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Tuesday, August 18, 2009

वाइन फ्लू - एक भविष्यात्मक (ये क्या होता है?) पोस्ट


@mishrashiv I'm reading: वाइन फ्लू - एक भविष्यात्मक (ये क्या होता है?) पोस्टTweet this (ट्वीट करें)!

शुक्रवार १८ अगस्त, २०८१

पूरा अमेरिका वाइन फ्लू से परेशान है. प्राप्त ताजा समाचारों के अनुसार कल रात लास वेगास में वाइन पीकर सत्रह लोग इस फ्लू के शिकार हो गए. अभी तक लगभग सात लाख लोग इस फ्लू के शिकार हो चुके हैं. अमेरिकी गृह मंत्रालय ने कल एक प्रस्ताव पारित करके भारत के उद्योग समूह यूनाइटेड वाइन के उत्पादों पर अमेरिका में इंट्री से रोक लगा दिया है. ज्ञात हो कि यूनाइटेड वाइन प्रख्यात वाइन उद्योगपति जयजय माल्या की कंपनी है.

अमेरिकी गृह मंत्रालय द्बारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारतीय समूह की इस कंपनी के उत्पादों को जानबूझ कर इस तरह से बनाया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी नागरिक वाइन फ्लू के शिकार हो जाएँ. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय उद्योग समूह ऐसा करके अमेरिका से बदला लेना चाहता है. विशेषज्ञों के अनुसार इस भारतीय उद्योग समूह का ऐसा मानना है कि साल २००९ में भारत में स्वाइन फ्लू एक ख़ास अमेरिकी साजिश की वजह से फैला था.

अमेरिकी विशेषज्ञों की इस सोच का आधार इस बात को माना जा रहा है कि यूनाइटेड उद्योग समूह की गिनती देशभक्त उद्योग समूह में होती आई है. ज्ञात हो कि साल २००८ में इस उद्योग समूह के तत्कालीन मालिक ने तत्कालीन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की नीलाम होने वाली वस्तुएं जैसे चश्मा, चप्पल वगैरह खरीद कर देशभक्त होने का सबूत दिया था.

भारतीय व्यापार मंत्री सुश्री डिम्पल नाथ ने अमरीकी सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के कदम विश्व व्यापार संगठन की नीतियों के खिलाफ हैं. सुश्री नाथ ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बयान जारी करते हुए कहा कि; " अमेरिकी सरकार के इस फैसले की वजह से भारत संयुक्त राष्ट्र संघ में अमेरिका की वाट लगा देगा."

ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का दबदबा दुनियाँ के तमाम देशों से ज्यादा है.

सुश्री डिम्पल नाथ ने बताया कि वाइन फ्लू पर अमेरिकी सोच एक कम्प्लेनात्मक मुद्दा हो सकता है लेकिन यूनाइटेड ग्रुप के उत्पादों पर रोक लगाकर अमरीका ने अपने लिए मुश्किलें खड़ी कर ली हैं. भारतीय व्यापर मंत्री ने यहाँ तक कहा कि अमरीका अगर अपने फैसले पर टिका रहता है तो भारत अमेरिका को दी जाने वाली सहायता राशि कम करने पर विचार करेगा.

उधर अमरीकी खुफिया एजेन्सी का मानना है कि यूनाइटेड समूह की फार्मा कंपनी प्रिवेंटिस ने पिछले वर्ष से ही वाइन फ्लू की वैक्सिन पर खोज शुरू कर दी थी. एजेन्सी का मानना है कि यूनाइटेड ग्रुप ने एक साजिश के तहत पहले वाइन फ्लू के वायरस ईजाद किये और उसके बाद अपनी ही फार्मा कंपनी से वैक्सिन बनाने के लिए कहा.

वाइन फ्लू का आतंक अमेरिका में इस तरह से छाया है कि अभी तक अमेरिकी ब्लॉग स्फीयर में लगभग तीन लाख सत्तावन हज़ार ब्लॉग पोस्ट वाइन फ्लू, उसके कारणों और उससे बचने की तमाम विधियों पर लिखी जा चुकी हैं.

ज्ञात हो कि वाइन फ्लू की बीमारी फैलने का मुख्य कारण यह है कि वाइन फ्लू से बीमार लोग और ज्यादा वाइन पीना चाहते हैं. जहाँ डॉक्टर यह चाहते हैं कि लोग वाइन पीना छोड़ दें, वहीं वाइन फ्लू से बीमार लोग और ज्यादा वाइन पीना चाहते हैं.

इधर भारत के योग गुरु स्वामी ज्ञानदेव का मानना है कि वाइन फ्लू से बचने के उपायों में सबसे बढ़िया उपाय यह है कि पीड़ित व्यक्ति को सुबह तीन चम्मच तुलसी के पत्ते का रस आंवले के पत्ते के रस में मिलाकर पीना चाहिए. बाबा ज्ञानदेव ने यह भी बताया कि उनके कारखाने में तैयार तुलसी-आंवला पत्रक रस का व्यवहार करने से सुबह-सुबह मेहनत करने से बचा जा सकता है. अमेरिकी सरकार ने बाबा ज्ञानदेव की कंपनी को दो लाख लीटर पत्रक रस का आर्डर दिया है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार बाबा ओंड इस कंपनी का मुनाफा पूरे साढ़े सात सौ प्रतिशत से बढ़ जाएगा. इस खबर के आने के बाद कंपनी के शेयर के मूल्य में कल बत्तीस प्रतिशत का उछाल देखा गया.

प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर नामक मुहावरे से प्रभावित यूरोपीय संघ की आज बैठक होने वाली है. संघ का मानना है कि यूनाइटेड वाइन के उत्पादों पर रोक लगाने की प्रक्रिया अगर पहले ही शुरू कर दी जाय तो...........

18 comments:

  1. बदला चुकायेगी वो फिर आयेगी...
    सही है..

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  2. बड़ा खतरनाक फ़्लू है भाई ये वाइन फ़्लू… जब इसका प्रकोप बहुतै बढ़ जाता है तो व्यक्ति इससे मुक्ति पाने के लिये नाली में लोट भी लगा लेता है… बेचारे गोरे साहबों को खुली नाली कहाँ मिलती है, सो वे फ़्लश में ही लोट लगा लेते हैं…। बाकी "डिम्पल नाथ" और स्वामी ज्ञानदेव की बातें दमदार हैं…

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  3. 72 साल लग गये एक चिरकुट चीज का बदला लेने में। बहुत धीमी प्रगति है बदले की !

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  4. कमाल की दूर दृष्टि है.......सत्तर साल आगे की देख ली.......चलो अच्छा ही किया ... हम कभी बदला लेने की पोजीशन में भी पहुँच सकते हैं,यह सपना कम सुखद नहीं....

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  5. किसी ने यह कह कर हंगामा खड़ा कर दिया है कि सत्तर-अस्सी साल पहले वाइन फ्लू पर "जीव कुमार मिश्र" नामक ब्लॉगर ने लिखा था. बात पहले ही पता कैसे चली इस पर खोज के लिए भारतीय जाँच एजेंसी का सहयोग माँगा जा रहा है.

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  7. आप ये पोस्ट..हिक...पिनक में लिखें हैं...हिक...भला स्वाईन को वाईन फ्लू का क्या खतरा....हिक...हम तुम को हो तो बात समझ में आती है...हिक...लेकिन...स्वाईन को...हिक...सवाल ही पैदा नहीं होता....हिक...आप समझ रहे हैं...हिक..की हम क्या कह रहे हैं...हिक...
    नीरज....

    ('हिक' वाईन पी कर मुंह से निकलने वाली ध्वनी है...ध्यान रहे)

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  8. यह फ्लू खोजने के लिये शिवकुमार जी को क्या अवार्ड दिया जाये???

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  9. सरासर अमधुर पोस्ट है। स्वामी ज्ञानदेव की कम्पनी के शेयर खरीदने के लिये समय रहते ई मेल करने की बजाय यह पोस्ट ठेलना साबित करता है कि आपको मेरे आर्थिक स्वास्थ्य के प्रति कोई लगाव नहीं! अब तो शेयर में उछाल आ गया है - अब क्या?!
    हमारा विरोध दर्ज किया जाये! :)

    शुक्रवार १८ अगस्त, २०८१

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  10. कोई बात नहीं ......... भारत में तो खपत बढ़ ही रही है .............

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  11. कृपया स्वामी ज्ञानदत्त जी को स्वामी ज्ञानदेव लिखकर आप पब्लिक में भ्रम न फ़ैलायें . हमारे स्वामी जी इस सदी के आरम्भ से ही गंगा किनारे से ब्लॉगिंग करते आ रहे हैं !-

    स्वामी ज्ञानदत्त जी का ओरिजिनल चेला विवेक सिंह
    18 अगस्त 2081

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  12. विवेक जी, तब तो हम-आप एक ही स्कूल के हुए, बल्कि सहपाठी। गुरुभाई का धर्म निभाइए और वाइन फ्लू से बचत का तरीका सिखाइए।

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  13. " gyan " is not a brand name and this post is abpout other "gyan " of hindi bloging

    shiv should have put a disclaimer to avoid the confusion !!!!!!!!!!

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  14. लगता है बेजान दारूवाला का धंधा बंद करवा कर ही मानेंगे आप ।
    मरन दो ससुरे अमरीकियों को वाइन फ्लू से । लस्सी, छाछ पीते तो ये दिन काहे को देखना पड़ता ।

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  15. bhaiya satya kah rahe hain
    ab kuchh na kuchh naya izad karne ka waqt aa gaya hai
    chahe wine flue hi kyoun na ho

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  16. bhaiya satya kah rahe hain
    ab kuchh na kuchh naya izad karne ka waqt aa gaya hai
    chahe wine flue hi kyoun na ho

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  17. ये जोरदार कही.:)

    रामराम.

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टिप्पणी के लिये अग्रिम धन्यवाद। --- शिवकुमार मिश्र-ज्ञानदत्त पाण्डेय