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Wednesday, February 24, 2010

'लाफ्टीबॉय' उर्फ़ नान्हूमल बुद्धिराज साहू


@mishrashiv I'm reading: 'लाफ्टीबॉय' उर्फ़ नान्हूमल बुद्धिराज साहूTweet this (ट्वीट करें)!

बहुत दिनों से कोशिश कर रहे थे कि उनका इंटरव्यू ले लें. बहुत दिनों की कोशिश के बाद आज वे मिले हैं. ट्वीट करने से फुर्सत ही नहीं मिलती उन्हें. वे हमेशा ट्वीट करते रहते हैं और अबतक कुल एक लाख चालीस हज़ार पांच सौ बावन...सॉरी मेरे बावन लिखते-लिखते उन्होंने तीन ट्वीट और कर दिया. तो अभी तक वे कुल एक लाख चालीस हज़ार पांच सौ पचपन ट्वीट कर चुके हैं.

खैर, मैंने बहुत कहा तब जाकर इंटरव्यू देने के लिए तैयार हुए. पहले बोले; " इंटरव्यू ट्विटर पर ही ले लो."

जब मैंने कहा कि पूरा इंटरव्यू छापने में परेशानी होगी तब जाकर तैयार हुए. जीवन का दर्शन कुल एक सौ चालीस अक्षरों में समेट देने में महारत हासिल कर लिया है इन्होने.

जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ नान्हूमल बुद्धिराज साहू की जिन्हें ट्विटर की दुनियाँ में 'लाफ्टीबॉय' के नाम से जाना जाता है. तो अब भूमिका वगैरह में उनके बारे में कितना बूंकेंगे? सीधा बात करते हैं उनसे.



शिव : नमस्कार लाफ्टीबॉय जी.

लाफ्टीबॉय : गुड मोर्निंग......हाऊ आर यू, ट्वीपल..

शिव : माफ़ कीजिये...लगता है आपको याद दिलाना पड़ेगा कि आप इस समय इंटरव्यू दे रहे हैं.

लाफ्टीबॉय : ओह ओह..सॉरी. मैं भूल गया था.

शिव : आपके कहने का मतलब क्या है? जरा विस्तार से बताएं क्या भूल गए थे?

लाफ्टीबॉय : विस्तार से बताएँगे तो १४० से ज्यादा अक्षर यूज करने पड़ेंगे न.

शिव : अरे तो कर लीजिये न. आप यहाँ ट्वीट थोड़े न कर रहे हैं. आप तो इंटरव्यू दे रहे हैं.

लाफ्टीबॉय : चलिए, आप कहते हैं तो १४० से ज्यादा अक्षर यूज कर लेते हैं. मेरे कहने का मतलब यह है कि मैं भूल गया था कि मैं इंटरव्यू दे रहा हूँ....ट्विटर इस तरह से ज़िन्दगी का हिस्सा बन गया है कि हमेशा लगता है जैसे मैं ट्वीट कर रहा हूँ.

शिव : चलिए कोई बात नहीं है. आप ये बताएं कि आप क्या करते हैं? मेरा मतलब आपका प्रोफेशन क्या है?

लाफ्टीबॉय : बहुत कठिन सवाल कर दिया आपने. अब इसका क्या जवाब दूँ? देखा जाय तो मैं खुद भूल गया हूँ कि मेरा प्रोफेशन क्या है. पहले लोग कहते थे कि मैं एक लेखक और पत्रकार हूँ. कई महीने बीत गए लोगों से अपने बारे में सुने हुए. अब तो लोग कहते हैं कि मैं केवल एक ट्वीटर हूँ. तो आप भी वही कह सकते हैं.

शिव : लगता है जैसे ट्विटर ने आपके जीवन को बहुत प्रभावित किया है.

लाफ्टीबॉय : बहुत.... देखा जाय तो ट्विटर ने....एक मिनट..एक मिनट. मैं जरा ट्वीट कर दूँ कि मैं इंटरव्यू दे रहा हूँ. जस्ट वन सेक...हाँ. अब ठीक है. क्या है कि मुझे फालो करने वाले परेशान होंगे न. सोचेंगे बिना बताये कहाँ चला गया मैं? हाँ तो मैं कह रहा था कि ट्विटर ने मेरे जीवन को बहुत प्रभावित किया. कह सकते हैं कि मेरा जीवन एक खुली किताब है अब.

शिव : हाँ, वह तो है. मैंने सुना है कि आप वाशरूम जाते हैं तो भी बताकर जाते हैं कि आप वहां जा रहे हैं?

लाफ्टीबॉय : हाँ. ज़रूरी है न. हज़ारों लोग अगर आपको फालो कर रहे हैं तो उन्हें बताना ज़रूरी है. एक तरह से उनकी भावनाओं का सम्मान करना है ये.

शिव : लेकिन सबकुछ बताने की इस आदत की वजह से नुक्सान भी तो हो सकता है.

लाफ्टीबॉय : हाँ, नुक्सान तो हो सकता है. सबसे बड़ा नुक्सान ये होगा कि इसी तरह से ट्वीट करता रहा तो मुझे अपनी बायोग्राफी लिखने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी. हा हा हा...

शिव : आपका सेन्स ऑफ़ ह्यूमर...

लाफ्टीबॉय : हाँ..मेरे फालोवर भी यही कहते हैं कि मेरा सेन्स ऑफ़ ह्यूमर अमेजिंग है..हा हा हा.

शिव : वैसे दिन में कितने घंटे ट्वीट करते हैं आप?

लाफ्टीबॉय : हा हा हा..क्या बात करते हैं आप भी? कोई घंटा गिनकर ट्वीट करता है भला? ये कोई आफिस का टाइम है जो दस से पाँच तक चलेगा?..वैसे आप जानना चाहते हैं तो जवाब यह है कि मैं हमेशा ट्वीट करता रहता हूँ.

शिव : वैसे इसकी वजह से घर वालों को परेशानी नहीं होती?

लाफ्टीबॉय : नहीं. ऐसी कोई बात नहीं है. कह सकते हैं घर वाले सपोर्टिव हैं. हाँ, कभी-कभी ऐसी घटना हो जाती है जब घरवाले नाराज़ हो जाते हैं..

शिव : ऐसी कोई घटना हुई क्या आपके साथ?

लाफ्टीबॉय : हा हा..चलिए आपको बता ही देते हैं. वो हुआ ऐसा कि पिछले महीने घर में एक रात चोर घुस आया. मैंने देखा कि वह घर में घुस आया है. मैं उसे पकड़ने जा ही रहा था कि मन में ख़याल आया कि पहले मैं ट्वीट करके अपने फालोवर को बता दूँ कि घर में चोर घुस आया है. ट्वीट करने के बाद आराम से पकडूँगा. अब इसे मेरा दुर्भाग्य कहिये कि चोर मेरे ट्वीट करते-करते सामान लेकर चम्पत हो गया. जब मैंने घरवालों को बताया तो वे नाराज़ हुए. कई दिन तक नाराज़ थे...

शिव : वैसे ये बताइए कि टेक्नालाजी ने ट्वीट करने में कितनी मदद की है आपकी?

लाफ्टीबॉय : बहुत. टेक्नालाजी का काफी विकास हो गया है. अब तो सेल फ़ोन से भी ट्वीट कर लेता हूँ. हाँ, ये बात ज़रूर है कि टेक कंपनियों को और भी बहुत कुछ करने की ज़रुरत है.

शिव : क्या-क्या विकास कर सकती हैं टेक कम्पनियाँ?

लाफ्टीबॉय : मैं अपना एक्सपीरिएंस बताता हूँ आपको. जैसे अगर मैं नहाने जा रहा हूँ तो मैं ट्वीट करके बाथरूम में घुसता हूँ कि; "गोइंग फॉर अ बाथ." लेकिन नहाते समय मैं सेल फोन यूज नहीं कर सकता. क्योंकि सेलफोन भीग जाएगा तो खराब हो जाएगा. मेरा ऐसा ख़याल है कि टेक कम्पनियां ऐसे सेलफ़ोन बनाएं जो वाटरप्रूफ हों. अगर ऐसा हो जाय तो फिर ट्विटर को एक स्टेप और ऊपर ले जाया जा सकता है.

शिव : वैसे ये बताइए कि आपतो भारत के स्टार ट्वीटर के नाम से जाने जाते हैं. आगे ट्विटर का क्या भविष्य देखते हैं? मेरा मतलब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्या और हो सकता है? उसमें आप अपनी भूमिका कहाँ देखते हैं?

लाफ्टीबॉय : बहुत कुछ किया जा सकता है. इंटरनेशनल लेवल पर बहुत कुछ किया जा सकता है. जैसे मैं मानता हूँ कि इंटरनेशनल लेवल पर एक "इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन ट्वीट मैनेजमेंट" बनाया जा सकता है जो पूरी दुनियाँ में ट्विटर को बढ़ावा देगा. मेरा सपना है कि भारत का स्टार ट्वीटर होने के नाते मैं एक दिन इस पैनल का हेड बनूँ.

शिव : और क्या-क्या किया जा सकता है ट्विटर को बढ़ावा देने के लिए?

लाफ्टीबॉय : बढ़ावा देने के लिए भी बहुत कुछ किया जा सकता है. जैसे मेरा मानना है कि नोबेल प्राइज़ कमिटी को ट्वीट के लिए भी एक नोबेल का प्रावधान करना चाहिए. बुकर पुरस्कार देने वालों को भी पुरस्कार देने से पहले ट्वीट करने वालों का लेखन भी देखना चाहिए. उसके अलावा हर देश में नेशनल और लोकल लेवल पर भी पुरस्कार होने चाहिए. जैसे नेशनल ट्वीटर ऑफ़ द इयर अवार्ड. जैसे स्टार ट्वीटर ऑफ़ द मंथ या फिर स्टार ट्वीटर ऑफ़ द वीक...कालेज और यूनिवर्सिटी को भी चाहिए कि वे बड़े ट्वीटबाजों की ट्वीट्स कोर्स की किताबों में पढ़ाएं.

शिव : आपकी कोई ट्वीट जो आपको आज भी याद हो?

लाफ्टीबॉय : वैसे तो बहुत सारी ट्वीट्स हैं लेकिन मुझे सबसे ज्यादा उस ट्वीट की याद आती है जब आइसक्रीम खाते हुए मैंने ट्वीट किया था कि; " ईटिंग आइसक्रीम..इट्स डैम कोल्ड.." आप विश्वास नहीं करेंगे कि मेरे कुल अट्ठारह सौ पांच फालोवर ने उसे री-ट्वीट किया. उसके अलावा एक और ट्वीट था..खैर जाने दीजिये..

शिव : ट्विटर से समाज को लाभ हुआ है? आपका क्या मानना है?

लाफ्टीबॉय : लाभ ही लाभ हुआ है. ट्विटर ने पिछले एक साल में समाज की दशा और दिशा चेंज कर दी है. अब लोग ज्यादा पेसेंस वाले हो गए हैं. भूख लगती है तो भी वे तुरंत खाना नहीं खाते. तुरंत नहीं खायेंगे तो अनाज बचेगा. कुछ को भूख ही नहीं लगती. कुछ को नींद ही नहीं लगती. अब आप सोचिये कि नींद नहीं लगेगी तो ट्वीट करते हुए आदमी जागता रहेगा. ऐसे चोर घर के भीतर नहीं आएगा...मैं तो कहता हूँ..

शिव : अच्छा ये बताइए कि एक ट्वीटर के तौर पर आप क्या चाहेंगे ज़िन्दगी से?

लाफ्टीबॉय : ज़िन्दगी ने ट्विटर दे दिया तो और क्या चाहिए? मैं तो यह चाहता हूँ कि मैं अपनी आखिरी सांस तक ट्वीट करता रहूं. यमराज लेने के लिए आयें तो उनसे भी कहूँ कि; बॉस, जस्ट वेट फॉर अ सेक..एक ट्वीट तो कर लूँ.....और फिर मैं अपने फालोवर्स को बताऊँ कि; "यमराज हैज कम टू टेक मी अलांग....न यू नो व्हाट, द मैन लुक्स
सो फनी...
हा हा हा...मैंने कहा था न कि मेरा सेन्स ऑफ़ ह्यूमर...

शिव : हाँ..हाँ..मै समझ गया. आपका सेन्स ऑफ़ ह्यूमर बहुत बढ़िया है. चलिए इंटरव्यू यहीं ख़त्म करते हैं..फिर कभी मौका मिला तो आप से बात होगी. नमस्कार..

लाफ्टीबॉय : ओके..ओके..गुड नाईट ट्वीपल..सॉरी सॉरी...आदत पड़ गई है...सॉरी..अच्छा नमस्कार.

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पाठकों के सूचनार्थ:

मेरे ब्लॉग के लिए इंटरव्यू लेने वाला पत्रकार बंगलूरु गया था देवेगौड़ा जी का इंटरव्यू लेने और अभी तक नहीं लौटा. मैंने उड़ती खबर सुनी है कि देवेगौड़ा जी का इंटरव्यू लेने में उसे पूरे एक दिन लगे क्योंकि वे बीच-बीच में सो जाते थे. फिर घनिष्टता कुछ ऐसी बढ़ी कि पत्रकार ने उनकी पार्टी ही ज्वाइन कर ली. यही कारण है कि लाफ्टीबॉय का इंटरव्यू मुझे खुद ही लेना पड़ा.

23 comments:

अंशुमाली रस्तोगी said...

शिवजी हर बार की तरह इस बार भी गजब।
बहुत मजेदार है यह ट्वीटर-ओरिएंटिड इंटरव्यू।

रचना said...

ha ha ha शानदार रहा आप का इंटरव्यू पता नहीं क्यूँ लगता रहा इन लाफ्टीबॉय से मिल चुकी हूँ ट्विटर पर मै हूँ नहीं ब्लॉग पर हैं क्या ?? !!! और वैसे "नीलकंठ " आप को तो विश्व फोलो करता हैं आप ना जाने कैसे कैसो से घिरे रहते हैं

नीरज मुसाफिर जाट said...

लेकिन
ट्वीट=ब्लॉग

anitakumar said...

टीवीट कर के आती हूँ कि मैं स्टार टिव्वटर के इंटरवियु पर टिपिया रही हूँ फ़िर टिपिण्णी दूंगी

संजय बेंगाणी said...

हम कच्चे खिलाड़ी नहीं है. पहले ट्वीट की थी कि किंग ऑफ ट्विट का इंटरव्यू पढ़ने जा रहे है. फिर ही पढ़ा.

वैसे लाफ्टीबॉय कच्चे निकले. इंटरव्यू खत्म हो गया और हम जैसे फोलोवर को इसकी ट्विट ही नहीं दी!


:)

ट्विट प्रेमियों को लपेटने का जोरदार जुगाड़ भिड़ाया. कहाँ से आता है आइडिया, तनिक एक ट्विट कर दें.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

एक ठो ट्विट्या लें, उसके बाद कमेन्ट देते हैं.

rashmi ravija said...

ट्विटर्स एडिक्ट की अच्छी पोल खोली है....सेन्स ऑफ ह्यूमर तो सचमुच अमेजिंग है...:)

डॉ .अनुराग said...

कमाल है कोई सम्मेलन नहीं करते ट्विटर्स वाले ?....पिछड़े हुए है लगता है

नीरज गोस्वामी said...

टवीटू टवीटू बोले टवीटरवा मिंट मिंट में बींट (जो पक्षी करते हैं)करे , ट्वीट करे...आ आ आ आ आ आ ...
ज़ोरदार इंटरव्यू...
नीरज

मनोज कुमार said...

slogan for ट्वीटर
थकना मना है
जियो जी भर के

रंजना said...

टी वी पर बेंगलोर में लगे बिल्डिंग आग के जबरदस्त फुटेज को धड़कते दिल से देख रहे थे कि तभी समाचार उद्घोषक ने बताया कि आग में फंसे लोग ट्विटर पर जो वहां का आँखों देखा हाल बता रहे हैं,उसके अनुसार वहां धुंआ ही धुंआ है,भारी अफरा तफरी है....इत्यादि इत्यादि...
मेरा सर उन महान ट्विटकारों के प्रति श्रद्धा से झुक गया कि क्या आस्था और प्रतिबद्धता है इनकी ......जान हथेली पर ले,बिना आग और जान की परवाह किये अन्दर का आँखों देखा बहार लोगों तक पहुंचा रहे हैं...
आज तुम्हारी यह इंटरव्यू पढ़ यह श्रद्धा एक डिग्री और बढ़ गयी...

अभिषेक ओझा said...

हा हा ! अवसम ! :)

Rakesh said...

HA!Ha! wait now,I have to tweet this but what will Lofty boy do then!

अनूप शुक्ल said...

क्या-क्या आइडिये हैं जी! शानदार! जस्ट अवसम!

प्रवीण पाण्डेय said...

देवेगौड़ा जी को ट्वीट के इंटरव्यू में स्थान देना तो लाफ्टीबॉय को नागवार गुजरा होगा, एंटी-ट्वीट है न |
कुछ दिनों में ऐसी ट्वीट मशीन बनेगी जो की अंगों की क्रियाओं को स्वतः फील कर के ट्वीट कर दिया करेगी | तब सुबहें कितनी वीभत्स और रातें उत्सुकतापूर्ण होंगी | समाज पारदर्शी हो जाएगा | यदि मशीन मन को पढ़ने लगे तो .......

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

सॉरी, ट्वीट कर रहा था। याद न रहा टिप्पणी करने का।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

काश कोई मुझे भी बता देता कि ट्वीट कैसे करते हैं...।

बहुत पिछड़ा रह गया मैं... धत्‌।

कृष्ण मोहन मिश्र said...

बड़ा जानमारू धंधा है टवीटरिंग । अब बताईये भला लाफ्टीबॉय जान पर खेलकर टवीटसेवा किये जा रहे हैं । बीच में नंबर दो लगी तो पहले टवीट करेंगे ओर इस बीच प्रेशर, हार्न बजा कर पोलो ले लिया तो उसकी भी संगीतमय भीनी भीनी जानकारी टवीट करेंगे । लाफ्टीबॉय जी कुर्बान न हों जाये सैफ अली खान की तरह ।

सतीश सक्सेना said...

होली की हार्दिक शुभकामनायें !

महाशक्ति said...

(शान+जान)दार साक्षात्‍कार

होली मंगलमय हो, सोचा था कि कुछ होली पर विशेष मिलेगा।

कुश said...

इस पोस्ट को रिट्वीट कर दिया है..

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

ha ha ha...waah
aur anurag ji se bhi agree, ye twitter wale sammelan nahi karte :P

संजय बेंगाणी said...

आज कल ट्वीट किसी सेलिब्रिटी को समर्पित भी की जाती है.