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Thursday, October 18, 2007

दिल्ली में दुर्गा-पूजा पर मार्क्स, लेनिन और सीपीएम


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शिव कुमार मिश्र ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा-पूजा पर साम्यवादी दल द्वारा पूजा उत्सव में शरीक होने का वर्णन किया है। ऐसा ही दिल्ली में होने जा रहा है।

बिजनेस स्टेण्डर्ड ने कल एक न्यूज आइटम में लिखा है कि दिल्ली में दुर्गा पूजा के दौरान चीन के सामान - टॉर्च से ले कर जलशोधकों (वाटर प्यूरीफायर) तक की स्टॉलें लगेंगी। उनमें पूजा छूट भी उपलब्ध होगी। "मार्क्स और लेनिन दुर्गा के दरवाजे पर आयेंगे"। यही नहीं कम्यूनिष्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के किताब के स्टोर भी लगेंगे पूजा पण्डालों में|

Marx

ऐसे एक स्टोर का उद्घाटन चित्तरंजन पार्क दुर्गा-पूजा मेला ग्राउण्ड में 17 अक्तूबर को बृन्दा कारत करेंगी (यानी कर चुकी होंगी)। वे सीपीएम की अकेली पॉलितब्यूरो मेम्बर हैं जो दिल्ली में रहेंगी। ये स्टॉल लाल रंग में रंगे होंगे। ऐसे चार स्टॉल प्लॉन किये हैं पार्टी ने दिल्ली में।

"दास केपीटल" कैपेटल में आ रहा है - पूजा पण्डालों में!


12 comments:

  1. चलिये अब हमें बंगाल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

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  2. सही है-दिल्ली वाले दुर्गा पूज में चीन का आनन्द उठायेंगे. अगर उनका राज हो जाये तो पूरा भारत उठाये.

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  3. सही है जी नेता लोग सता के लिए जो करें वो कम है।

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  4. यही तो बात है। राजनीति भले ही चंद सालों में बदल जाए, लेकिन संस्कृति को बदलने में युगों लग जाते हैं। राजनीति लोहार का हथौडा है तो संस्कृति सुनार की महीन कमानी...

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  5. क्यों कुठाव पर मार रहे हैं.....बहुत लगेगी.....

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  6. संजय बेंगाणीOctober 18, 2007 at 9:44 AM

    सोचता हूँ, अमरीका से देश को खतरा है, तो क्या चीनी सामानों से भारतीय उद्योग खतरे में नहीं है? कहाँ है वामपंथी? जवाब दें.

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  7. चीन के साम्राज्यवाद को लेकर आपको चिन्ता हो सकती है। हमारे कामरेड तो हमेशा इसका स्वागत करते हैं!

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  8. वास्‍तव में इसे भारत में कम्‍युनिज्‍म की पराजय के रूप में देखा जाना चाहिए। धर्म को अफीम मानने वाले कम्‍युनिस्‍ट लगातार अपनी भूलें सुधार रहे है। कम्‍युनिस्‍टों ने गांधी को पूंजीपतियों का एजेंट कहा, सुभाष चन्‍द्र बोस को तोजो का कुत्‍त्ता, जयप्रकाश नारायण को बुर्जुआ का दलाल। अब मजबूरी में इन सभी को अपना आदर्श मानने में लगे है। इन्‍होंने देख लिया है कि 85 साल के बाद भी जनता कम्‍युनिज्‍म की विचारधारा को स्‍वीकार नहीं कर रही है। अब ये वन्‍दे मातरम के नारे भी लगा रहे है और राष्ट्रवाद की बात भी कर रहे है। लेकिन यह समझना भारी भूल होगी कि वे बदल गए है। यह इनका छदम रूप है। समय आने पर ये अपने राष्ट्रविरोधी आदतों से बाज नहीं आएंगे।

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  9. चार वोट और नोट कमाने के लिए कुछ इधर-उधर करना पड़ जाये, तो काहे परेशान करते हैं। किस को कमाने-खाने देंगे या नहीं।

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  10. राजनीति मे सब जायज़ है!!

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  11. कम्युनिस्टों का गीत
    "दुर्गा मैय्या लाल सलाम
    माओ का बस लेकर नाम
    देख सुबह की लाली को हम
    कहते हैं लो आयी शाम "

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टिप्पणी के लिये अग्रिम धन्यवाद। --- शिवकुमार मिश्र-ज्ञानदत्त पाण्डेय