Show me an example

Monday, March 28, 2011

साल २०१५ के भारत संबंधी विकिलीक्स




जब से विकिलीक्स द्वारा खुलासे करने का श्रीगणेश हुआ है तब से बाकी मीडिया ने खुलासे से अपना पल्ला झाड़ लिया है. विकिलीक्स के पास भी इतना केबिल्स है जिसे पढ़ कर लगता है जैसे पूरी दुनियाँ में फैले अमेरिकी डिप्लोमैट केबिल लिखने के अलावा और कुछ करते ही नहीं. शाम को किसी नेता, ब्यूरोक्रेट, मंत्री, संत्री, पत्रकार, कलाकार, लोबीयिस्ट वगैरह से बात की और दूसरे दिन ही अमेरिका में बैठे अपने लोगों को केबिल ठेल दिया. एक बात और समझ में आती है कि पूरी अमरीकी विदेश-नीति केबिलों पर चल रही है. ठीक वैसे ही जैसे करेंट केबिलों पर चलता है. जैसे-जैसे ये केबिल अखबारों में छाप रहे हैं वैसे-वैसे न जाने कितनों को करेंट लग रहा है.

मैं मार्च नहीं मना रहा हूँ. अब मार्च में जब भारतीय मार्च नहीं मनायेगा तो वह कुछ न कुछ सोचेगा. आज सोच रहा था कि अगर ऐसे ही विकिलीक्स केबल्स पब्लिश करता रहा तो क्या होगा? देखेंगे कि साल २०१५ में तमाम केबिल्स छापे जायेंगे तो साल २०१० या साल २०११ की घटनाओं से सम्बंधित होंगे. क्या नज़ारा हो सकता है?

अब जैसे साल २०११ में जो खुलासे हो रहे हैं वे राजनीति से जुड़ी हुई बातें, पॉलिसी, बातचीत वगैरह-वगैरह सम्बंधित हैं. ऐसे में साल २०१० और २०११ में जो भी भारतीय नेता, ब्यूरोक्रेट, सेक्रेटरी, लेखक, पत्रकार वगैरह अमेरिकी डिप्लोमैट्स से बात करेंगे वे राजनीतिक कम और बाकी मुद्दों पर ज्यादा होंगी. क्या-क्या बातें हो सकती हैं? एक नज़र मारिये. अरे, मेरा मतलब इधर नीचे नज़र मारिये; (अब मैं हिंदी में लिखता हूँ इसलिए उस समय पब्लिश होने वाले केबल्स के हिंदी अनुवाद छाप रहा हूँ....)

केबिल संख्या २५७७१३ तारीख १३.०२.२०११

"भारतीय सरकार पर भारतीय सुप्रीम कोर्ट और जनता का बहुत दबाव पड़ रहा है. सरकार, उसके मंत्री और मुखिया की सुप्रीम कोर्ट में, ब्लाग्स और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर रोज ऐसी-तैसी हो रही है. वैसे कल अमेरिकी राजनयिक ने बातचीत में राहुल गांधी ने बताया कि बस पाँच दिन की बात है. उन्नीस फरवरी से क्रिकेट वर्ल्ड कप शुरू हो रहा है तो चीजें कुछ हद तक कंट्रोल में आ जायेंगी. जैसे ही पूरा देश करप्शन एक्सपर्ट से क्रिकेट एक्सपर्ट बना नहीं कि मामला हमारे लिए ईजी हो जाएगा. वर्ल्ड कप के बाद आई पी एल भी है. साल २००९ में तो चुनावों के बहाने हमने आई पी एल को सुरक्षा की गारंटी न देते हुए दक्षिण अफ्रीका पहुँचा दिया था लेकिन इस बार तो डबल सुरक्षा देंगे जिससे आई पी एल भारत में रहे. वैसे इस बार भी पाँच राज्यों में चुनाव रहे हैं लेकिन हम इस बार आई पी एल को जेड कैटगरी की सुरक्षा देंगे. यह हमारी सरकार के लिए ज़रूरी है. इधर एक महीना से ज्यादा वर्ल्ड कप राहत दे देगा उसके बाद एक महीना आई पी एल. सुना है उसके बाद वेस्टइंडीज का दौरा है. ऐसे में....."

केबिल संख्या २५७८०९ तारीख २५.०२.२०११

"अमेरिकी दूतावास में कार्यरत अधिकारी, पीटर स्कॉट के साथ शाम को व्हिस्की की चुस्कियां लेते हुए एक प्रसिद्द पत्रकार वहीद लखवी ने बताया था कि राहुल गाँधी को मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिए गाना बहुत पसंद है. कांग्रेस की एक इनर सर्किल जो राहुल के बहुत करीब है, ने खुद बताया कि राहुल ने फिल्म दबंग छत्तीस बार और यह गाना चौरासी बार......"

केबिल संख्या २५७९१६ तारीख २५.०३.२०११

"भारतीय मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के पॉलिट-ब्यूरो के कई सदस्यों का मानना है कि अमेरिका ने भारतीय क्रिकेट टीम के ऊपर दबाव डाला कि वो अच्छा खेलकर सेमीफाइनल में पहुंचे ताकि पाकिस्तान और भारत के प्रधानमंत्री मैच देखने के बहाने मुलाकात कर सकें. मार्क्सवादियों को इस बात से गुरेज नहीं था कि दोनों देशों के प्रधानमंत्री मिलें बल्कि वे इस बात से नाराज़ थे कि अमेरिका अब भारतीय क्रिकेट में भी दखलंदाजी करने लगा है..."

केबिल संख्या २५७७६९ तारीख १८.०२.२०११

"दूतावास में काम करने वाले एक भारतीय कर्मचारी को कांग्रेसी नेता जनार्दन द्विवेदी ने बताया कि राहुल गाँधी अपने पिता के कदमों पर चलकर अपनी ईमानदारी को अमर करना चाहते थे. जैसे उनके पिता ने पच्चीस साल पहले यह कहकर अपनी ईमनदारी को अमर कर लिया था कि आम आदमी के लिए सरकार से चलने वाला एक रुपया आम आदमी तक पहुँचते-पहुँचते पंद्रह पैसा रह जाता है उसी प्रकार राहुल ज़ी भी कुछ करना चाहते थे. राहुल का मानना था कि पच्चीस साल पहले कही गई बात को अब रिवाइज करके एक बार फिर से प्रेस और जनता से अपनी ईमानदारी पर मुहर लगवा लिया जाय लेकिन आम आदमी तक पहुचने वाले पैसे पर कांग्रेस वर्किंग कमिटी में सहमति नहीं हो सकी.

राहुल ज़ी चाहते थे कि अपने पिता द्वारा दिए गए फिगर यानि पंद्रह पैसे को रिवाइज करके अब पाँच पैसा कर दिया जाय लेकिन वित्तमंत्री मुखर्जी और गृहमंत्री सात पैसे से नीचे आने पर सहमत नहीं हुए. बाद में मामला यह कहकर टाल दिया गया कि प्रधानमंत्री एक ज़ीओएम बनायेंगे जो एक सहमति बनाने की कोशिश करेगा.."

केबिल संख्या २५७९६१ तारीख ०२.०४.२०११

"विदेश मंत्रालय के एक सचिव ने पीटर स्कॉट को बताया कि चंडीगढ़ में सेमी फाइनल देखने आये पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के खाने के मेन्यू को लेकर मंत्रिमंडल में अंतिम समय तक असहमति बनी रही. जहाँ गृहमंत्री चाहते थे कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को पंजाबी खाना खिलाया जाय वहीँ विदेशमंत्री कृष्णा चाहते थे कि उन्हें पुर्तगाली खाना परोसा जाय. बाद में विदेश सचिव अनुपमा राव ने सुझाव दिया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के लिए अफगानी और बलोची खाना परोसना ठीक रहेगा. वैसे जब प्रधनमंत्री श्री मनमोहन सिंह से इस बाबत सवाल पूछा गया तो उन्होंने गब्बर सिंह 'इश्टाइल' में कहा - हमको नहीं पता. हमको कुछ नहीं पता.."

केबिल संख्या २५७९८७ तारीख ०५.०४.२०११

"कांग्रेसी नेता जयन्ती नटराजन ने अमेरिकी दूतावास के एक सेक्रेटरी के साथ अपनी बातचीत में बताया कि तमिलनाडु विधानसभा के चुनावों में चुनाव प्रचार को एक नया मोड़ देने के लिए कांग्रेस ने करीब साठ हज़ार कार्यकर्ताओं का एक समूह तैयार किया है जो डी एम के और ए आई डी एम के की रैलियों में घुसकर इन पार्टियों द्वारा प्रदेश के पुरुष वोटरों को भाव न दिए जाने पर नारा लगाएगा. यह समूह अपनी मांग में यह कहेगा कि राजनैतिक पार्टियाँ राज्य के पुरुष वोटरों के लिए फ्री शेविंग क्रीम और रेजर का वादा करें. साथ ही पुरुष मतदाताओं के लिए लुंगी और चन्दन की डिबिया की भी डिमांड रखेगा..."

केबिल संख्या २५७९२७ तारीख २८.०३.२०११

"साल २०११ के वर्ल्ड कप सेमी फाइनल में भारत के पहुँचने के क्रेडिट के लिए तू-तू मैं-मैं शुरू हो गई है. जहाँ मार्क्सवादी सेमी फाइनल में भारत के पहुँचने के लिए अमेरिकी दबाव को जिम्मेदार मानते हैं वहीँ भारतीय जनता पार्टी इसके लिए नरेन्द्र मोदी को क्रेडिट दे रही है. बी जे पी का मानना है कि क्वार्टर फाइनल में गुजरात क्रिकेट एशोसियेशन के अध्यक्ष्य के रूप में मोदी ने ऐसी पिच बनवाई जिससे ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग धरासायी हो जाए. वहीँ कांग्रेस का मानना है कि क्वार्टर फाइनल से पहले राहुल गाँधी ने भारतीय क्रिकेट टीम को शुभकामना संदेश भेजा था जिससे टीम जीत गई. चेयरमैन ऑफ सेलेक्टर्स इसके लिए मुनफ पटेल द्वारा अपने पूरे ओवर्स नहीं करने को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. वहीँ भारतीय क्रिकेट प्रेमी क्वाटर्स फाइनल में नेहरा के नहीं खिलाये जाने को टीम की जीत के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. बड़ी बमचक मची हुई है. पता नहीं चल रहा कि क्रेडिट कहाँ जाएगा और कैश कहाँ..."

केबिल संख्या २५७७०६ तारीख २४.०३.२०११

"संसद में बहस के दौरान विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री से एक-दूसरे पर शेरों से हमला किया. जहाँ विपक्ष के नेता ने हमले के लिए इकबाल के शेर का इस्तेमाल किया वहीँ प्रधानमंत्री श्री सिंह ने ग़ालिब के शेर का इस्तेमाल किया. खबर यह भी है कि संसद में शेर कहने के तीन घंटे बाद प्रधानमंत्री श्री सिंह को कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद ग़ालिब के उस शेर का मतलब समझाते हुए देखे गए. अन्दर की खबर यह है कि बाद में प्रधानमंत्री ने माना कि उनके द्वारा कहा गया शेर उस मौके पर मैच नहीं कर रहा था. लेकिन फिर वही बात है कि - कमान से निकला हुआ तीर और मुँह से निकला हुआ शेर कभी वापस नहीं आते.."

केबिल संख्या २५८१०३ तारीख ०७.०४.२०११

"पश्चिम बंगाल में भी चुनाव हो रहे हैं लेकिन वहाँ पर तमिलनाडु की तरह वोटरों को मिक्सर, टीवी, मंगलसूत्र, मिनरल वाटर, फ्रिज, लैपटॉप, चावल, गेंहू ऑफर नहीं किया जा सका है. बाकी देश के लोग़ यह अनुमान लगा रहे हैं कि तमिलनाडु की पार्टियों द्वारा ऑफर किये गए सामानों की तरह पश्चिम बंगाल की पार्टियों ने क्या ऑफर किया?

कोलकाता स्थित डिप्टी हाई-कमीशन के एक स्टाफ से बात करते हुए एक वरिष्ट बांग्ला पत्रकार ने बताया कि पश्चिम बंगाल में पार्टियाँ वोटरों को ऐसे स्कूल ऑफर कर रही हैं जिनमें नारे लिखने, हड़ताल करने और राज्य को बंद करने की शिक्षा दी जायेगी.."

केबिल संख्या २५७९२८ तारीख २८.०३.२०११

"आज एक भारतीय चैनल ने हिंदी फिल्म तीस मार खान एक ही दिन में दो बार दिखाई. सोशल नेटवर्किंग साईट ट्विटर पर कुछ ट्वीटबाजों का मानना है कि यह २६/११ के बाद भारत पर हुआ सबसे बड़ा असॉल्ट है. भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों का मानना है कि ट्वीटबाजों द्वारा किये गए इस खुलासे को पाकिस्तान के मंत्री रहमान मलिक ने बहुत सीरियसली लिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री श्री गिलानी को सुझाव दिया है कि वे चंडीगढ़ में मैच देखने के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री श्री सिंह से सवाल करें कि वे इस असॉल्ट के ऊपर भी कार्यवाई कर रहे हैं या नहीं?"

Wednesday, March 23, 2011

स्टिंग ऑपरेशन की चिरकुटई




जुलाई २००८ में विश्वास मत के बाद की पोस्ट है.

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देश में आजकल दो ही बातों पर चर्चा हो रही है. एक है अमर सिंह और दूसरा है स्टिंग आपरेशन. पिछले कुछ सालों में स्टिंग आपरेशन इस तरह से फ़ैल चुका है जैसे पहले हैजा और प्लेग जैसी बीमारियाँ फैलती थीं. ऊपर से संसंद में हुए विश्वास प्रस्ताव समारोह ने स्टिंग आपरेशन को एक अलग ऊंचाई प्रदान कर दी है. आज हालत यह है कि कबाड़ चुनते-चुनते अगर किसी कबाड़ी को कोई सीडी मिल जाती है तो वह उस सीडी को धो-पोंछ कर डीवीडी प्लेयर पर चढ़ा लेता है. इस आशा के साथ कि अगर सीडी में किसी नेता का स्टिंग आपरेशन स्टोर्ड होगा तो सीडी को किसी न्यूज चैनल को बेंचकर कुछ पैसा कमाया जा सकता है.

कल सुदर्शन से बात हो रही थी. सुदर्शन ने कहा; "अरे सर, ये उमा भारती तो फंस गई. उन्होंने जिस सीडी का उदघाटन इतने ताम-झाम के साथ किया उसमें तो पोस्टर दिखने की वजह से सब गड़बड़ हो गया."

मेरे मुंह से निकला; "कोई बात नहीं. उस पोस्टर को दीवार से हटाकर फिर से शूटिंग कर लेंगे ये लोग."

मेरी बात सुनकर सुदर्शन हंसने लगा. लेकिन मुझे लगा कि ये भी अजीब बात है. कितना सरल हो गया है 'स्टिंग आपरेशन' करना. फिर मन में आया कि अगर आज से कुछ सालों बाद रि-डिस्कवरी चैनल पर अगर भारत में स्टिंग आपरेशन के इतिहास पर एक डाक्यूमेंट्री दिखाई जायेगी तो कैसे होगी? शायद कुछ ऐसी;

भारत में स्टिंग आपरेशन का इतिहास पुराना है. स्टिंग आपरेशन के पुरातन होने की पुष्टि इस बात से होती है कि भागलपुर में हुए आँख-फोडू काण्ड का भेद सबसे पहले स्टिंग आपरेशन के चलते ही खुला था. इसके आलावा इंडियन एक्सप्रेस नामक समाचार पत्र ने एक स्टिंग आपरेशन की मदद से राजस्थान में लगने वाली औरतों की एक मंडी का पर्दाफाश किया था. शुरू में स्टिंग आपरेशन में स्टिल कैमरे और टेप रिकॉर्डर का उपयोग किया जाता था लेकिन बाद में विडियो शूटिंग के प्रयोग की वजह से स्टिंग आपरेशन में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला.

इक्कीसवीं शताब्दी के आरम्भ में तहलका ने स्टिंग आपरेशन के जरिये ढेर सारे क्रिकेट खिलाड़ियों और नेताओं के भ्रष्ट होने के सुबूत इकठ्ठा किए. हथियारों में दलाली की बात हो या फिर क्रिकेट में पैसा लेकर न खेलने का साहसिक कार्य, सबकुछ स्टिंग आपरेशन की मदद से सामने लाये गए. स्टिंग आपरेशन को नई ऊंचाई तब मिली जब तमाम टीवी न्यूज चैनल स्टिंग आपरेशन के धंधे में उतर गए. पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने का कार्यक्रम हो या फिर शारीरिक शोषण के जरिये हिन्दी फिल्मों में हिरोइन का रोल दिलाने के वादे, सब स्टिंग आपरेशन करके जनता के सामने लाये गए.

स्टिंग आपरेशन का विकास कुछ इस तरह से हुआ कि इसके जरिये बहुत सारे लोगों को सताने की प्रथा भी चल निकली. हालत यह हो गयी कि जो समाजशास्त्री पहले स्टिंग आपरेशन को इलाज समझते थे, साल २००८ आते-आते उन्ही समाजशास्त्रियों ने स्टिंग आपरेशन को एक बीमारी मानना शुरू कर दिया. साल २००८ में तत्कालीन सरकार द्बारा विश्वास मत प्राप्ति हेतु लेन-देन के मामले को स्टिंग आपरेशन करके सामने लाने की कोशिश हुई.

स्टिंग आपरेशन के फैलते प्रभाव की वजह से बहुत सारी विदेशी कम्पनियों को भारत एक नए बाज़ार के रूप में दिखने लगा. साल २००८ में संसद में विश्वास मत प्राप्ति कार्यक्रम में स्टिंग आपरेशन के रोल ने विदेशी उद्योगपतियों को बहुत प्रभावित किया. वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार साल २००८ के सितम्बर महीने में विदेशी पूंजी निवेश के कुल अट्ठारह प्रस्ताव आए जिनमें से आठ सीडी निर्माण, तीन स्पाई विडियो कैमरा निर्माण और चार स्टिंग आपरेशन की शिक्षा हेतु कालेज स्थापना के थे. सरकार ने विदेशी पूँजी निवेश के इन प्रस्तावों को बड़े उत्साह के साथ पास कर दिया. साल २०११ तक विदेशी तकनीक को और आगे बढाते हुए भारतीय उद्योगपतियों ने स्टिंग आपरेशन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों में क्रांतिकारी बदलाव किया.

साल २००९ तक लगभग सभी राजनैतिक दलों ने अपने-अपने दल में माईनोरिटी सेल, इकनॉमिक सेल, सोशल जस्टिस सेल की तर्ज पर स्टिंग आपरेशन सेल भी स्थापित किए. इन पार्टियों ने अपने इस सेल में काम करने के लिए उन नेताओं को लगाया जिन्हें स्टिंग आपरेशन में फंसने का गौरव प्राप्त था. इन राजनैतिक पार्टियों का मानना था कि स्टिंग आपरेशन में फंसा हुआ नेता ही ऐसे सेल की अध्यक्षता करने का पर्याप्त अनुभव रखता था. कुछ राजनैतिक दलों ने तो विज्ञापन के जरिये अपने स्टिंग आपरेशन सेल के लिए स्क्रिप्ट राईटर्स और कैमरा मैन की भर्ती भी की.

साल २०१० तक लगभग सारे राजनैतिक दल इस बात बार सहमत हो चुके थे कि स्टिंग आपरेशन की पढाई को देश में हाई स्कूल से अनिवार्य कर दिया जाय. नतीजा यह हुआ कि स्टिंग आपरेशन की पढाई करने वाले छात्रों को सरकार की तरफ़ से वजीफे देने का कार्यक्रम शुरू हुआ. विशेषज्ञों का मानना था कि साल २०२० तक रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर स्टिंग अपारेशन की पढाई करने वाले छात्रों के लिए ही उपलब्ध होने वाले थे.

स्टिंग आपरेशन की सफलता ने हिन्दी फ़िल्म उद्योग के पुराने निर्देशकों और पटकथा लेखकों को रोजगार के अवसर दिए. कुछ पुराने निर्देशक जिन्हें कोई काम नहीं था, उन्होंने स्टिंग आपरेशन के निर्देशन में हाथ आजमाया और उनमें से कुछ तो काफी सफल भी हुए. इन लोगों को सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर टीवी न्यूज चैनल ने उपलब्ध करवाए.

आज भारत में स्टिंग आपरेशन उद्योग का कारोबार करीब सत्तर हजार करोड़ रूपये तक पहुँच चुका है. भारतीयों द्बारा किए गए स्टिंग आपरेशन की ख्याति दुनियाँ भर में फैली हुई है. यही कारण है कि अमेरिका, यूरोप और दक्षिण पूर्व एशिया के कई देश स्टिंग आपरेशन की आउटसोर्सिंग के लिए भारतीय आपरेटरों पर सबसे ज्यादा विश्वास दिखाते हैं. साल २०४५ तक भारतीय स्टिंग आपरेशन उद्योग का कारोबार बढ़कर एक लाख आठ हज़ार करोड़ रूपये तक पहुँच जाने की संभावना है.

Monday, March 21, 2011

चुनाव गाथा




आधा किलो की यह तुकबंदी मार्च २००९ में लिखी गई थी. कई राज्यों में लोकतंत्र का इम्तिहान यानि चुनाव एक बार फिर से होने को हैं. ऐसे में मुझे लगा कि री-ठेल कर देना बुरा नहीं होगा:-)


वोट निंद्य है शर्मराज, पर,
कहो नीति अब क्या हो
कैसे वोटर लुभे आज फिर
पाँव तले तकिया हो

कैसे मिले हमें शासन का
पेडा, लड्डू, बरफी
किस रस्ते पर चलकर लूटें
चाँदी और अशर्फी

क्या-क्या रच डालें कि;
जनता खुश हो जाए हमसे
दे दे वोट हमें ही ज्यादा
हम फिर नाचें जम के

अगर कहो तो सेकुलर बन, हम
फिर महान हो जाएँ
नहीं अगर जंचता ये रस्ता
राम नाम हम गायें

अगर कहो तो गाँधीगीरी कर
त्यागी कहलायें
शासन के बाहर ही बैठे
जमकर हलवा खाएं

तुम कह दो तो गठबंधन कर
दें जनता को धोखा
तरह तरह के स्वांग रचें हम
मारें पेटी खोखा

कल तक जो थे साथ, कहो तो
साथ छोड़ दें उनका
नहीं समर्थन मिले हमें तो
हाथ तोड़ दें उनका

तुम कह दो तो एक कमीशन
बैठाकर फंसवा दें
अगर कहो तो खड़े-खड़े ही
पुलिस भेज कसवा दें

नीति-वीति की बात करे जो
उसका मुंह कर काला
भरी सड़क पर उसे बजा दें
हो जाए घोटाला

बाहुबली की कमी नहीं
गर बोलो तो ले आयें
उन्हें टिकट दे खड़ा करें, और
नीतिवचन दोहरायें

दलितों की बातें करनी हो
गला फाड़ कर लेंगे
बात करेंगे चावल की, पर
उन्हें माड़ हम देंगे

तुम कह दो तो कर्ज माफ़ कर
हितचिन्तक बन जाएँ
मिले वोट तो भूलें उनको
उनपे ही तन जाएँ

गठबंधन का धर्म निभाकर
पॉँच साल टिक जाएँ
आज जिन्हें लें साथ, उन्ही को
ठेंगा कल दिखलायें

किसे बनाएं मुद्दा हम, बस
एक बार बतला दो
जो बोलोगे वही करेंगे
तुम तो बस जतला दो

अगर कहो तो बिजली को ही
फिर मुद्दा बनवा दें
अगर नहीं तो सड़कों पर ही
पानी हम फिरवा दें

शर्मराज जो भी बोलोगे
हम तो वही करेंगे
शासन में रह मजे करेंगे
अपना घर भर लेंगे

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शर्मराज ने आँखें खोली, और
शांत-मुख लेकर
बोले; "सुन लो भ्रात आज तुम
चित्त, कान सब देकर"

जिस रस्ते पर चलकर चाहो
सत्ता सुख को पाना
उसे चुनो और बुन डालो तुम
पक्का ताना-बाना

सच तो यह है आज राजसुख
उतना इजी नहीं है
इसे प्राप्त करने के हेतु ही
हर दल आज बिजी है

विकट सत्य को समझो कि यह
गठबंधन का युग है
विचलित न हो लोग कहें गर
'शठ-बंधन' का युग है

शर्म छोड़ कर शठ बन जाओ
खोजो और शठों को
अगर ज़रुरत हो तो चुन लो
कुछ धार्मिक मठों को

राजनीति हो अलग धर्म से
गीत सदा यह गाकर
प्राप्त करो सत्ता सुख को
'शठ-बंधन' धर्म निभाकर

शर्म से होती है सत्ता-नीति को हानि
....................शर्महीनता ही सत्ता-नीति का आधार है
एक बार शर्म छोड़ बेशर्म बन जाओ
................... और फिर देखो कैसे बढ़ता बाज़ार है
ले लो ज्ञान मुझसे और कूद पडो दंगल में
....................सत्ता पाने के लिए जुगत हज़ार है
बात सुनो भ्रात मेरी ध्यान-कान देकर तुम
....................तुम्हें ज्ञान देने को शर्मराज तैयार है

सबसे पहले बाँट डालो देशवासियों को तुम
....................इसके पश्चात अपने वोटर को चुन लो
कर समापन यह चुनाव पानी में उतारो नाव
...................वोटर को लुभाने के तरीके भी सुन लो
कर डालो वादे और खा डालो कस्में तुम
...................इन सारे तरीकों को शांत-चित्त गुन लो
इसके साथ पैसे और शराब का कम्बीनेशन हो
...................इसपे भी वोटर न रीझे, गुंडे भेज धुन दो

मुद्दा हो निकास का या आर्थिक विकास का हो
..................उसके बारे में भूल से भी मत बोलना
दलों का जो दलदल है उसको पहले निहारो
..................कितना कीचड़ है उसमें इसको तुम तोलना
अपने दल के कीचड़ को बाकी से तुलना कर
..................कसकर कमर को अपनी सीटों को मोलना
बारगेनिंग का कर हिसाब अगले की पढ़ किताब
..................उतरकर दलदल में तुम धीरे-धीरे डोलना

चुनाव के मंचों पर तो साथ में दिखना, परन्तु
..................विपक्षी के साथ भी तुम रखना रिलेशन
जाने कौन काम आये चुनाव परिणाम बाद
..................असली सत्ता सुख का ये पहला कंडीशन
इसके साथ-साथ याद रखना पहले पाठ को तुम
..................जिससे मिले एंट्री का क्वालिफिकेशन
नारों और गानों की लिस्ट तैयार कर
..................सुबह-शाम करते रहना उनका रेंन्डीशन

धर्मनिरपेक्षता पर खतरे की बातें करो
..................जो भी तुम चाहोगे वही हो जायेगा
देश को बचाने का रच डालो स्वांग गर
..................राजधर्म कोसों दूर पीछे रह जायेगा
सत्ता में आने के बाद भत्ता हड़प डालो
..................जनता हलकान हो पर प्लान फल जायेगा
धरते पकड़ते रहो दल और नेताओं को बस
..................राज करो पांच साल, देश चल जायेगा

साथी दल को संग लेकर लड़ लो चुनाव किन्तु
..................कहीं-कहीं उन्ही संग 'फ्रेंडली' कंटेस्ट हो
ट्राई कर लंगी मार उनको गिरा डालो
..................अगर उस सीट पर भी उनका इंटेरेस्ट हो
इससे भी न काम बने दो-चार कैंडीडेट खोज
..................उनको खड़ा करने का इंतजाम परफेक्ट हो
भ्रात सारे घात सीख उतरो मैदान में तुम
..................मेरी तरफ से तुमको आल द बेस्ट हो


शर्मराज की बात सुनी और लेकर उनका ज्ञान
बेशर्मी पर उतर गए और शुरू हुआ अभियान