सचिन फिर से शतक नहीं बना सके. कितने महीने बीत गए, एक शतक के लिए देश भर को तड़पा रहे हैं. देश के आधे लोगों की तड़प देखकर बाकी आधे तड़प रहे हैं. टीवी वाले सबसे ज्यादा दुखी दिख रहे हैं. धंधा ठीक ही चल रहा है लेकिन देश के लोगों के दुःख में शरीक हैं, ये भी दिखाना है, सो कैमरे पर आंखें दुखी हैं और माइक पर आवाज.
इन ज्योतिषियों की बातें सुनकर लगा कि सब कुछ बड़ा सरल है. क्या जरूरत है बैटिंग की प्रैक्टिस की. क्या जरूरत है मेहनत करने की. चांदी की गिलास, चांदी का बुरादा, शहर की नदी ही काफ़ी है.
बड़े शर्म की बात है कि अभी तक किसी शहर में यज्ञ नहीं हुआ. किसी ने न तो सिद्धि विनायक मन्दिर में पूजा अर्चना की, न ही विश्वनाथ मन्दिर में. कालीघाट में पूजा अर्चना का चांस भी जाता रहा. कलकत्ते की आम जनता बुद्धिजीवियों के साथ मिलकर नंदीग्राम पर दुखी है. काकेश जी का दुखाशास्त्र एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने जा रहा है. मेरे पड़ोस में कुछ लोगों ने पूजा करवाने की बात सोची लेकिन दीवाली की वजह से पंडित नहीं मिले. अब कह रहे थे कि अगर टेस्ट मैच में शतक नहीं लगा पाये तो फिर पूजा अर्चना की बात होगी.
कोशिश के नाम पर केवल टीवी वालों ने ही मुंह पीट कर लाल कर लिया. एक चैनल पर देखा. ज्योतिषियों की भीड़ लगी थी. एक ने बताया; "देखिये, उनका चंद्र ठीक से ड्यूटी नहीं कर रहा है. उन्हें अपने चन्द्र के बारे में कुछ करना पडेगा."
टीवी चैनल के एंकर ने पूछा; "क्या लगता है आपको? सचिन को क्या करना चाहिए कि उनका चन्द्र ठीक से ड्यूटी पर आ जाए."
ज्योतिषी ने जवाब दिया; "उन्हें चांदी के गिलास में पानी पीना चाहिए. रात को चन्द्रमा को निहारना चाहिए. बैटिंग करने से पहले अगर वे चांदी का बुरादा पिच पर छिड़कें तो शतक बन जायेगा."
मैंने सोचा ऐसा सचिन कर सकते हैं. लेकिन कहीं ऐसा न हो कि क्रिकेट की 'गवर्निंग बाडी' आई सी सी उन्हें पिच की कंडीशन बदलने को लेकर सजा न सुना दें. अगर शतक बन भी जाए तो आई सी सी उस शतक को रेकॉर्ड बुक में जाने से ही रोक दे. मैच फीस की कटौती ऊपर से. सचिन भी सोचेंगे कि चांदी का बुरादा खरीदने में पैसे खर्च हो गए, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला.
एक और ज्योतिषी को देखा. बोले असल में समस्या चन्द्र की नहीं है. ये सारा कुछ मंगल का किया धरा है. सचिन का मंगल उनके लिए अमंगल पैदा कर रहा है. बोल रहे थे कि नौ की संख्या का रिमोट मंगल के हाथ में रहता है इसलिए शतक बन नहीं पा रहा. नब्बे और निन्यानवे के बीच सब कुछ रह जाता है. मुझे लगा इससे पहले भी तो सचिन ने इतने शतक लागाये हैं, तो क्या उस समय ये मंगल रिमोट कहीं रखकर भूल गया था क्या. एक ज्योतिषी ने तो समाधान बताया कि जिस शहर में खेलने जाएँ, वहाँ बह रही नदी में एक गिलास पानी सुबह-सुबह डाल दें, शतक बन जायेगा. इन ज्योतिषियों की बातें सुनकर लगा कि सब कुछ बड़ा सरल है. क्या जरूरत है बैटिंग की प्रैक्टिस की. क्या जरूरत है मेहनत करने की. चांदी की गिलास, चांदी का बुरादा, शहर की नदी ही काफ़ी है.
सोचते-सोचते मुझे एक खबरिया चैनल पर राशिफल बताने वाली एक महिला की बात याद आ गई. किसी राशि के लोगों के लिए दिन कैसे जायेगा, बताते हुए इस महिला ज्योतिष ने कहा था; "आप काली गाय को आज सबेरे-सबेरे पालक खिलाईये. और पालक खिलाते समय ध्यान रहे, कि आपने हरे रंग की शर्ट पहनी हो." मुझे लगा जुलाई महीने में इतनी भयानक बरसात होती है. ऐसे मौसम में पालक किसान तो क्या किसान का बाप भी नहीं उगा सकेगा. और फिर अगर कोई शहर में रहता हो और काली गाय खोजने निकल पड़े तो शायद घंटों का समय बरबाद हो जाए. आफिस में अब्सेंट लगेगा सो अलग. उस बेचारे का दिन तो ऐसे ही ख़त्म.
वैसे सचिन के लिए सबसे बढ़िया सुझाव उनके पुत्र ने दिया. बोला; "क्या जरूरत है आउट होने की. जब चौरानवे पर पहुँचें, तो एक छक्का लगा दें, झमेला खत्म." ये हुई न बात. क्रिकेटर का बेटा क्रिकेट खेलने की ही सलाह देगा.
वैसे आपके पास कोई सलाह हो तो जरूर बतायें. सचिन को अगर ज्योतिषी सलाह दे सकते हैं तो फिर ब्लॉगर क्यों नहीं.