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Friday, June 30, 2017

कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण और अर्जुन





कुरुक्षेत्र में दोनों ओर की सेनाओं के बीच अर्जुन का रथ खड़ा था। उनके सारथी श्रीकृष्ण उन्हें उपदेश दे रहे थे। महापुरुष, योद्धा, अश्व, गज, गदा, धनुष, कृपाण इत्यादि युद्ध आरंभ होने की प्रतीक्षा में बोर हो रहे थे।प्रतीक्षा करते-करते अर्जुन के गांडीव को भी झपकी आ गई थी।

उधर केशव बोले जा रहे थे; ....हे पार्थ, प्रश्न अपने-पराये का नहीं अपितु प्रश्न धर्म और अधर्म का है। तुम किनके लिए चिंतित हो? वे जो हमेशा अधर्म की राह पर चलते रहे? ....और हे पार्थ, यह कदापि न सोचो कि तुम उन्हें मारोगे। ...स्मरण रहे कि आत्मा न जन्म लेती है और न ही मरती है। आत्मा अजर-अमर है...जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है, जो हो चुका है वह भी अच्छा था और जो होगा वह भी अच्छा ही होगा। ....हे पार्थ, अपने मन पर विजय प्राप्त करो। ...कर्म करो पार्थ और फल की चिंता न करो। ...जीवन वर्तमान में है। ...परिवर्तन इस संसार का नियम है कौन्तेय, परिवर्तन और मृत्यु ही सत्य है...हे पार्थ भय और चिंता से मुक्ति पाने का एक मात्र साधन है धर्ममार्ग पर चलना। ...इसलिए हे पार्थ, आगे बढ़ो और धर्म का पालन करो। ...

बोलते-बोलते केशव रुक गए। उन्हें लगा कि वे पर्याप्त बोल चुके हैं और अर्जुन अब युद्ध आरंभ कर देंगे।

अर्जुन की ओर से कोई प्रतिक्रिया न होने पर केशव ने पूछा; पार्थ, क्या अब भी तुम दुविधाओं से घिरे हो? क्या तुम्हारे मन में अब भी कोई प्रश्न है?

अर्जुन ने सिर हिलाते हुए कहा; हे केशव मेरे मन में अब भी एक प्रश्न है।

केशव ने पूछा; कौन सा प्रश्न?

अर्जुन बोले; हे केशव प्रश्न यह है कि, आज अगर महात्मा गांधी होते तो वे क्या कहते?

केशव माथे पर हाथ रखकर बैठ गए।

Wednesday, October 12, 2016

हुआ सर्जिकल...







हुआ सर्जिकल
मिला हमें बल
भौंके नेता
उन्हें नहीं कल
सैनिक मरता
रक्षा करता
पर लीडर जो
पॉकेट भरता
जब भी बोले
शबद न तोले
राष्ट्र-वायु में
बस विष घोले
मुँह की बोली
गन की गोली
जिसने दाग़ी
उसकी हो ली
उधर है पप्पू
इधर है लप्पू
रेत का दरिया
चलता चप्पू
कथन नाव है
इक चुनाव है
उठता क़ुरता
दिखा ताव है
हरिशचंद्र है
बुद्धि मंद है
इक मीरजाफ़र
इक जयचंद है
टीवी चैनल
बड़का पैनल
बातें बहती
खुला ज्ञान-नल
इनका दावा
उनका लावा
एक दारा तो
एक रंधावा
अजब चाल है
बस बवाल है
सच्चाई की
खिंचे खाल है
रक्त-दलाली
उसने पा ली
मुझे चांस कब?
कॉफ़र ख़ाली
फ़िल्म धुरी है
ओम पुरी है
उधर फ़वाद तो
इधर उरी है
पाक़ी ऐक्टर
नारी या नर
साथी सच के
अल्ला से डर
हे नर जोहर
अति तो न कर
यह भारत ही
है तेरा घर
बीइंग ह्यूमन
खोल गया मन
किधर खड़ा है
देखें जन-जन
बी सी सी आइ
बिग ऐपल पाइ
मेरा हिस्सा;
मुझको दे भाइ
तुम हो फेकर
मैं हूँ चेकर
मैं जज भी हूँ
मैं ही क्रिकेटर
पुस्तक बल है
भारी छल है
डूबी औरत
गहरा जल है
सारे हैं नत
सबकुछ शरियत
जेंडर वाइस
मर्द हैं एकमत
धर्म बड़ा है
शेख अड़ा है
जो लोटा है
कहे; घड़ा है
यही जाप सब
घुले ताप सब
मिटे धरा के
आज पाप सब
इस नौ राता
दुर्गा माता
जोड़ें सबका
बुद्धि से नाता


Saturday, September 10, 2016

ट्विटर चरित्र




सेलेब, नेता,
औ अभिनेता,
बाक़ी जनता
सबकी क्षमता
ट्वीट बजायें
अपनी गायें
पानी आग
सब में राग
अजब प्रोफ़ाइल
मीटर माइल
टू-इन-वन है
भारी फन है
नर मादा है
कम ज़्यादा है
ट्रेंडवीर हैं
पर अधीर है
पालक-बालक
पार्टी चालक
हैशटैग है
कैशबैग है
म्यूट ब्लॉक है
अजब क्लॉक है
आउटरेजित
हरदम ब्लेज़ित
बहस रेल की
और खेल की
आपटार्ड की
राशनकार्ड की
यहाँ बिहारी
वहाँ पहाड़ी
इधर का रिक्शा
उधर की गाड़ी
फ़ोटोशॉपर
ज़रा नहीं डर
लिंकित मन है
क्विंटल टन है
पानी-दाना
हाँ हाँ ना ना
इल्लॉजिक है
पर ब्लू-टिक है
सेक्युलर कम्यूनल
मिले नहीं कल
बहते हैं नल
गहरा दलदल
भारी डेटा
बेटी-बेटा
सीएम पीएम
मेसेज डीएम
कर एक्स्पोज़े
उत्तर खोजे
राष्ट्रवाद है
पर विवाद है
सभी सख़्त हैं
टार्ड भक्त है
बेटा-माँ हैं
संजय झा है
सच सवाल है
मगर ट्रोल है
लेम जोक है
अजब ब्लोक है
आरटी दे दो
मेन्शन ले लो
उड़ता तीर
ले ले वीर
मारो स्लाई
लो रिप्लाई
बायो पढ़ लो
छवियाँ गढ़ लो
पिक-एनलार्ज
करता चार्ज
फ़्रेंड ज़ोन
फ़ॉरएवर अलोन
सॉलिड कंधा
रजनीगंधा
नेता फ़ैन
लड़ाए नैन
खाने की पिक
देती है किक
भाषा क्लिश्टम
ईको-सिस्टम
पढ़ा-लिखा है
ज्ञान-शिखा है
बड़ा है पंडित
महिमामंडित
फालोवर से
नारी-नर से
सबको भय हो
उनकी जय हो।