

फोड़ रहे हैं बम आतंकी
आज कच्छ, कल बाराबंकी
गाते शांति-गान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

स्वामी की बातें ना खोखली,
लिए फिरे हैं मूसल-ओखली,
कांगरेस दें ध्यान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

मोदी जी भी अडे हुए है,
रस्ता रोके खड़े हुए हैं,
पप्पू ले पहचान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

लालू पुत्र कहे सुन बापू,
बनवा दें पटना को टापू?,
दिखें नहीं इंसान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

राम गुहा से बोले मोदी,
सूफी था इब्राहिम लोदी,
खूब किया था दान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

राजदीप से बोली बरखा,
चले न्यूज का उल्टा चरखा,
बेचों बस ईमान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

येचुरी बोले सुनो कन्हैया,
हमसब की बस एक ही मैया,
सुन लो देकर कान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

कहें मुलायम; चओ सैफई,
हएं तुमौ जो साधन देई,
नाचेगा सलमान, तुम्हारी
ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

लिबरल सेक्युलर बिके हुए हैं,
नेहरू युग से टिके हुए हैं,
देश रहा पहचान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

मदर थी कल, अब संत हो गई,
जैसे आदि-अनंत हो गई,
हुई बड़ी दूकान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

हरिश्चंद्र का बापू कजरी,
खाये खीर बताये बजरी,
दिल्ली का नुकशान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

अरनबवा खाली चिल्लाता,
रोज रात को ढोल बजाता,
खुद को कहे महान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

प्रेष्याओं का हमला भारी,
रातें हैं अब लंबी कारी,
खबर हुआ अनुमान तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

मन की बातें मोदी करते,
भासन से तकलीफें हरते,
भासन ही पहचान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

जे एन यू से क्रांति बही है,
प्रेष्या बोलें यही सही है,
नक्सलियों का ज्ञान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

देशी भोजन नहीं सोहाये,
सारा भारत पिज़्ज़ा खाये,
इटालियन पकवान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

बिजनेसमैन हुए सब बाबा,
लेकर सिर पर फिरते झाबा,
बेंच रहे लोहबान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

चुप हैं अब इशरत के पप्पा,
थक गए करके लारा-लप्पा,
भारत भरे लगान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

मोर्टगेज करके कैलेंडर,
माल्या भागा अरबों लेकर,
बैंक भये परेशान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

भारतमाता की जय काहे?
पूछे वह अधिकार जो चाहे,
नफ़रत का सामान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

जिसने बाँटा था बिहार को,
साथ उसी के हैं निहार लो,
सबकुछ है आसान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

राज्यसभा क्यों नहीं चल रही?
वर्किंग काहे रोज टल रही
पूछ रहे नादान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

खेलें सब वाटरलेस होली,
निज कल्चर की उठा के डोली,
सेक्युलर यह फरमान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

ट्विटर, फेसबुक रखे बिंझाये,
और नए क्या साधन लायें,
बस इसपर संधान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

देशों को भी ट्वाय कर दिया,
मिडिल-ईस्ट डिस्ट्रॉय कर दिया,
अमेरिकन अनुदान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

लास्ट वर्ड्स हैं पत्रकार के,
कुछ भी कह दें बिन अधार के,
बने फिरें भगवान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

भारत स्वच्छ बनेगा कैसे,
जबतक बरधे, पंडवा, भैंसे,
खाकर थूकें पान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

भ्रष्टाचारी नदी बहाया,
स्वच्छ हुआ जो कोयला खाया,
कर जमुना-स्नान तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।

देशबंधु की त्रिया प्रियंका,
गुरुवर पीटें डेली डंका,
हैं ब्राह्मण अभिमान तुम्हारी ऐसी-तैसी
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।


करो चंद एहसान तुम्हारी ऐसी-तैसी,
बहुत किया अपमान तुम्हारी ऐसी-तैसी।