ब्लागिंग के सबसे महत्वपूर्ण अलिखित सिद्धांत के अनुसार ब्लॉगर एक अति सजग प्राणी होता है. लेकिन यह सजगता इसलिए नहीं कि तन कर बैठे हैं कि अपने पास सांप, बिच्छू, मच्छर वगैरह को नहीं फटकने देंगे. वह तो इसलिए रहती है कि हमेशा सजग रहने से कहीं से भी पोस्ट बन सकती है.
एक ब्लॉगर को और क्या चाहिए? एक नई पोस्ट.
पिछले ५-६ दिनों से एक अस्पताल में हूँ. आते-जाते, उठते-बैठते यही सोचते रहते है कि कहाँ से एक अदद पोस्ट निकल सकती है? और रहना भी चाहिए. एक ब्लॉगर के लिए एक नई पोस्ट नारायण के सामान है. किस वेश में नारायण मिल जाएँ, कौन जानता है?
कभी-कभी मन में यह भी आता है कि; "यार आदमी हो या ब्लॉगर?"
हाँ तो मैं हॉस्पिटल की बात कर रहा था. हॉस्पिटल के सबसे बड़े डॉक्टर और मालिक के आफिस में बैठा था. टेबिल पर उनके नाम आये तमाम निमंत्रण पत्र, क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट, पत्रिका में छपी उनकी तस्वीरें, इधर-उधर बिखरे पड़े थे. ध्यान चला ही जाता है. पहले ऐसा केवल ऑडिट करने की पुरानी आदत की वजह से था लेकिन अब ब्लागिंग की वजह से है. खैर, ध्यान गया तो देखा कि इन सब चीजों के अलावा वहीँ पर एक मोटा चिट्ठा रखा था. उत्सुकता वस खोल लिया.
पिछले सप्ताह की हॉस्पिटल की इन्टरनल ऑडिट रिपोर्ट थी. पहली बार मन में आया कि इसे पढ़ना पाप है. इसलिए नहीं पढ़ा. डॉक्टर साहब से मुलाकात करने के लिए जैसे-जैसे इंतज़ार बढ़ता जाता वैसे-वैसे गुस्सा आता. अंत में सोचा कि कुछ न कुछ तो पढ़ना होगा नहीं तो इतनी देर तक यहाँ बैठेंगे कैसे? समय कैसे कटेगा? काफी उधेड़-बुन के बाद मन में विचार आया कि जब पढ़ना ही है तो उनके क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट को नहीं पढ़कर यह इन्टरनल ऑडिट रिपोर्ट ही पढ़ डालूँ.
उलट-पलट कर सरसरी निगाह डाली. पता चला कि यह तो ब्लॉग पोस्ट का मैटेरियल है. जितना पढ़ा था उसका अनुवाद छाप रहा हूँ. आपलोग भी पढ़िए.
गिवेन अंडर द सील ऑफ मिस्टर अशोक दीवान, हेड, इन्टरनल ऑडिट डिपार्टमेंट
कार्डियेक डिपार्टमेंट
तमाम डिपार्टमेंटल रेकॉर्ड्स की जांच करने के बाद हम रिपोर्ट करते हैं कि डॉक्टर कौल ने बाहर से आये एक मरीज को ईको की सही रीडिंग बता दी. सात अक्टूबर को जिस मरीज के ग्रैडिएंट की रीडिंग डॉक्टर माखन लाल ने एक सौ सात और तिरासी बताई थी उसी मरीज की रीडिंग को दूसरे ही दिन डॉक्टर कौल ने केवल चौरासी और पैतालीस बताई. पहली बार ईको करते हुए डॉक्टर माखन लाल ने एक सौ सात की रीडिंग बताकर उस मरीज को डराकर ऑपरेशन के लिए राजी कर लिया था लेकिन जब डॉक्टर कौल ने उसे अपनी रीडिंग बताई तो मरीज यह कहकर हॉस्पिटल छोड़ गया कि उसे अभी ऑपरेशन की ज़रुरत नहीं है. डॉक्टर कौल की इस हरकत से हॉस्पिटल को पूरे साढ़े तीन लाख रूपये का नुक्सान हो गया.
कुछ मरीज बड़े घाघ होते हैं. यह मरीज भी घाघ टाइप ही था. काफी रिसर्च करने के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि गूगल ने सुई से लेकर हार्ट प्रोंबलम्स तक पर विकिपीडिया का निर्माण कर डाला है. ऐसे में कुछ मरीजों को हर चीज की जानकारी रहती है. वह वीकीपीडिया घोंटकर और यू-ट्यूब पर हर तरह की सर्जरी के विडियो देखकर ही हॉस्पिटल में प्रवेश करता है.
ऐसे में हर डिपार्टमेंट के डॉक्टरों के बीच को-आर्डिनेशन की बहुत ज़रुरत है.
ऑडिट रिपोर्ट्स ऑन असिस्टेंट्स डाक्टर्स टू डॉक्टर रेहान
पिछले सप्ताह लिए गए सी सी टीवी फूटेज देखकर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि डॉक्टर बोस अपनी एक्टिंग क्षमता को और निखारने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. तमाम मरीजों के साथ उनकी बातचीत की सी सी टीवी फूटेज को देखने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि उन्हें अपनी एक्टिंग क्षमता को जल्द से जल्द निखारने पर ध्यान देना चाहिए. मरीजों की ईको रिपोर्ट, ब्लड रिपोर्ट, एक्स-रे वगैरह देखते हुए वे केवल तीन-चार तरह की मुख-मुद्राएं (बोले तो फेसियल एक्सप्रेशन) बनाकर ही मरीज को डराते हैं. रिपोर्ट देखते समय उनके माथे पर केवल दो बल पड़ते हैं. वे केवल एक तरह से ही मुँह बिचकाते हैं. ऐसा करने से मरीज के पूरी तरह से डरने के चांसेज कम रहते हैं. हम मैनेजमेंट को सलाह देते हैं कि डॉक्टर बोस को जल्द से जल्द रोशन तनेजा के एक्टिंग स्कूल में भेजा जाय ताकि वे मरीजों को डराने के और फेसियल एक्श्प्रेसन सीख पाएं.
अगर इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो आनेवाले दिनों में मरीजों को सर्जरी के लिए राजी करने के लिए तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.
बिलिंग डिपार्टमेंट
पिछले सप्ताह बिलिंग डिपार्टमेंट में मरीजों और उनके घरवालों की तरफ से कुल आठ शिकायतें मिलीं. आठ में सात शिकायतें एक्स्ट्रा बिलिंग को लेकर की गईं थीं. यह एक नॉर्मल रूटीन है. इन शिकायतों को ज्यादा महत्व देने की ज़रुरत नहीं है. हाँ जिस शिकायत को महत्व देने की ज़रुरत है वह इस बारे में है कि ऑपरेशन थियेटर में एक मरीज को छोटे से ऑपरेशन जिसमें केवल पंद्रह मिनट लगते हैं उसके लिए कुल एक सौ चौदह इंजेक्शन का बिल बना दिया गया. कान के इस ऑपरेशन के लिए एक सौ चौदह इंजेक्शन कुछ ज्यादा ही है. बिलिंग करते समय इस बात का ध्यान दिया जाना चाहिए ऐसा कुछ न लिखा जाय जिससे मरीज के घर वाले बिलिंग डिपार्टमेंट में गाली-गलौज शुरू कर दें.
इस तरह की तू-तू मैं-मैं वहाँ उपस्थित प्रोस्पेक्टिव कस्टमर के ऊपर गलत असर डालती हैं.
फिनांस डिपार्टमेंट
पिछले सप्ताह फिनांस डिपार्टमेंट ने बाहर से आये एक मरीज से मानवता के नाते चेक से पेमेंट लेने के लिए हामी भर दी. हालाँकि चेक 'ऐट पार' था और उसी दिन हॉस्पिटल के अकाउंट में क्रेडिट भी हो गया लेकिन मानवता के नाते मरीजों को इस तरह की छूट देना ठीक नहीं है. मरीजों की आदत खराब होते देर नहीं लगेगी. तमाम रेकॉर्ड्स देखने के बाद हम रिपोर्ट करते हैं कि इस चेक से पेमेंट एक्सेप्ट करने से पहले मरीज से केवल एक लेटर लिखवाया गया. अगर तीन-चार बार उसे इधर से उधर दौड़ाया गया होता तो हारकर कहीं न कहीं से कैश का इंतजाम करके कैश ही जमा करता.
हमारी सलाह है कि आगे से इस तरह की हरकतों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए.
कैफेटेरिया एंड फ़ूड स्टेशन
हमारी सलाह पर ही हॉस्पिटल के अन्दर हाल ही में तीसरा कैफेटेरिया खुला जिसमें थाई और चायनीज फ़ूड मिलता है. हमरे डिपार्टमेंट का शुरू से ही मानना है कि हॉस्पिटल बिजनेस का असली फॉरवर्ड इंटीग्रेशन फ़ूड स्टेशन और कैफेटेरिया ही हो सकता है. ऐसे में हाल ही में अरब देशों से आनेवाले मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हम रेकमेंड करते हैं कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट यमनी, सउदी और ईरानी फ़ूड के लिए एक अलग फ़ूड स्टेशन खोले. वैसे तो नए फ़ूड स्टेशन के लिए ढाई एकड़ ज़मीन की जरूरत है लेकिन सरकार बावन एकड़ ज़मीन देने के लिए तैयार है. हमें सरकार द्वारा दी जाने वाली ज़मीन ले लेनी चाहिए. आगे यह ज़मीन और किसी काम आ सकती है.
कार पार्किंग
पिछले सप्ताह का काम देखने वाली एजेंसी ने पार्किंग से होनेवाले इनकम पर कमीशन बढ़ाने के लिए एक बार फिर से मैनेजमेंट को पत्र लिखा है. हमारी सलाह है कि मैनेजमेंट अब कार पार्किंग का बिजनेस आउटसोर्स न करके खुद ही करे. ऐसा करने से कंपनी को करीब बासठ करोड़ का एडीशनल रेवेन्यू मिलेगा.
न्यू एवेन्यू ऑफ रेवेन्यू
शुरुआत में हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने बाहर से आनेवाले मरीजों के रिश्तेदारों को ठहराने के लिए गेस्ट हाउस सर्विस चला रखा था. बाद में उसे यह कहकर बंद कर दिया गया कि उस बिजनेस को हॉस्पिटल के बिजनेस के साथ कन्वर्ज करने में मुश्किलें आ रही थीं. पिछले सप्ताह हॉस्पिटल के इन्क्वाइरी काउंटर पर गेस्ट हाउस के लिए कुल तेरह सौ बासठ इन्क्वाइरी आई. वैसे तो हम पहले भी कह चुके हैं लेकिन एक बार फिर से सलाह देते हैं कि मैनेजमेंट गेस्ट हाउस बिजनेस को फिर से शुरू करने के बारे में विचार करे. ऐसा करने से करीब बत्तीस करोड़ .....
पढ़ ही रहा था कि अन्दर से किसी ने पुकारा; 'हंजी, कलकत्ते से जो आये हैं....."
इतना सुनकर रिपोर्ट को छोड़ देना पड़ा. दो मिनट बाद ही डॉक्टर रुपी भगवान के सामने थे.....


